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Bijnor News: जिले की दस पालिकाएं सामान्य, दो एससी के लिए आरक्षित
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बिजनौर नगर पालिका
- फोटो : BIJNOR
जिले की दस पालिकाएं सामान्य, दो एससी के लिए आरक्षित
बिजनौर। शासन ने सोमवार को निकायों के अध्यक्ष पद के आरक्षण की घोषणा भी कर दी गई। इस बार जिले की दो पालिकाओं में बदलाव हुआ है। जी हां, किरतपुर और शेरकोट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है जबकि बाकी दस पालिकाओं में अध्यक्ष पद की सीट सामान्य है। बिजनौर पालिका को इस बार अनारक्षित कर दिया गया है जबकि पिछली बार महिला के लिए आरक्षित थी। नगर पंचायतों की बात करें तो पांच सामान्य व एक महिला के लिए आरक्षित की गई है।
पिछली बार हुए चुनाव में जिले में सिर्फ हल्दौर पालिका ही एससी वर्ग के लिए आरक्षित थी। इस बार हल्दौर को अनारक्षित की श्रेणी में कर दिया गया। वहीं जिले की सबसे चर्चित पालिका किरतपुर को इस बार एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। शेरकोट में भी अध्यक्ष अनुसूचित जाति का ही बनेगा। नगर पंचायतों की बात करें तो जिले में झालू को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। बाकी पांच नगर पंचायतों में कोई भी चुनाव लड़ सकेगा।
बता दें कि पिछले सप्ताह शासन ने वार्ड के आरक्षण की सूची जारी की थी। इसके बाद से ही अध्यक्ष पद के आरक्षण को लेकर इंतजार चल रहा था। लोगों में आरक्षण को लेकर चल रही अटकलों पर सोमवार की शाम विराम लग गया।
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पालिका आरक्षण की स्थिति
बिजनौर अनारक्षित
नगीना अनारक्षित
नजीबाबाद अनारक्षित
नूरपुर अनारक्षित
स्योहारा अनारक्षित
चांदपुर अनारक्षित
नहटौर अनारक्षित
धामपुर अनारक्षित
अफजलगढ़ अनारक्षित
हल्दौर अनारक्षित
किरतपुर अनुसूचित जाति
शेरकोट अनुसूचित जाति
नगर पंचायत आरक्षण की स्थिति
झालू महिला
मंडावर अनारक्षित
बढ़ापुर अनारक्षित
सहसपुर अनारक्षित
जलालाबाद अनारक्षित
साहनपुर अनारक्षित
नगीना नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट सामान्य
नगीना। नगीना नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट सामान्य घोषित होने के बाद एक तरफ जहां मौजूदा चेयरपर्सन ताहिरा बेगम के परिवार के लिए खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वहीं पिछड़े वर्ग की सीट होने पर लड़ने का ख्वाब पाले बैठे नगीना के कई दिग्गज नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया।
नगीना नगरपालिका अध्यक्ष पद पर पिछले दो दशकों से पूर्व चेयरमैन मरहूम शेख खलीलुर्रहमान व उनकी पत्नी ताहिरा बेगम जीतते आ रहे हैं। सियासी गलियारे में इस बात के कयास लगाए जा रहे थे की एक परिवार का पिछले 4 चुनाव से लगातार चले आ रहे वर्चस्व को तोड़ने के लिए शायद इस बार यह सीट पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो जाए। नगीना में पिछड़े वर्ग से कई दावेदार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सामान्य सीट होने पर उनके अरमानों पर पानी फिर गया। नगीना में सामान्य सीट पर इस बार के चुनाव में जहां वर्तमान चेयर पर्सन ताहिरा बेगम निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर एक बार फिर किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी