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सामूहिक खुदकुशी: कर्ज के दलदल में ऐसा फंसा परिवार, तंग आकर किया मौत का चुनाव, रुला देगी मुफलिसी की कहानी
Thu, 26 Jun 2025 08:11 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Thu, 26 Jun 2025 08:11 PM IST
सार
Bijnor News: कर्ज से परेशान होकर पुखराज ने अपनी पत्नी रमेशिया, बेटियों नीतू और शीतू के साथ जहर खा लिया। मां और दो बेटियों की मौत हो गई, जबकि पुखराज की हालत गंभीर है। डीएम ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
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विलाप करते पुखराज के परिवार के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Suicide Case: पुखराज और उसका परिवार कर्ज के जाल में बुरी तरह फंस चुका था। मूल रकम पर ब्याज चढ़ता रहा और पुखराज पर कर्ज की रकम भी बढ़ती गई। पहली बार बड़ी बेटी की शादी में चार साल पहले कर्ज लिया, इसके बाद उसे चुकाने के लिए नया कर्ज लेता रहा। अब गांव के साहूकारों और दो फाइनेंस कंपनियों का उस पर कर्ज है। पुखराज, उसकी पत्नी और बेटा तीनों कर्ज में डूबे हुए थे। बेटे ने भी एक साहूकार के यहां अपनी बाइक को गिरवी रखकर 25 हजार का कर्ज लिया था।
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रमेशिया, अनिता और सविता की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर जिले के नूरपुर के गांव टंडेरा के रहने वाले पुखराज ने अपनी पत्नी और दो बेटियों के संग जहर निगल लिया। फिलहाल पुखराज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है, जबकि उसकी पत्नी रमेशिया और दोनों बेटियां नीतू व शीतू दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं।
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विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
पुखराज बेहद ही मुफलिसी में गुजर बसर रहा था। उसके हिस्से में दो बीघा जमीन पुश्तैनी आई थी, जिसे उसने कई साल पहले बेच दिया था। अब गांव के बाहर घर के नाम पर उसकी झोपड़ी पड़ी है। तिरपाल से बनी झोपड़ी और अंदर का नजारा उसकी गरीबी की दास्तां बयां कर रहा है।
जांच करती पुलिस और फोरेंसिक टीम।
- फोटो : अमर उजाला
पुखराज घोड़ा बुग्गी चलाकर मजदूरी करता था, उसका बेटा सचिन भी मजदूरी करता है। अब जितनी मजदूरी मिलती थी, उसमें परिवार चलाना और चार लोगों की दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी एक मुसीबत है। ऐसे में कर्ज की दलदल से वह निकल ही नहीं पाया।
दस दिनों से अदा नहीं कर पाया कर्ज की किस्त
पुखराज की पत्नी ने चांदपुर में स्थित स्वाभिमान एजेंसी (फाइनेंस कंपनी) से 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था। मय ब्याज के 24 मासिक किस्तों में यह रकम जमा करनी थी। अब तक 16 किस्त जमा हो चुकी थी। इस महीने की 15 तारीख को 17वीं किस्त जमा होनी थी। मगर वह जमा नहीं कर पाया।
रिकवरी एजेंट से उसने 25 तारीख तक हर साल में किस्त जमा करने का वादा भी किया था। अब 25 तारीख भी बीत गई। ऐसे में रिकवरी एजेंट वसूली के लिए आता। किस्त जमा करने को लेकर ही दो दिनों से पुखराज और उसके बेटे में झगड़ा चल रहा था। बताया गया कि बेटा सचिन भी मजदूरी करता है, जोकि घर में कोई पैसा नहीं दे रहा था। बृहस्पतिवार की सुबह भी बाप-बेटे में झगड़ा हुआ।
