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झारखंडी मंदिर में स्थापित है स्वयंभू शिवलिंग
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बिजनौर के ग्राम खारी में स्थित झारखंडी मंदिर।
- फोटो : BIJNOR
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झारखंडी मंदिर में स्थापित है स्वयंभू शिवलिंग
झालू। खारी-धर्मपुरा के पास झारखंडी मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। झारखंडी शिवालय का इतिहास कई सदियों पुराना है। मंदिर कब बना, यह किसी को मालूम नहीं। पीढ़ी दर पीढ़ी बुजुर्ग यही कहते आ रहे हैं कि हमसे पहले बना है। सिर्फ यही कहा जाता है कि उस समय खारी में महर्षि (उच्च ब्राह्मण वर्ग) की जमींदारी थी। महाशिवरात्रि पर शिवभक्तों का सैलाब जलाभिषेक के लिए उमड़ता है। यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी हो जाती है।
झारखंडी मंदिर समिति के उपाध्यक्ष और पूर्व प्रधान सूरज सिंह बताते हैं कि मंदिर चार सौ साल पुराना हो सकता है। बताते हैैं कि महर्षि लोगों की जमींदारी के समय मंदिर वाली जगह पर झाड़ हुआ करते थे। जमीन को खेती के लायक बनाने को महर्षि के जिलेदार ने मजदूरों को सफाई पर लगाया। सफाई के दौरान जमीन में एक शिवलिंग नुमा पत्थर दिखाई दिया। मजदूरों ने काफी गहराई तक खोदाई की, लेकिन पत्थर का अंत दिखाई नहीं दिया। मजदूर का फावड़ा पत्थर पर लग गया। फावडे़ के लगते ही पत्थर से दूध जैसे द्रव्य की धार निकली। यह बात क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई। जितने मुंह उतनी बात। लोग इसे चमत्कार मानने लगे। इसी बीच दूर-दूर तक जमीन से शिवलिंग निकलने की सूचना पहुंच गई। लोग पूजा-अर्चना करने लगे। वहां चढ़ावा चढ़ने लगा। तब महर्षि ने श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए इस स्थान पर मंदिर निर्माण कराना शुरू कर दिया।
बुजुर्ग बताते हैं कि तब से आज तक शिवलिंग का आकार और लंबाई प्रति वर्ष बढ़ती रहती है। वर्तमान में शिवलिंग की लंबाई तीन फुट और मोटाई 1.5 फुट है। खोदाई के दौरान शिवलिंग पर पड़े फावडे़ का निशान आज भी मौजूद है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य ही पूरी होती है।
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प्राचीन काल से है आस्था का प्रतीक
प्रत्येक सोमवार को व महाशिवरात्रि एवं सावन माह में श्रद्धालु मंदिर में कांवड़ चढ़ाने आते हैं। महाशिवरात्रि पर बडे़ मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर सिंह के निर्देशन में मंदिर की देखभाल समिति करती है। मंदिर परिसर में शिव परिवार, राम दरबार, कृष्ण सुदामा, क्षीर सागर, मां सरस्वती, श्रवण कुमार, दधीचि, हनुमान, शनिदेव, मां संतोषी, यमराज आदि भगवान जी की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है, जिस कारण झारखंडी शिव मंदिर प्राचीन समय से आस्था का प्रतीक है। मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थित शिवलिंग निरंतर बढ़ता चला आ रहा है।
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झालू। खारी-धर्मपुरा के पास झारखंडी मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। झारखंडी शिवालय का इतिहास कई सदियों पुराना है। मंदिर कब बना, यह किसी को मालूम नहीं। पीढ़ी दर पीढ़ी बुजुर्ग यही कहते आ रहे हैं कि हमसे पहले बना है। सिर्फ यही कहा जाता है कि उस समय खारी में महर्षि (उच्च ब्राह्मण वर्ग) की जमींदारी थी। महाशिवरात्रि पर शिवभक्तों का सैलाब जलाभिषेक के लिए उमड़ता है। यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी हो जाती है।
झारखंडी मंदिर समिति के उपाध्यक्ष और पूर्व प्रधान सूरज सिंह बताते हैं कि मंदिर चार सौ साल पुराना हो सकता है। बताते हैैं कि महर्षि लोगों की जमींदारी के समय मंदिर वाली जगह पर झाड़ हुआ करते थे। जमीन को खेती के लायक बनाने को महर्षि के जिलेदार ने मजदूरों को सफाई पर लगाया। सफाई के दौरान जमीन में एक शिवलिंग नुमा पत्थर दिखाई दिया। मजदूरों ने काफी गहराई तक खोदाई की, लेकिन पत्थर का अंत दिखाई नहीं दिया। मजदूर का फावड़ा पत्थर पर लग गया। फावडे़ के लगते ही पत्थर से दूध जैसे द्रव्य की धार निकली। यह बात क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई। जितने मुंह उतनी बात। लोग इसे चमत्कार मानने लगे। इसी बीच दूर-दूर तक जमीन से शिवलिंग निकलने की सूचना पहुंच गई। लोग पूजा-अर्चना करने लगे। वहां चढ़ावा चढ़ने लगा। तब महर्षि ने श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए इस स्थान पर मंदिर निर्माण कराना शुरू कर दिया।
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बुजुर्ग बताते हैं कि तब से आज तक शिवलिंग का आकार और लंबाई प्रति वर्ष बढ़ती रहती है। वर्तमान में शिवलिंग की लंबाई तीन फुट और मोटाई 1.5 फुट है। खोदाई के दौरान शिवलिंग पर पड़े फावडे़ का निशान आज भी मौजूद है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य ही पूरी होती है।
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प्राचीन काल से है आस्था का प्रतीक
प्रत्येक सोमवार को व महाशिवरात्रि एवं सावन माह में श्रद्धालु मंदिर में कांवड़ चढ़ाने आते हैं। महाशिवरात्रि पर बडे़ मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर सिंह के निर्देशन में मंदिर की देखभाल समिति करती है। मंदिर परिसर में शिव परिवार, राम दरबार, कृष्ण सुदामा, क्षीर सागर, मां सरस्वती, श्रवण कुमार, दधीचि, हनुमान, शनिदेव, मां संतोषी, यमराज आदि भगवान जी की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है, जिस कारण झारखंडी शिव मंदिर प्राचीन समय से आस्था का प्रतीक है। मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थित शिवलिंग निरंतर बढ़ता चला आ रहा है।

बिजनौर के ग्राम खारी के झारखंडी मंदिर में स्थापित स्वयंभू शिवलिंग।- फोटो : BIJNOR