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बर्ड फ्लू को लेकर कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने परामर्शिका जारी की
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बर्ड फ्लू को लेकर वन विभाग हुआ चौकस
कालागढ़। राज्य में बर्ड फ्लू घोषित होने के बाद कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से विभाग के अधिकारियों व गश्ती दलों के लिए परामर्शिका जारी की है। गश्ती दलों को जंगली व पालतू शूकर पर विशेष निगरानी करने को कहा गया है।
राज्य में बर्ड फ्लू के घोषित होने के बाद कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से परामर्शिका जारी कर पक्षियों से बचाव व पक्षी की देखभाल के दिशा निर्देश जारी किए हैं। वन अधिकारियों ने सबसे अधिक आशंका जंगली व वनों से लगी आबादी में पल रहे शूकर में वायरस संक्रमण की आशंका व्यक्त की है। कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती ने बताया कि बर्ड फ्लू का वायरस पालतू मुर्गियों से वन्य व अन्य पशुओं में संचारित होता है। उन्होंने कहा कि पक्षियों की देखभाल के समय पीपीई किट या सुरक्षा कपड़े पहनकर, आंखों पर आई शील्ड या फेस शील्ड का प्रयोग करें। बार-बार हाथ साबुन से धोएं। पक्षियों की देखभाल के दौरान न कुछ खाएं और न ही पिये।
यदि पक्षी का शव मिले तो उसे प्लास्टिक के थैले में रखकर थर्माकॉल के बाक्स में कूलेंट जैल पैक के साथ सील करें। मृत पक्षी के दिखाई देने पर रेंज कार्यालय को सूचित करें। जंगली व प्रवासी पक्षियों के असामान्य व्यवहार एवं मृत्यु की निगरानी की जाएं। आशंका जताई गई है कि संक्रमित पक्षी के मल से यह संक्रमण वनों से लगी आबादी में पालतू व जंगली शूकर में भी फैल सकता है। कालागढ़, झिरना व ढेला रेंज में गश्ती दलों को उच्च अधिकारियों के आदेशों की जानकारी देते हुए पालन करने को कहा गया है। वनों में पक्षियों पर निगाह रखी जा रही है।
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सारस को वन में छोड़ा
कालागढ़ के वनक्षेत्राधिकारी आरके भट्ठ ने बताया कि कालागढ़ में दो दिनों पूर्व नई कालोनी में मिले घायल सारस पक्षी को स्वस्थ होने पर वनों में छोड़ दिया गया है। सारस को चिकित्सा सुविधा मिलने पर बचा लिया गया है। इस पक्षी को कुत्तों ने घायल कर दिया था। यदि समय पर त्वरित अनुक्रिया दल की मदद व चिकित्सा सुविधा न मिल पाती तो सारस को बचा पाना कठिन था।
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कालागढ़। राज्य में बर्ड फ्लू घोषित होने के बाद कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से विभाग के अधिकारियों व गश्ती दलों के लिए परामर्शिका जारी की है। गश्ती दलों को जंगली व पालतू शूकर पर विशेष निगरानी करने को कहा गया है।
राज्य में बर्ड फ्लू के घोषित होने के बाद कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से परामर्शिका जारी कर पक्षियों से बचाव व पक्षी की देखभाल के दिशा निर्देश जारी किए हैं। वन अधिकारियों ने सबसे अधिक आशंका जंगली व वनों से लगी आबादी में पल रहे शूकर में वायरस संक्रमण की आशंका व्यक्त की है। कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती ने बताया कि बर्ड फ्लू का वायरस पालतू मुर्गियों से वन्य व अन्य पशुओं में संचारित होता है। उन्होंने कहा कि पक्षियों की देखभाल के समय पीपीई किट या सुरक्षा कपड़े पहनकर, आंखों पर आई शील्ड या फेस शील्ड का प्रयोग करें। बार-बार हाथ साबुन से धोएं। पक्षियों की देखभाल के दौरान न कुछ खाएं और न ही पिये।
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यदि पक्षी का शव मिले तो उसे प्लास्टिक के थैले में रखकर थर्माकॉल के बाक्स में कूलेंट जैल पैक के साथ सील करें। मृत पक्षी के दिखाई देने पर रेंज कार्यालय को सूचित करें। जंगली व प्रवासी पक्षियों के असामान्य व्यवहार एवं मृत्यु की निगरानी की जाएं। आशंका जताई गई है कि संक्रमित पक्षी के मल से यह संक्रमण वनों से लगी आबादी में पालतू व जंगली शूकर में भी फैल सकता है। कालागढ़, झिरना व ढेला रेंज में गश्ती दलों को उच्च अधिकारियों के आदेशों की जानकारी देते हुए पालन करने को कहा गया है। वनों में पक्षियों पर निगाह रखी जा रही है।
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सारस को वन में छोड़ा
कालागढ़ के वनक्षेत्राधिकारी आरके भट्ठ ने बताया कि कालागढ़ में दो दिनों पूर्व नई कालोनी में मिले घायल सारस पक्षी को स्वस्थ होने पर वनों में छोड़ दिया गया है। सारस को चिकित्सा सुविधा मिलने पर बचा लिया गया है। इस पक्षी को कुत्तों ने घायल कर दिया था। यदि समय पर त्वरित अनुक्रिया दल की मदद व चिकित्सा सुविधा न मिल पाती तो सारस को बचा पाना कठिन था।