का टिकट हाजी रोशन को दिए जाने कि संभावना व्यक्त की जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी से सना ग्रुप के चेयरमैन सरफराज अंसारी व शेख नौशाद भी मजबूती से टिकट मांग रहे हैं। सामान्य सीट होने के बाद भी सरफराज अंसारी का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। मरहूम पूर्व चेयरमैन शेख खलीलुर्रहमान के सगे भाई शेख अजीमु रहमान भी एआईएमआईएम के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए अपनी ताल ठोक चुके हैं। नगरपालिका नगीना के चुनावी इतिहास में भाजपा का कमल नगर पालिका अध्यक्ष पद पर अभी तक नहीं खिल पाया है लेकिन फिर भी टिकट के दावेदारों की कोई कमी नहीं है। भाजपा से केशव दीक्षित, शीतांशु अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन प्रभात चंद गुप्ता, लवी मित्तल, अमित गुप्ता,परलाद कुशवाह, मुकेश सैनी, प्रदीप गर्ग, संजीव अग्रवाल आदि टिकट की मजबूत दावेदारी कर रहे हैं।
पहली बार अनुसूचित सीट हुई किरतपुर पालिका
किरतपुर। किरतपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद अबकी बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। यह पहला अवसर है, जब नगर पालिका परिषद किरतपुर का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है।
किरतपुर नगर पालिका परिषद पर दो बार से चेयरमैन अब्दुल मन्नान का कब्जा रहा है। इससे पूर्व उनकी पत्नी रुबीना मन्नान चेयर पर्सन थीं और वर्तमान में अब्दुल मन्नान चेयरमैन हैं। 1988-89 में पहली बार जब किरतपुर में नगर पालिका परिषद के चुनाव हुए तब किरतपुर अध्यक्ष पद सीट अनारक्षित थी। उसके बाद से लगातार पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग के लिए होती रही है। आजादी के बाद से यह पहला अवसर है। जब किरतपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है। जिसके चलते जहां एक ओर अनुसूचित जाति वर्ग में हर्ष व्याप्त है। चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सामान्य जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के दावेदारों के चेहरे लटक गए हैं। संवाद
27 साल बाद सामान्य के लिए आरक्षित
हल्दौर। नगर निकाय के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शासन द्वारा आरक्षण सूची जारी कर दी गई है। नगर में करीब 27 वर्ष बाद अध्यक्ष पद के लिए सामान्य सीट घोषित किए जाने पर प्रत्याशियों में खुशी की लहर दौड़ गई।
रविवार को नगर में निकाय चुनाव के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अनारक्षित आरक्षण सूची जारी होने पर प्रत्याशियों में खुशी की लहर दौड़ गई, जबकि अन्य वर्गों के चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में मायूसी छा गई। नगरवासियों के अनुसार करीब 27 वर्ष पूर्व अनारक्षित सीट पर सन 1995 से 2000 तक कुंवर प्रमोद कुमार ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीता, सन 2000 से 2005 तक आरक्षित महिला सीट पर उमा देवी ने अध्यक्ष पद पर रही। 2005 से 2006 तक चार्ज एसडीएम सदर पर रहा। सन 2006 से 2011 तक एससी महिला सीट पर शोभा रानी चेयरपर्सन रही। सन 2011 में भी एसडीएम सदर पर चार्ज रहा। सन 2012 में पिछड़ा महिला वर्ग पर चेयरपर्सन चुनाव हुआ, जिसमें पिछड़ा महिला वर्ग सीट पर सन 2012 से 2017 तक सुमन वर्मा चेयरपर्सन रहीं। सन 2017 में एससी सीट पर चुनाव हुआ, जिसमें अमर सिंह उर्फ पम्मी ने अध्यक्ष पद पर अपना कार्यकाल पूरा किया। अध्यक्ष पद के अनारक्षित पद की सीट की घोषणा होते ही चुनावी दांव पेज लड़ाने शुरू हो गए हैं।
