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Bijnor News: अमानगढ़ के इको सेंसेटिव जोन पर बनी सैद्धांतिक सहमति

Thu, 16 Jan 2025 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2025 12:24 AM IST
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Theoretical consensus based on eco-sensitive zone of Amagarh
- शासन से अब उत्तराखंड सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव
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- एक किलोमीटर रखी गई है इको सेंसेटिव जोन की परिधि
- उत्तराखंड सरकार बाद में प्रस्ताव भारत सरकार को भेजेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अमानगढ़ में जहां एक ओर लगातार पर्यटन बढ़ रहा है, वहीं अब इको सेंसेटिव जोन में एक कदम आगे बढ़ा है। शासन स्तर पर हुई बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। अब इस प्रस्ताव को शासन स्तर से उत्तराखंड सरकार को भेजा जाएगा। इसे बाद में भारत सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
अमानगढ़ में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी तक पर्यटकों के रुकने के लिए वहां रिसॉर्ट या होटल निर्माण नहीं हो पाया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन साल में करीब आठ हजार पर्यटक अमानगढ़ का दीदार कर चुके हैं।
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ऐसे में वहां पर विकास की संभावना तलाशने पहुंचे लोग इको सेंसेटिव जोन निर्धारित न होने के कारण दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। वहीं, वन विभाग की माने तो अब इको सेंसेटिव जोन बनाने का काम एक कदम आगे बढ़ गया है। शासन स्तर पर हुई बैठक में इसे मंजूरी मिल चुकी है।
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डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि अब प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार को भेजा जाएगा। वहां इसे मंजूरी मिलने के बाद भारत सरकार के पास पहुंचेगा। वहीं इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना है।

अमानगढ़ को 2012 में मिला था टाइगर रिजर्व का दर्जा
अमानगढ़ रेंज कभी कार्बेट पार्क का ही हिस्सा हुआ करती थी। जब यूपी-उत्तराखंड अलग-अलग राज्य बने तो उस समय अमानगढ़ वन रेंज बिजनौर के हिस्से में आई। जबकि कार्बेट पार्क उत्तराखंड में चला गया। अमानगढ़ रेंज का रकबा 9500 हेक्टेयर है। इसमें करीब 8600 हेक्टेयर क्षेत्र टाइगर रिजर्व के तहत आता है। साल 2012 में अमानगढ़ वन रेंज को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। यहां 32 से ज्यादा बाघ, सौ से ज्यादा हाथी तो देखने को मिलते हैं।


मंजूरी का इंतजार कर रहे निवेशक
पिछले दिनों प्रशासन ने जब जिले में निवेश बढ़ाने के लिए उद्योगपतियों, व्यापारियों और निवेशकों को बुलाया, तब करीब दस एमओयू अमानगढ़ के पास रिसॉर्ट आदि विकसित करने के लिए हुए। ऐसे में निवेशक इको सेंसेटिव जोन घोषित न होने के कारण जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं। वहीं वन विभाग का कहना है कि इको सेंसेटिव जोन निर्धारित होने के बाद अमानगढ़ के बाहर विकास बढ़ेगा।
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