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फोन पर चलता है अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Tue, 28 Mar 2017 12:24 AM IST
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अस्पताल की दीवार पान पीत से रंगा हुआ
- फोटो : अमर उजाला
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नहटौर में बदहाल स्वास्थ्य सेवा सुधार होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि दवा खाने के लिए मरीजों को अस्पताल में पानी तक नसीब नहीं होता है।
अस्पताल में दीवारें पान-गुटखों की पीक से रंगी होने के कारण गंदगी की दास्तां खुद बयां कर रही है। चिकित्सक अस्पताल में कम अपने घरों व क्वार्टरों में अधिक रहते हैं। इमरजेंसी व प्रसूति केंद्र में मरीज भटकते रहते हैं। शाम चार बजे के बाद सुबह दस बजे तक फोन कालिंग पर अस्पताल चलता है। मरीज फोन से चिकित्सकों को बुलाते हैं। नहटौर सीएचसी में वर्षों से पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। रोहताश कुमार, पारस जैन, जावेद अहमद, अतुल कुमार, संजय कुमार, आशीष शर्मा, प्रवीण चौधरी आदि का कहना है कि कई बार हैंडपंप को लगवाने की मांग की जा चुकी है।
सरकार से भारी भरकम बजट मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में एक हैंडपंप नहीं लगवा पाया है। मरीज दवा खाने के लिए पानी को तरस जाते हैं। सरकार की पाबंदी के बाद भी अस्पताल के अंदर दीवारें गुटखा और पान की पीक से रंगी पड़ी हुई है। गुटखा-पान खाने वाले कर्मचारी अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं।
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शौचालयों में गंदगी भरी पड़ी हुई है। कई शौचालयों में एक्सपायर दवाइयां भरी पड़ी हुई है। सीएचसी में सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक चिकित्सक अपनी हाजिरी लगाने आते हैं। कुछ ही चिकित्सक अस्पताल में रह जाते हैं। इमरजेंसी व प्रसूति केंद्र का हाल तो और भी बुरा बना हुआ है। शाम चार बजे के बाद अस्पताल में सन्नाटा पसर जाता है। प्रसव के लिए आई महिलाएं भी भटकती रहती है। कई बार पुलिस भी जब आरोपियों के मेडिकल कराने आती है, तो उनके सामने भी यही समस्या रहती है। रात में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण अस्पताल में अंधेरा छाया रहता है। सीएचसी प्रभारी जीबी कटारिया का कहना है कि वह प्रसूति केंद्र पर संविदा नर्सों को ड्यूटी पर तैनात रहने के लिए कई बार कह चुके हैं। सीएमओ डॉ सुखवीर सिंह का कहना है कि मौके पर पहुंचकर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल में दीवारें पान-गुटखों की पीक से रंगी होने के कारण गंदगी की दास्तां खुद बयां कर रही है। चिकित्सक अस्पताल में कम अपने घरों व क्वार्टरों में अधिक रहते हैं। इमरजेंसी व प्रसूति केंद्र में मरीज भटकते रहते हैं। शाम चार बजे के बाद सुबह दस बजे तक फोन कालिंग पर अस्पताल चलता है। मरीज फोन से चिकित्सकों को बुलाते हैं। नहटौर सीएचसी में वर्षों से पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। रोहताश कुमार, पारस जैन, जावेद अहमद, अतुल कुमार, संजय कुमार, आशीष शर्मा, प्रवीण चौधरी आदि का कहना है कि कई बार हैंडपंप को लगवाने की मांग की जा चुकी है।
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सरकार से भारी भरकम बजट मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में एक हैंडपंप नहीं लगवा पाया है। मरीज दवा खाने के लिए पानी को तरस जाते हैं। सरकार की पाबंदी के बाद भी अस्पताल के अंदर दीवारें गुटखा और पान की पीक से रंगी पड़ी हुई है। गुटखा-पान खाने वाले कर्मचारी अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं।
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शौचालयों में गंदगी भरी पड़ी हुई है। कई शौचालयों में एक्सपायर दवाइयां भरी पड़ी हुई है। सीएचसी में सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक चिकित्सक अपनी हाजिरी लगाने आते हैं। कुछ ही चिकित्सक अस्पताल में रह जाते हैं। इमरजेंसी व प्रसूति केंद्र का हाल तो और भी बुरा बना हुआ है। शाम चार बजे के बाद अस्पताल में सन्नाटा पसर जाता है। प्रसव के लिए आई महिलाएं भी भटकती रहती है। कई बार पुलिस भी जब आरोपियों के मेडिकल कराने आती है, तो उनके सामने भी यही समस्या रहती है। रात में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण अस्पताल में अंधेरा छाया रहता है। सीएचसी प्रभारी जीबी कटारिया का कहना है कि वह प्रसूति केंद्र पर संविदा नर्सों को ड्यूटी पर तैनात रहने के लिए कई बार कह चुके हैं। सीएमओ डॉ सुखवीर सिंह का कहना है कि मौके पर पहुंचकर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।