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शंकरलाल के लिखे नाटकों का कई राज्यों में होता है मंचन

Sun, 29 Aug 2021 11:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Aug 2021 11:12 PM IST
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The plays written by Shankarlal are staged in many states.
शंकर लाल शर्मा। - फोटो : BIJNOR
शंकरलाल के लिखे नाटकों का कई राज्यों में होता है मंचन
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बिजनौर। धामपुर निवासी शंकर लाल शर्मा हिंदी साहित्य के विकास के लिए लगाकार सराहनीय कार्य करते आ रहे हैं। हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्य भाषा बनवाने के लिए किए गए प्रयास में वह भी शामिल रहे हैं। उनके लिखे नाटकों का देश के कई राज्यों में मंचन किया जा चुका है। शंकर लाल शर्मा धामपुर के आरएसएम कॉलेज में साढ़े तीन दशक तक हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे। वह उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ के कार्यकारिणी सदस्य रह चुके हैं।
उन्होंने युवाओं को हिंदी से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने युवा महोत्सव के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को निर्देशन देकर निखारा। उनके द्वारा लिखे गए नाटकों का राष्ट्रीय स्तर पर मंचन हुआ। मंचन में अभिनय करने वाले ज्यादातर कलाकार उनके छात्र थे। उनके नाटकों का अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, वाराणसी, इलाहाबाद और गुलमर्ग में भी मंचन हुआ। डॉ. शंकर लाल शर्मा ने सीतायनी, भीष्म पितामह शर शैया से, कसौटी जिंदगी की, एक साक्षात्कार पंडित अमृतलाल नागर के साथ, हिंदी पत्रकारिता और संचार माध्यम स्वरूप और प्रयोग, हिंदी कार्मिकी और हिंदी भाषा और व्याकरण आदि अट्ठारह कृतियों की रचना की। कोरोना काल में उनके द्वारा लिखे गए दोहे खूब पसंद किए गए।
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कई सम्मान मिल चुके हैं
शंकर लाल शर्मा को सेवारत्न, भाषाभूषण, जयशंकर प्रसाद सम्मान, हिंदी भूषण जैसे सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्य भाषा बनवाने के लिए दुबई, मॉरीशस, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड सहित कई देशों के दूतावासों के माध्यम से अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आधारशिला फाउंडेशन के बैनर तले निरंतर प्रयास कर रहे हैं । डा. शंकर लाल शर्मा बताते हैं कि जब वह साहित्यिक यात्रा पर फ्रांस पहुंचे थे। तब एफिल टावर पर हिंदी में एफिल टावर पर आपका स्वागत है लिखा मिला था। डॉ. शंकर लाल शर्मा पदम विभूषण गोपालदास नीरज के शिष्य रहे तथा गोपालदास नीरज अपने अंत समय तक धामपुर उनके आवास पर आते रहे।
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