सामान्य सीट होने पर बढ़ी हलचल
नहटौर। नगर पालिका परिषद नहटौर की सामान्य सीट होने के बाद प्रत्याशियों की हलचल बढ़ गई है। पूर्व में पिछड़ा वर्ग सामान्य सीट होने के कारण एक दर्जन के लगभग प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को हराकर फिरोजा खातून ने नगरपालिका नहटौर की चेयरपर्सन की कुर्सी पर कब्जा जमाया। लेकिन इस बार सामान्य वर्ग की सीट होने के कारण दो दर्जन से भी अधिक चेयरमैन पद के दावेदार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
सोमवार को निर्वाचन आयोग द्वारा नगरपालिका नहटौर की सीट सामान्य होने पर नगर में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली, पिछली नगर पालिका चुनाव में सीट पिछड़ा वर्ग होने के कारण कुछ लोग चुनाव नहीं लड़ पाए थे। इस बार उन्होंने अपनी कमर कस ली है और चुनाव में उतरने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं भाजपा से टिकट के दावेदारों में भी खुशी का माहौल है।
स्योहारा पालिका : फिर सामान्य हुई यहां की सीट
स्योहारा। स्योहारा नगर पालिका अध्यक्ष सीट अपने अस्तित्व में आने के बाद से अभी तक आरक्षित नहीं हुई है। इस बार पालिका अध्यक्ष के दावेदारों को पालिकाध्यक्ष सीट आरक्षित सीट होने की पूरी उम्मीद थी लेकिन इस बार भी पालिका अध्यक्ष सीट सामान्य होने से आरक्षित वर्गों के दावेदारों में मायुसी छा गई है।
स्योहारा नगर पालिका सन 1952 से 1974 तक नगर पंचायत हुआ करती थी। 1974 में नगर पालिका का गठन हुआ जिसके बाद सन 1986 में नगर पालिका का भवन बन कर तैयार हुआ। 1988 में पहली बार हाजी मसूद उल हसन नगर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे। 1993 पुन: हाजी मसूदउल हसन ने चुनाव जीता। सन 2002 के पालिकाध्यक्ष चुनाव में अख्तर जलील ने हाजी मसूद उल हसन को हरा कर चुनाव जीता। वर्ष 2007 से 2017 तक पूर्व विधायक हाजी नईमुलहसन की पत्नी तरन्नुम मलिक नगर पालिका की कुर्सी पर लगातार दस वर्षो तक पालिका चैयरपर्सन की कुर्सी पर विराजमान रही। 2017 के चुनाव में अख्तर जलील पालिकाध्यक्ष बने उनको 6731 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी मुकेश कुमार रस्तौगी को 4930 वोट मिलें और दूसरे नंबर पर रहे। समाजवादी प्रत्याशी नईमुहसन को 4828 वोट मिले हुए तीसरे नंबर पर रहे।
1988 से लगातार स्योहारा नगर पालिका की सीट आरक्षण में सामान्य होती चली आ रही है। इस कारण किसी अन्य जाति के प्रत्याशी को नगरपालिका की कुर्सी पर बैठने का मौका नहीं मिला। आरक्षण की बात करें तो चक्र के हिसाब से उत्तर प्रदेश की दो नगरपालिका ऐसी हैं, जिनमें शब्द आधा स आने के कारण आज तक उन नगरपालिका को आरक्षण में नहीं लाया गया। इस बार स्योहारा पालिकाध्यक्ष पद की सीट आरक्षित होने की पूरी संभावना थी। इस बार भी सीट सामान्य होने से आरक्षण वर्ग के दावेदारों की आशाओं पर पानी फिर गया है।
आरक्षण सूची जारी होते ही चेयरमैन पद के दावेदारों का इंतजार हुआ समाप्त
चांदपुर। चांदपुर नगरपालिका परिषद के चेयरमैन पद के लिए शासन द्वारा जारी आरक्षण सूची में अनारक्षित घोषित होते ही अनारक्षित श्रेणी में आने वाले दावेदारों के चेहेरे खिल उठे हैं। वहीं सीट आरक्षित होने की प्रतिक्षा में अपनी गोटी बैठाने वाले दावेदारों को निराशा हुई है।
