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राम मंदिर आंदालन के बाद बदल गई थी जिले की सियासत

Sun, 02 Aug 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2020 11:54 PM IST
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The politics of the district had changed after Ram temple movement
राम मंदिर आंदोलन के बाद बदल गई थी जिले की सियासत
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बिजनौर। जिले में श्रीराममंदिर आंदोलन के बाद ही भाजपा की राजनीति का सितारा चमका था। 1990 में राममंदिर आंदोलन में जिले की राजनीति को पूरी तरह बदल डाला था। राम मंदिर आंदोलन से पहले जिले की राजनीति में भाजपा का कोई अस्तित्व नहीं था। पर राममंदिर के आंदोलन के बाद सब कुछ पूरी तरह बदल गया।

1991 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा जिले की सभी सीटों पर जीत गई थी। ऐसा जिले की राजनीति में पहली बार हुआ था। बिजनौर विधानसभा सीट से महेंद्रपाल सिंह, चांदपुर से डॉ. अमर सिंह, नगीना से ओमप्रकाश, नजीबाबाद से राजेंद्र प्रसाद, धामपुर से सुरेंद्र सिंह तथा उनकी हादसे में मौत होने के बाद उनके छोटे राजेंद्र सिंह, स्योहारा से महावीर सिंह, अफजलगढ़ से डॉ. इंद्रदेव सिंह विधायक बने थे। कल्याण सिंह सरकार में डॉ. अमर सिंह को स्वास्थ्य व महावीर सिंह को कृषि मंत्री बनाया गया था। भाजपा के सातों विधायक पहली बार विधायक बने थे। सातों सीटों पर भाजपा के काबिज होने से जिले की सियासत पूरी तरह बदल गई थी। हर कोई यह देखकर हैरान था। राम मंदिर आंदोलन लोगों के जहन में कूट कूटकर भरा था। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने के बाद कल्याण सिंह सरकार को भी बर्खास्त कर दिया गया। 1993 में दोबारा विधानसभा के चुनाव हुए। तब भाजपा के खाते में केवल चार सीट आईं। स्योहारा से महावीर सिंह, धामपुर से राजेंद्र सिंह, अफजलगढ़ से इंद्रदेव सिंह व बिजनौर से महेंद्रपाल सिंह विधायक बने। तीन सीट भाजपा को गवानी पड़ीं। तब से लेकर अब तक जिले की राजनीति में भाजपा का दबदबा कायम है। लोकसभा हो या विधानसभा हर चुनाव में सपा, बसपा, कांग्रेस व रालोद का भाजपा से ही मुकाबला होता आया है। 1991 के बाद मोदी लहर में 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की आठ में से छह सीटों पर भाजपा काबिज हुई। नूरपुर के विधायक लोकेंद्र चौहान की मौत के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को यह सीट गवानी पड़ी। यह सीट सपा के खाते में गई। नगीना व नजीबाबाद की सीट भी सपा की झोली में गईं। बाकी सीट बिजनौर, धामपुर, बढ़ापुर, चांदपुर, नहटौर सीट पर भाजपा काबिज है।
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