{"_id":"6085af448ebc3ed20242ccdb","slug":"the-backward-species-of-wheat-have-excellent-yields-bijnor-news-mrt536003048","type":"story","status":"publish","title_hn":"गेहूं की पिछेती प्रजातियों की शानदार रही पैदावार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गेहूं की पिछेती प्रजातियों की शानदार रही पैदावार
विज्ञापन
नगीना के कृषि विज्ञान केंद्र में खड़ी गेहूं की नई प्रजाति की फसल। फाइल फोटो।
- फोटो : BIJNOR
गेहूं की पिछेती प्रजातियों की शानदार रही पैदावार
बिजनौर। गन्ना सीजन में खेत देर से खाली होने पर भी किसान अब गेहूं की फसल बो सकते हैं वो भी बिना रोग वाली फसल। जिले में गेहूं की दो पिछेती प्रजातियों का ट्रायल सफल रहा है। इन प्रजातियों ने अच्छी पैदावार दी है। इन प्रजातियों का बीज अगले साल किसानों को दिया जाएगा। इससे गेहूं का रकबा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
जिले में गन्ने का रकबा करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर तक रहता है। गन्ने का रकबा लगातार बढ़ने की वजह से गेहूं का रकबा प्रभावित होता है। कृषि विभाग गेहूं का रकबा बढ़ाने के लिए काफी कोशिश करता है। किसान भी गेहूं बोना चाहते हैं, लेकिन जिले में गेहूं की बुवाई केवल 25 दिसंबर के आसपास तक ही होती है। इस समय अगर बारिश पड़ जाए तो किसान गेहूं की बुवाई भी नहीं कर पाते हैं। इसके बाद अगर गेहूं बोते भी थे तो पैदावार कम निकलती थी। अधिकतर किसान खेतों में बाद में मक्का या गन्ना ही बोते हैं।
गेहूं की ज्यादा पिछेती प्रजाति न होने की वजह से किसानों को खेत दो से तीन महीने के लिए खाली ही छोड़ने पड़ते थे। इस साल कृषि विज्ञान केंद्र नगीना ने गेहूं की पिछेती प्रजाति एचडी-3271 व एचआई 1621 बोई थी। यह प्रजाति 15 जनवरी तक बोई जा सकती है। इनका जमाव शानदार रहा और कटाई सामान्य प्रजातियों के गेहूं के साथ ही हो गई। पैदावार भी अच्छी रही। इन प्रजातियों से गेहूं का रकबा पांच से सात हजार हेक्टेयर तक बढ़ सकता है।
विज्ञापन
गेहूं की इतनी निकली पैदावार
एचडी-3271 प्रजाति की औसत पैदावार 59.20 क्विंटल तथा एचआई-1621 की औसत पैदावार 46.10 हेक्टेयर तक रहती है। पहले साल में एचडी 3271 की औसत पैदावार 43 से 48.5 क्विंटल व एचआई-1621 की औसत पैदावार 38 से 44.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रही। दोनों प्रजातियों में गेहूं की फसल के लिए सबसे खतरनाक माना जाने वाला पीला रतुआ रोग भी नहीं आया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह के अनुसार गेहूं की दोनों पिछेती प्रजातियों की पैदावार शानदार रही है। अगले साल किसानों को इन प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
विज्ञापन
बिजनौर। गन्ना सीजन में खेत देर से खाली होने पर भी किसान अब गेहूं की फसल बो सकते हैं वो भी बिना रोग वाली फसल। जिले में गेहूं की दो पिछेती प्रजातियों का ट्रायल सफल रहा है। इन प्रजातियों ने अच्छी पैदावार दी है। इन प्रजातियों का बीज अगले साल किसानों को दिया जाएगा। इससे गेहूं का रकबा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
जिले में गन्ने का रकबा करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर तक रहता है। गन्ने का रकबा लगातार बढ़ने की वजह से गेहूं का रकबा प्रभावित होता है। कृषि विभाग गेहूं का रकबा बढ़ाने के लिए काफी कोशिश करता है। किसान भी गेहूं बोना चाहते हैं, लेकिन जिले में गेहूं की बुवाई केवल 25 दिसंबर के आसपास तक ही होती है। इस समय अगर बारिश पड़ जाए तो किसान गेहूं की बुवाई भी नहीं कर पाते हैं। इसके बाद अगर गेहूं बोते भी थे तो पैदावार कम निकलती थी। अधिकतर किसान खेतों में बाद में मक्का या गन्ना ही बोते हैं।
विज्ञापन
गेहूं की ज्यादा पिछेती प्रजाति न होने की वजह से किसानों को खेत दो से तीन महीने के लिए खाली ही छोड़ने पड़ते थे। इस साल कृषि विज्ञान केंद्र नगीना ने गेहूं की पिछेती प्रजाति एचडी-3271 व एचआई 1621 बोई थी। यह प्रजाति 15 जनवरी तक बोई जा सकती है। इनका जमाव शानदार रहा और कटाई सामान्य प्रजातियों के गेहूं के साथ ही हो गई। पैदावार भी अच्छी रही। इन प्रजातियों से गेहूं का रकबा पांच से सात हजार हेक्टेयर तक बढ़ सकता है।
विज्ञापन
गेहूं की इतनी निकली पैदावार
एचडी-3271 प्रजाति की औसत पैदावार 59.20 क्विंटल तथा एचआई-1621 की औसत पैदावार 46.10 हेक्टेयर तक रहती है। पहले साल में एचडी 3271 की औसत पैदावार 43 से 48.5 क्विंटल व एचआई-1621 की औसत पैदावार 38 से 44.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रही। दोनों प्रजातियों में गेहूं की फसल के लिए सबसे खतरनाक माना जाने वाला पीला रतुआ रोग भी नहीं आया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह के अनुसार गेहूं की दोनों पिछेती प्रजातियों की पैदावार शानदार रही है। अगले साल किसानों को इन प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।