चांदपुर नगरपालिका परिषद की चेयरमैन सीट के लिए भाजपा व सपा से टिकट के लिए दावेदारों की लंबी लाइन है। दावेदार अपनी गोटी बैठाने की जुगत में लगे हुए थे। बस इंतजार था सीट आरक्षण घोषित होने का। शासन द्वारा सोमवार को चेयरमैन पद के लिए घोषित आरक्षण सूची में चांदपुर चेयरमैन के लिए सीट अनारक्षित की गई है। पिछले चुनाव में चांदपुर की सीट महिला थी।
निकाय चुनाव की आरक्षण सूची जारी होते ही चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। अभी किसी भी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। लेकिन भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की संख्या अधिक दिखाई दे रही है। करीब एक दर्जन दावेदार टिकट की दौड़ में लगे हुए हैं। जिसके चलते पार्टी के हाई नेतृत्व से संपर्क बनाने में लगे हुए हैं। वहीं समाजवादी पार्टी में भी चुनाव लड़ने के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। कई ऐसे दावेदार भी सपा नेतृत्व से संपर्क बनाए हुए हैं।
अफजलगढ़ पालिका: आरक्षण ने बदल दिए दावेदारों के समीकरण
अफजलगढ़। बहुप्रतिक्षित नगरपालिका अध्यक्ष पद की आरक्षण सूची जारी होने के बाद राजनितिक समीकरणों में भारी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। बीते पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित था। जबकि प्रस्तावित निकाय चुनाव के लिए पालिका अध्यक्ष का पद अनारक्षित घोषित किया गया है, जिसके चलते अब यहां सामान्य जाति के उम्मीदवार की ओर से भी दावेदारी ठोकने की संभावना बलवती हो गई है। हालांकि अफजलगढ़ पालिका क्षेत्र मे 70 प्रतिशत मतदाता पिछड़ी व अन्य जातियों से ताल्लुक रखते है। जिसके चलते इस बार अध्यक्ष पद के चुनाव मे राजनीतिक समीकरणों में भारी बदलाव की संभावना व्यक्त की जा रही है। संवाद
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बिजनौर। शासन ने सोमवार को निकायों के अध्यक्ष पद के आरक्षण की घोषणा भी कर दी गई। इस बार जिले की दो पालिकाओं में बदलाव हुआ है। जी हां, किरतपुर और शेरकोट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है जबकि बाकी दस पालिकाओं में अध्यक्ष पद की सीट सामान्य है। बिजनौर पालिका को इस बार अनारक्षित कर दिया गया है जबकि पिछली बार महिला के लिए आरक्षित थी। नगर पंचायतों की बात करें तो पांच सामान्य व एक महिला के लिए आरक्षित की गई है।
पिछली बार हुए चुनाव में जिले में सिर्फ हल्दौर पालिका ही एससी वर्ग के लिए आरक्षित थी। इस बार हल्दौर को अनारक्षित की श्रेणी में कर दिया गया। वहीं जिले की सबसे चर्चित पालिका किरतपुर को इस बार एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। शेरकोट में भी अध्यक्ष अनुसूचित जाति का ही बनेगा। नगर पंचायतों की बात करें तो जिले में झालू को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। बाकी पांच नगर पंचायतों में कोई भी चुनाव लड़ सकेगा।
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पालिका आरक्षण की स्थिति
बिजनौर अनारक्षित
नगीना अनारक्षित
नजीबाबाद अनारक्षित
नूरपुर अनारक्षित
स्योहारा अनारक्षित
चांदपुर अनारक्षित
नहटौर अनारक्षित
धामपुर अनारक्षित
अफजलगढ़ अनारक्षित
हल्दौर अनारक्षित
किरतपुर अनुसूचित जाति
शेरकोट अनुसूचित जाति