पुखराज की पत्नी ने चांदपुर में स्थित स्वाभिमान एजेंसी (फाइनेंस कंपनी) से 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था। मय ब्याज के 24 मासिक किस्तों में यह रकम जमा करनी थी। अब तक 16 किस्त जमा हो चुकी थी। इस महीने की 15 तारीख को 17वीं किस्त जमा होनी थी। मगर वह जमा नहीं कर पाया।
रिकवरी एजेंट से उसने 25 तारीख तक हर साल में किस्त जमा करने का वादा भी किया था। अब 25 तारीख भी बीत गई। ऐसे में रिकवरी एजेंट वसूली के लिए आता। किस्त जमा करने को लेकर ही दो दिनों से पुखराज और उसके बेटे में झगड़ा चल रहा था। बताया गया कि बेटा सचिन भी मजदूरी करता है, जोकि घर में कोई पैसा नहीं दे रहा था। बृहस्पतिवार की सुबह भी बाप-बेटे में झगड़ा हुआ।
आर्थिक तंगी में अपने भी हो गए दूर
पुखराज सिंह तीन भाई हैं, तीनों अलग-अलग रहते हैं। बड़े भाई कैलाश, छोटे भाई परवीन सिंह के परिवार अलग हैं। काफी समय से आपस में तीनों भाइयों में बोलचाल बंद है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दिन से पुखराज व उसके बेटे सचिन में गालीगलौज हो रही थी। बताया गया कि कर्ज को लेकर ही दोनों में विवाद हो रहा था। अब पुखराज की गरीबी को देखते हुए कोई उसकी मदद को भी आगे नहीं आता था।
पुखराज सिंह तीन भाई हैं, तीनों अलग-अलग रहते हैं। बड़े भाई कैलाश, छोटे भाई परवीन सिंह के परिवार अलग हैं। काफी समय से आपस में तीनों भाइयों में बोलचाल बंद है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दिन से पुखराज व उसके बेटे सचिन में गालीगलौज हो रही थी। बताया गया कि कर्ज को लेकर ही दोनों में विवाद हो रहा था। अब पुखराज की गरीबी को देखते हुए कोई उसकी मदद को भी आगे नहीं आता था।
कई जगहों से ले रखा था कर्ज
पुखराज और उसके परिवार पर एक जगह नहीं, बल्कि कई जगहों का कर्ज था। गांव के साहूकारों से भी कर्ज ले रखा था। इसके साथ साथ राजा का ताजपुर स्थित बालाजी फाइनेंस कंपनी का भी कर्ज बताया जा रहा है। जोकि गांव-गांव महिलाओं का समूह बनाकर कर्ज देती है।
पुखराज और उसके परिवार पर एक जगह नहीं, बल्कि कई जगहों का कर्ज था। गांव के साहूकारों से भी कर्ज ले रखा था। इसके साथ साथ राजा का ताजपुर स्थित बालाजी फाइनेंस कंपनी का भी कर्ज बताया जा रहा है। जोकि गांव-गांव महिलाओं का समूह बनाकर कर्ज देती है।
बेटा लेकर आया जहर, पिता ने पत्नी और बेटियों संग निकला
बताया जा रहा है कि जहरीला पदार्थ सचिन लेकर आया था। जोकि कर्ज को लेकर हो रहे झगड़े के बीच खुद निगलने की धमकी दे रहा था। उक्त जहरीला पदार्थ पुखराज ने छीन लिया था। इसके बाद सचिन मजदूरी करने कहीं चला गया, उसके लौटने से पहले ही पुखराज, उसकी पत्नी और दो बेटियों ने जहर निगल लिया।
बताया जा रहा है कि जहरीला पदार्थ सचिन लेकर आया था। जोकि कर्ज को लेकर हो रहे झगड़े के बीच खुद निगलने की धमकी दे रहा था। उक्त जहरीला पदार्थ पुखराज ने छीन लिया था। इसके बाद सचिन मजदूरी करने कहीं चला गया, उसके लौटने से पहले ही पुखराज, उसकी पत्नी और दो बेटियों ने जहर निगल लिया।