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‘नीट का अधिकार राज्यों को दिया जाए’

Fri, 17 Sep 2021 11:32 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 11:32 PM IST
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'The right of NEET should be given to the states'
‘नीट का अधिकार राज्यों को दिया जाए’
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बिजनौर। मेडिकल की नीट परीक्षा के आयोजन को लेकर अलग अलग मत है। कुछ शिक्षाविद नीट की परीक्षा की मेरिट में कट ऑफ लगाना गलत मानते हैं। इसके अलावा कुछ परीक्षा कराने के पक्षधर हैं। जबकि कुछ नीट परीक्षा समाप्त करके मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने का अधिकार राज्यों को दिए जाने की बात कह रहे हैं।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट का मामला केंद्र, राज्य के बीच विवाद उलझता लग रहा है। तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके नीट परीक्षा नहीं कराने का फैसला लिया है। इसको लेकर तमिलनाडु सरकार के अपने तर्क हैं। प्रस्ताव मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास जाएगा। जहां मंजूरी के बाद यह कानून की शक्ल ले लेगा। तमिलनाडु सरकार के फैसले के बाद अन्य राज्यों में भी नीट परीक्षा को लेकर सुगबुगाहट होने लगी है। जब इस मामले में शिक्षाविदों से बात की गई तो उन्होंने नीट परीक्षा कराने या न कराने को लेकर अलग-अलग राय दी है।
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विवेक कॉलेज बिजनौर के चेयरमैन अमित गोयल नीट परीक्षा को गलत बताते हैं। उनका तर्क है कि नीट या कोई भी प्रतियोगी परीक्षा हो वह प्रवेश का मात्र एक अंग है। परीक्षा की मेरिट में कट लगाना नियम विरुद्ध है। यह अर्हता नहीं है। दूसरी अर्हता लागू नहीं हो सकती है। उनका कहना है कि नीट परीक्षा बीएड परीक्षा की तरह हो।
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रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रुटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार का कहना है कि मेडिकल नीट परीक्षा होनी चाहिए। नीट परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के प्रयास होने चाहिए। पेपर लीक न हो इस पर फोकस होना चाहिए। नीट परीक्षा में जिस तरह सामान्य श्रेणी के इकोनोमिक वीकर सेक्शन अर्थात ई डब्लू एस के लिए व्यवस्था है, उसी तरह बीपीएल का प्रोविजन किया जाए।

साहु जैन कॉलेज नजीबाबाद की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शुभा माहेश्वरी प्रवेश परीक्षा को निरस्त करने के पक्ष में नहीं हैं। वह प्रक्रिया में सुधार पर जोर देती है। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल नीट परीक्षा को सही नहीं ठहराते हैं। उनका तर्क है कि हर राज्य की अपनी परिस्थितियां होती हैं। इसलिए मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने का अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए। केंद्र इस पर गंभीरता से विचार करें।
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