नगर पंचायत आरक्षण की स्थिति
झालू महिला
मंडावर अनारक्षित
बढ़ापुर अनारक्षित
सहसपुर अनारक्षित
जलालाबाद अनारक्षित
साहनपुर अनारक्षित
नगीना नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट सामान्य
नगीना। नगीना नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट सामान्य घोषित होने के बाद एक तरफ जहां मौजूदा चेयरपर्सन ताहिरा बेगम के परिवार के लिए खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वहीं पिछड़े वर्ग की सीट होने पर लड़ने का ख्वाब पाले बैठे नगीना के कई दिग्गज नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया।
नगीना नगरपालिका अध्यक्ष पद पर पिछले दो दशकों से पूर्व चेयरमैन मरहूम शेख खलीलुर्रहमान व उनकी पत्नी ताहिरा बेगम जीतते आ रहे हैं। सियासी गलियारे में इस बात के कयास लगाए जा रहे थे की एक परिवार का पिछले 4 चुनाव से लगातार चले आ रहे वर्चस्व को तोड़ने के लिए शायद इस बार यह सीट पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो जाए। नगीना में पिछड़े वर्ग से कई दावेदार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सामान्य सीट होने पर उनके अरमानों पर पानी फिर गया। नगीना में सामान्य सीट पर इस बार के चुनाव में जहां वर्तमान चेयर पर्सन ताहिरा बेगम निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर एक बार फिर किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी का टिकट हाजी रोशन को दिए जाने कि संभावना व्यक्त की जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी से सना ग्रुप के चेयरमैन सरफराज अंसारी व शेख नौशाद भी मजबूती से टिकट मांग रहे हैं। सामान्य सीट होने के बाद भी सरफराज अंसारी का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। मरहूम पूर्व चेयरमैन शेख खलीलुर्रहमान के सगे भाई शेख अजीमु रहमान भी एआईएमआईएम के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए अपनी ताल ठोक चुके हैं। नगरपालिका नगीना के चुनावी इतिहास में भाजपा का कमल नगर पालिका अध्यक्ष पद पर अभी तक नहीं खिल पाया है लेकिन फिर भी टिकट के दावेदारों की कोई कमी नहीं है। भाजपा से केशव दीक्षित, शीतांशु अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन प्रभात चंद गुप्ता, लवी मित्तल, अमित गुप्ता,परलाद कुशवाह, मुकेश सैनी, प्रदीप गर्ग, संजीव अग्रवाल आदि टिकट की मजबूत दावेदारी कर रहे हैं।
पहली बार अनुसूचित सीट हुई किरतपुर पालिका
किरतपुर। किरतपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद अबकी बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। यह पहला अवसर है, जब नगर पालिका परिषद किरतपुर का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है।
किरतपुर नगर पालिका परिषद पर दो बार से चेयरमैन अब्दुल मन्नान का कब्जा रहा है। इससे पूर्व उनकी पत्नी रुबीना मन्नान चेयर पर्सन थीं और वर्तमान में अब्दुल मन्नान चेयरमैन हैं। 1988-89 में पहली बार जब किरतपुर में नगर पालिका परिषद के चुनाव हुए तब किरतपुर अध्यक्ष पद सीट अनारक्षित थी। उसके बाद से लगातार पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग के लिए होती रही है। आजादी के बाद से यह पहला अवसर है। जब किरतपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है। जिसके चलते जहां एक ओर अनुसूचित जाति वर्ग में हर्ष व्याप्त है। चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सामान्य जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के दावेदारों के चेहरे लटक गए हैं। संवाद
