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Bijnor News: चांदपुर के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजाें से ली थी सीधी टक्कर

Fri, 15 Aug 2025 01:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Fri, 15 Aug 2025 01:06 AM IST
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The revolutionaries of Chandpur had taken on the British directly
चांदपुर। आजादी के आंदोलन में चांदपुर क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों का भी योगदान रहा है। आजादी पाने का ऐसा जनून जिसे सुनकर भी देश भक्ति का जज्बा जाग उठे। स्वतंत्रता आंदोलन की रूप रेखा रेलवे स्टेशन मार्ग स्थित महेश चंद्र गुप्ता के आवास पर तैयार की जाती थी। चांदपुर क्षेत्र के गांव किरतुपर, पीपलसाना, इस्माईलपुर, दत्तियाना, अजदेव खानपुर, सैंदवार, बास्टा, शेखपुरा, जमालुद्दीनपुर आदि अनेक गांव के लोगों ने देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है।
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स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद बंसल को तामपत्र से किया था सम्मानित
मोहल्ला कटारमल निवासी रामेश्वर प्रसाद बंसल करीब 20-22 साल की उम्र में ही देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए थे। उन्होनें देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वर्ष 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनके पुत्र राकेश बंसल ने बताया कि अंग्रेजों की बात न मानने पर उनके पिता को 17 नवंबर 1942 से 27 जनवरी 1944 तक विभिन्न जेलों में रहना पड़ा था। रामेश्वर प्रसाद बंसल को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त 1972 को ताम पत्र देकर सम्मानित किया गया था।
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रेलवे स्टेशन पर अंग्रेजी हुकूमत की रिकार्ड रूम को फूंककर लहराया था तिरंगा
रेलवे स्टेशन मार्ग आनंद भवन निवासी महेश चंद्र गुप्ता के आवास पर स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तैयार की जाती थी। जब महेश चंद्र गुप्ता की आयु 17 वर्ष की थी, तब अपने साथी 18 वर्षीय महेश शरण गर्ग के साथ 1942 को रेलवे स्टेशन पर बनी अंग्रेजी हुकूमत की रिकार्ड रूम को फूंककर तिरंगा झंडा लहराया था आंदोलन की लड़ाई में वे जेल भी गए। महेश चंद्र गुप्ता की पत्नी माया गुप्ता ने बताया कि जेल में इन स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बनियान पर नीम के पत्तों को पीसकर हरा रंग व गेरू से रंग भरकर व बनियान की सफेद पट्टी से तिरंगा तैयार किया था।
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