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ग्रामीणों का सब्र टूटा, बच्चों को नहीं भेजा स्कूल

Fri, 07 Feb 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2020 12:18 AM IST
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The patience of the villagers was broken, the children were not sent to school
ग्रामीणों का सब्र टूटा, बच्चों को नहीं भेजा स्कूल
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हल्दौर (बिजनौर)। गांव जैनुलाअबदीनपुर का प्राइमरी स्कूल पिछले तीन वर्षों से जर्जर अवस्था में है। पर बेसिक शिक्षा विभाग ने इस स्कूल का जीर्णोद्धार नहीं किया है। इस स्कूल के बच्चों को गांव धनौरी के स्कूल में शिफ्ट कर इतिश्री कर दी है। ग्रामीण कई बार गांव जैनुलाअबदीनपुर में स्कूल का भवन बनवाने की मांग कर चुके हैं। ग्रामीणों ने एक सप्ताह के भीतर विद्यालय के निर्माण की शीघ्र प्रक्रिया शुरू न होने पर अपने बच्चों को स्कूल न भेजने का निर्णय लिया।
प्राइमरी स्कूल में छह से 10 वर्ष की आयु के बच्चे पढ़ते हैं। विकास क्षेत्र हल्दौर के गांव जैनुलाअबदीनपुर के प्राइमरी स्कूल को तीन वर्ष पूर्व बेसिक शिक्षा विभाग ने जर्जर घोषित कर दिया था तथा इस स्कूल के बच्चों को जूनियर हाई स्कूल धनौरी के स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था कर दी थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी की जल्द ही नए स्कूल का भवन बन जाएगा, पर बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किए हुए तीन वर्ष हो गए हैं। अभी भी स्कूल का नया भवन नहीं बना है। जबकि धनौरी गांव उनके गांव से दो किलोमीटर की दूरी पर है। बेसिक शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते करीब 100 से भी अधिक बच्चों को दो किमी की दूरी पैदल चल कर स्कूल जाना पड़ता है। बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने गांव में पंचायत कर दूसरे गांव में शिफ्ट किए गए स्कूल में बच्चों को नहीं भेजने का निर्णय लिया है। हाल ही में क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर गुलदार दिखाई देने से अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
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शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर करने का निर्णय
बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11 बजे सरपंच रामपाल सिंह, पीतम सिंह, मो. रशीद, रमजानी, असलम, शौनाथ सैनी, रामकुमार सैनी, सूरज सिंह आदि अनेक अभिभावकों विभाग ग्रामवासियों की पंचायत हुई। पंचायत में अभिभावकों ने कहा कि भवन निर्माण कराने के लिए कई बार शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की, लेकिन समाधान न हो सका। प्रशासनिक अधिकारियों की बेसुधी से त्रस्त होकर अभिभावकों ने गांव में एक सप्ताह के भीतर विद्यालय के निर्माण की शीघ्र प्रक्रिया शुरू न होने पर अपने बच्चों को स्कूल न भेजने का निर्णय लिया। साथ ही ग्रामवासियों नेेेे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पोर्टल पर करने का निर्णय लिया है। ग्राम प्रधान खवेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में विद्यालय का निर्माण कराएं जाने की मांग को लेकर उनकी ओर से कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है।
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बच्चों को बैठक ने के लिए नहीं है पर्याप्त स्थान
गांव धनौरी में स्थित जूनियर हाईस्कूल में चार कमरों में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चों को पढ़ाने के लिए बैठाया जाता है। कमरों में समस्त बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। इससे बच्चों के पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राइमरी स्कूल में 151 में जूनियर हाईस्कूल में 65 बच्चे पंजीकृत हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई व उनका स्वास्थ्य प्रभावित होने को लेकर चिंतित है। प्राथमिक विद्यालय के मुख्य अध्यापक प्रभात कुमार का कहना है कि कमरों में बच्चों के बैठने का पर्याप्त स्थान न होने के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

मामला नहीं है संज्ञान में : बीएसए
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार बीईओ से स्कूल का भवन बनवाने की मांग की गई है, पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। दूसरी ओर, बीएसए महेश चंद्र का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है पूरे प्रकरण की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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