27 साल बाद सामान्य के लिए आरक्षित
हल्दौर। नगर निकाय के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शासन द्वारा आरक्षण सूची जारी कर दी गई है। नगर में करीब 27 वर्ष बाद अध्यक्ष पद के लिए सामान्य सीट घोषित किए जाने पर प्रत्याशियों में खुशी की लहर दौड़ गई।
रविवार को नगर में निकाय चुनाव के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अनारक्षित आरक्षण सूची जारी होने पर प्रत्याशियों में खुशी की लहर दौड़ गई, जबकि अन्य वर्गों के चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में मायूसी छा गई। नगरवासियों के अनुसार करीब 27 वर्ष पूर्व अनारक्षित सीट पर सन 1995 से 2000 तक कुंवर प्रमोद कुमार ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीता, सन 2000 से 2005 तक आरक्षित महिला सीट पर उमा देवी ने अध्यक्ष पद पर रही। 2005 से 2006 तक चार्ज एसडीएम सदर पर रहा। सन 2006 से 2011 तक एससी महिला सीट पर शोभा रानी चेयरपर्सन रही। सन 2011 में भी एसडीएम सदर पर चार्ज रहा। सन 2012 में पिछड़ा महिला वर्ग पर चेयरपर्सन चुनाव हुआ, जिसमें पिछड़ा महिला वर्ग सीट पर सन 2012 से 2017 तक सुमन वर्मा चेयरपर्सन रहीं। सन 2017 में एससी सीट पर चुनाव हुआ, जिसमें अमर सिंह उर्फ पम्मी ने अध्यक्ष पद पर अपना कार्यकाल पूरा किया। अध्यक्ष पद के अनारक्षित पद की सीट की घोषणा होते ही चुनावी दांव पेज लड़ाने शुरू हो गए हैं।
सामान्य सीट होने पर बढ़ी हलचल
नहटौर। नगर पालिका परिषद नहटौर की सामान्य सीट होने के बाद प्रत्याशियों की हलचल बढ़ गई है। पूर्व में पिछड़ा वर्ग सामान्य सीट होने के कारण एक दर्जन के लगभग प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को हराकर फिरोजा खातून ने नगरपालिका नहटौर की चेयरपर्सन की कुर्सी पर कब्जा जमाया। लेकिन इस बार सामान्य वर्ग की सीट होने के कारण दो दर्जन से भी अधिक चेयरमैन पद के दावेदार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
सोमवार को निर्वाचन आयोग द्वारा नगरपालिका नहटौर की सीट सामान्य होने पर नगर में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली, पिछली नगर पालिका चुनाव में सीट पिछड़ा वर्ग होने के कारण कुछ लोग चुनाव नहीं लड़ पाए थे। इस बार उन्होंने अपनी कमर कस ली है और चुनाव में उतरने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं भाजपा से टिकट के दावेदारों में भी खुशी का माहौल है।
स्योहारा पालिका : फिर सामान्य हुई यहां की सीट
स्योहारा। स्योहारा नगर पालिका अध्यक्ष सीट अपने अस्तित्व में आने के बाद से अभी तक आरक्षित नहीं हुई है। इस बार पालिका अध्यक्ष के दावेदारों को पालिकाध्यक्ष सीट आरक्षित सीट होने की पूरी उम्मीद थी लेकिन इस बार भी पालिका अध्यक्ष सीट सामान्य होने से आरक्षित वर्गों के दावेदारों में मायुसी छा गई है।
