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बच्चों में रोटा वायरस से बढ़ रही डायरिया की समस्या
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बच्चों में रोटा वायरस से बढ़ रही डायरिया की समस्या
बिजनौर। जिले में रोटा वायरस से ग्रसित बच्चों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। अस्पतालों की ओपीडी में ज्यादातर बच्चे डायरिया से संबंधित आ रहे हैं। रोटा वायरस छह महीने से पांच साल तक के बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। अस्पतालों में करीब 10 से 15 बच्चे डायरिया के रोजाना आ रहे हैं।
रोटा वायरस से पीड़ित बच्चों में बुखार, पेट में दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्या होती हैं, जिसकी वजह से बच्चे के शरीर में पानी की कमी आ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार अगर बच्चे को बार-बार उल्टी और दस्त आ रहे हैं तो उसे तुरंत चिकित्सक के पास ले जाएं। बच्चों में फिर से रोटा वायरस के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। अस्पतालों में रोजाना 10 से 15 बच्चे रोटा वायरस से संबंधित आ रहे हैं। इसका असर बच्चों में करीब पांच दिन तक रहता है। इन दिनों बच्चों की सेहत का पूरा ध्यान रखें। बच्चों में पानी की कमी को दूर करने के लिए ओआरएस, जिंक पिलाते रहे। इससे बच्चे में पानी की कमी नहीं होगी। रोटा वायरस पानी से फैलता है। बच्चों को स्वच्छ पानी पिलाएं।
रोटा वायरस से ऐसे करें बचाव
बच्चें को रोटा वायरस वैक्सीन लगवाएं।
बच्चे के नाखून साफ रखें।
बच्चे के आसपास साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
बच्चे को प्लास्टिक की शीशी में पानी नहीं पिलाएं।
बच्चे को गुनगुना पानी पिलाएं।
डायरिया से पीड़ित जो बच्चे आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर बच्चों में रोटा वायरस के लक्षण मिल रहे हैं। रोटा वायरस से बचाव के लिए समय से वैक्सीन लगवानी चाहिए। वैक्सीन लगवाने से बच्चे में वायरस का प्रभाव कम हो जाता है।
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- विभू शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ
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बिजनौर। जिले में रोटा वायरस से ग्रसित बच्चों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। अस्पतालों की ओपीडी में ज्यादातर बच्चे डायरिया से संबंधित आ रहे हैं। रोटा वायरस छह महीने से पांच साल तक के बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। अस्पतालों में करीब 10 से 15 बच्चे डायरिया के रोजाना आ रहे हैं।
रोटा वायरस से पीड़ित बच्चों में बुखार, पेट में दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्या होती हैं, जिसकी वजह से बच्चे के शरीर में पानी की कमी आ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार अगर बच्चे को बार-बार उल्टी और दस्त आ रहे हैं तो उसे तुरंत चिकित्सक के पास ले जाएं। बच्चों में फिर से रोटा वायरस के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। अस्पतालों में रोजाना 10 से 15 बच्चे रोटा वायरस से संबंधित आ रहे हैं। इसका असर बच्चों में करीब पांच दिन तक रहता है। इन दिनों बच्चों की सेहत का पूरा ध्यान रखें। बच्चों में पानी की कमी को दूर करने के लिए ओआरएस, जिंक पिलाते रहे। इससे बच्चे में पानी की कमी नहीं होगी। रोटा वायरस पानी से फैलता है। बच्चों को स्वच्छ पानी पिलाएं।
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रोटा वायरस से ऐसे करें बचाव
बच्चें को रोटा वायरस वैक्सीन लगवाएं।
बच्चे के नाखून साफ रखें।
बच्चे के आसपास साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
बच्चे को प्लास्टिक की शीशी में पानी नहीं पिलाएं।
बच्चे को गुनगुना पानी पिलाएं।
डायरिया से पीड़ित जो बच्चे आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर बच्चों में रोटा वायरस के लक्षण मिल रहे हैं। रोटा वायरस से बचाव के लिए समय से वैक्सीन लगवानी चाहिए। वैक्सीन लगवाने से बच्चे में वायरस का प्रभाव कम हो जाता है।
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- विभू शर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