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Bijnor News: कार्यकाल खत्म होने से पहले लंबित काम निपटाने में जुटे ग्राम प्रधान
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नहटौर। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। 26 मई को वर्तमान ग्राम प्रधानों का पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो जाएगा। इसे लेकर गांवों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं हैं। वहीं वर्तमान प्रधान भी लंबित विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराने में जुट गए हैं।
वर्तमान ग्राम प्रधानों का शपथ ग्रहण 26 मई 2021 को हुआ था, जबकि 27 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक आयोजित की गई थी। पंचायतीराज अधिनियम के अनुसार पहली बैठक की तिथि से पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष होता है। ऐसे में अब पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। कार्यकाल समाप्ति नजदीक आते ही गांवों में विकास कार्यों को अंतिम रूप देने की कवायद तेज हो गई है। कई ग्राम प्रधान नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और पंचायत भवन से जुड़े कार्यों को जल्द पूरा कराने में लगे हैं। साथ ही भुगतान और अभिलेख संबंधी प्रक्रियाएं भी निपटाई जा रही हैं। उधर, प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अब तक नहीं हो पाने के कारण पंचायत चुनाव में देरी तय मानी जा रही है।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त किए जाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। वहीं, ग्राम प्रधान संगठन वर्तमान प्रधानों को ही कार्यवाहक बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ ही संभावित चुनाव को लेकर गांवों में दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है।
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यह है प्रशासक नियुक्त करने की प्रक्रिया
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शासन स्तर से पंचायतों को भंग मान लिया जाता है। इसके बाद पंचायतों के संचालन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहायक विकास अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाता है। नई पंचायतों के गठन तक वही वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते हैं।
प्रधान संगठन कर रहे कार्यवाहक बनाने की मांग
ग्राम प्रधान संगठनों की मांग है कि पंचायत चुनाव होने तक वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही कार्यवाहक प्रधान बनाया जाए। संगठनों का कहना है कि मौजूदा प्रधान गांव की समस्याओं और विकास कार्यों से परिचित हैं, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
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वर्तमान ग्राम प्रधानों का शपथ ग्रहण 26 मई 2021 को हुआ था, जबकि 27 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक आयोजित की गई थी। पंचायतीराज अधिनियम के अनुसार पहली बैठक की तिथि से पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष होता है। ऐसे में अब पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। कार्यकाल समाप्ति नजदीक आते ही गांवों में विकास कार्यों को अंतिम रूप देने की कवायद तेज हो गई है। कई ग्राम प्रधान नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और पंचायत भवन से जुड़े कार्यों को जल्द पूरा कराने में लगे हैं। साथ ही भुगतान और अभिलेख संबंधी प्रक्रियाएं भी निपटाई जा रही हैं। उधर, प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अब तक नहीं हो पाने के कारण पंचायत चुनाव में देरी तय मानी जा रही है।
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कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त किए जाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। वहीं, ग्राम प्रधान संगठन वर्तमान प्रधानों को ही कार्यवाहक बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ ही संभावित चुनाव को लेकर गांवों में दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है।
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यह है प्रशासक नियुक्त करने की प्रक्रिया
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शासन स्तर से पंचायतों को भंग मान लिया जाता है। इसके बाद पंचायतों के संचालन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहायक विकास अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाता है। नई पंचायतों के गठन तक वही वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते हैं।
प्रधान संगठन कर रहे कार्यवाहक बनाने की मांग
ग्राम प्रधान संगठनों की मांग है कि पंचायत चुनाव होने तक वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही कार्यवाहक प्रधान बनाया जाए। संगठनों का कहना है कि मौजूदा प्रधान गांव की समस्याओं और विकास कार्यों से परिचित हैं, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।