स्योहारा नगर पालिका सन 1952 से 1974 तक नगर पंचायत हुआ करती थी। 1974 में नगर पालिका का गठन हुआ जिसके बाद सन 1986 में नगर पालिका का भवन बन कर तैयार हुआ। 1988 में पहली बार हाजी मसूद उल हसन नगर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे। 1993 पुन: हाजी मसूदउल हसन ने चुनाव जीता। सन 2002 के पालिकाध्यक्ष चुनाव में अख्तर जलील ने हाजी मसूद उल हसन को हरा कर चुनाव जीता। वर्ष 2007 से 2017 तक पूर्व विधायक हाजी नईमुलहसन की पत्नी तरन्नुम मलिक नगर पालिका की कुर्सी पर लगातार दस वर्षो तक पालिका चैयरपर्सन की कुर्सी पर विराजमान रही। 2017 के चुनाव में अख्तर जलील पालिकाध्यक्ष बने उनको 6731 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी मुकेश कुमार रस्तौगी को 4930 वोट मिलें और दूसरे नंबर पर रहे। समाजवादी प्रत्याशी नईमुहसन को 4828 वोट मिले हुए तीसरे नंबर पर रहे।
1988 से लगातार स्योहारा नगर पालिका की सीट आरक्षण में सामान्य होती चली आ रही है। इस कारण किसी अन्य जाति के प्रत्याशी को नगरपालिका की कुर्सी पर बैठने का मौका नहीं मिला। आरक्षण की बात करें तो चक्र के हिसाब से उत्तर प्रदेश की दो नगरपालिका ऐसी हैं, जिनमें शब्द आधा स आने के कारण आज तक उन नगरपालिका को आरक्षण में नहीं लाया गया। इस बार स्योहारा पालिकाध्यक्ष पद की सीट आरक्षित होने की पूरी संभावना थी। इस बार भी सीट सामान्य होने से आरक्षण वर्ग के दावेदारों की आशाओं पर पानी फिर गया है।
आरक्षण सूची जारी होते ही चेयरमैन पद के दावेदारों का इंतजार हुआ समाप्त
चांदपुर। चांदपुर नगरपालिका परिषद के चेयरमैन पद के लिए शासन द्वारा जारी आरक्षण सूची में अनारक्षित घोषित होते ही अनारक्षित श्रेणी में आने वाले दावेदारों के चेहेरे खिल उठे हैं। वहीं सीट आरक्षित होने की प्रतिक्षा में अपनी गोटी बैठाने वाले दावेदारों को निराशा हुई है।
चांदपुर नगरपालिका परिषद की चेयरमैन सीट के लिए भाजपा व सपा से टिकट के लिए दावेदारों की लंबी लाइन है। दावेदार अपनी गोटी बैठाने की जुगत में लगे हुए थे। बस इंतजार था सीट आरक्षण घोषित होने का। शासन द्वारा सोमवार को चेयरमैन पद के लिए घोषित आरक्षण सूची में चांदपुर चेयरमैन के लिए सीट अनारक्षित की गई है। पिछले चुनाव में चांदपुर की सीट महिला थी।
निकाय चुनाव की आरक्षण सूची जारी होते ही चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। अभी किसी भी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। लेकिन भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की संख्या अधिक दिखाई दे रही है। करीब एक दर्जन दावेदार टिकट की दौड़ में लगे हुए हैं। जिसके चलते पार्टी के हाई नेतृत्व से संपर्क बनाने में लगे हुए हैं। वहीं समाजवादी पार्टी में भी चुनाव लड़ने के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। कई ऐसे दावेदार भी सपा नेतृत्व से संपर्क बनाए हुए हैं।
अफजलगढ़ पालिका: आरक्षण ने बदल दिए दावेदारों के समीकरण
अफजलगढ़। बहुप्रतिक्षित नगरपालिका अध्यक्ष पद की आरक्षण सूची जारी होने के बाद राजनितिक समीकरणों में भारी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। बीते पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित था। जबकि प्रस्तावित निकाय चुनाव के लिए पालिका अध्यक्ष का पद अनारक्षित घोषित किया गया है, जिसके चलते अब यहां सामान्य जाति के उम्मीदवार की ओर से भी दावेदारी ठोकने की संभावना बलवती हो गई है। हालांकि अफजलगढ़ पालिका क्षेत्र मे 70 प्रतिशत मतदाता पिछड़ी व अन्य जातियों से ताल्लुक रखते है। जिसके चलते इस बार अध्यक्ष पद के चुनाव मे राजनीतिक समीकरणों में भारी बदलाव की संभावना व्यक्त की जा रही है। संवाद