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Bijnor News: सरकारी विभागों को 3.41 करोड़ की सप्लाई, नहीं दिया टैक्स हिसाब
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अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। जेम पोर्टल के जरिये सरकारी विभागों को 3.41 करोड़ रुपये की सप्लाई करने वाले 233 व्यापारियों ने जीएसटी का कोई हिसाब नहीं दिया। दो साल के कारोबार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जांच में टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। जेम पोर्टल स्क्रूटनी के बाद यह आंकड़े सामने आए हैं। अब जीएसटी विभाग टैक्स संबंधी अनियमितताओं की जांच कर रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों की स्क्रूटनी कर देय टैक्स की सत्यता परख रहा है। अब एआई टूल्स के जरिये जेम पोर्टल से सरकारी विभागों को सामान सप्लाई करने वाले कारोबारियों की जांच की गई। जेम पोर्टल की स्क्रूटनी और टैक्स देने वाले व्यापारियों का सूची से मिलान किया गया। इसमें सामने आया कि दो साल में 233 व्यापारियों ने 3.41 करोड़ के सामान की सप्लाई सरकारी विभागों को दी लेकिन जीएसटी जमा नहीं किया, जिससे सरकार को राजस्व की हानि हुई। सत्र 2024-25 में जेम पोर्टल से 97 कारोबारियों ने 1.80 करोड़ रुपये का सामान सरकारी विभाग को सप्लाई किया। सत्र 2025-26 में जेम पोर्टल से 136 कारोबारियों ने सरकारी विभाग में 1.61 करोड़ रुपये का सामान सप्लाई किया। लेकिन इसका जीएसटी नहीं जमा कराया गया। अब एआई से स्क्रूटनी के बाद इसका खुलासा हुआ है।
जेम पोर्टल पर क्या-क्या सप्लाई होता है
जेम पोर्टल सिर्फ सरकारी विभागों में सामान की सप्लाई के लिए है। इस पर पंजीकृत व्यापारी ही सरकारी विभागों को सामान की सप्लाई करता है। जेम पोर्टल से सरकारी विभागों में पेन, पेंसिल, पेपर, रजिस्टर, स्टेपलर और अन्य स्टेशनरी आइटम, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, सर्वर, सीसीटीवी कैमरे, बल्ब और पंखे, ऑफिस की टेबल, कुर्सी, अलमारी, बेड और सोफे, झाड़ू, वाइपर, फिनाइल, डस्टबिन, सैनिटाइजेशन उत्पाद आदि की सप्लाई होती है।
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टैक्स चोरी पकड़ने में एआई मददगार
एआई के माध्यम से फर्जी फर्मों, टर्नओवर छिपाने और बिना टैक्स चुकाए सप्लाई करने वाले सप्लायरों को आसानी से ट्रैक किया जा रहा है। एआई और डेटा एनालिटिक्स की मदद से जेम पोर्टल, जीएसटी रिटर्न के मिलान के जरिये टैक्स चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामलों का पता लगाया जा रहा है।
551 व्यापारियों के 33 करोड़ के कारोबार की जांच शुरू
इससे पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने स्क्रूटनी के बाद जीएसटी में विसंगति का खुलासा किया है। बिजनौर में 551 व्यापारियों के 33 करोड़ रुपये के कारोबार को संदिग्ध मानते हुए विभाग को सूचना जारी की। इसके बाद जीएसटी विभाग ने इन व्यापारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के बाद व्यापारियों को टैक्स, अर्थदंड की कार्रवाई होगी।
वर्जन::
जिले के 233 व्यापारियों ने जेम पोर्टल से दो साल में सरकारी विभागों को 3.41 करोड़ रुपये के सामान की सप्लाई की है लेकिन जीएसटी विभाग को इसकी सूचना नहीं दी। सरकार को राजस्व की हानि हुई है। जेम पोर्टल की एआई स्क्रूटनी में इसका खुलासा हुआ। व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। ....राजीव आर्थर, संयुक्त आयुक्त (कार्यपालक), जीएसटी, बिजनौर
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बिजनौर। जेम पोर्टल के जरिये सरकारी विभागों को 3.41 करोड़ रुपये की सप्लाई करने वाले 233 व्यापारियों ने जीएसटी का कोई हिसाब नहीं दिया। दो साल के कारोबार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जांच में टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। जेम पोर्टल स्क्रूटनी के बाद यह आंकड़े सामने आए हैं। अब जीएसटी विभाग टैक्स संबंधी अनियमितताओं की जांच कर रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों की स्क्रूटनी कर देय टैक्स की सत्यता परख रहा है। अब एआई टूल्स के जरिये जेम पोर्टल से सरकारी विभागों को सामान सप्लाई करने वाले कारोबारियों की जांच की गई। जेम पोर्टल की स्क्रूटनी और टैक्स देने वाले व्यापारियों का सूची से मिलान किया गया। इसमें सामने आया कि दो साल में 233 व्यापारियों ने 3.41 करोड़ के सामान की सप्लाई सरकारी विभागों को दी लेकिन जीएसटी जमा नहीं किया, जिससे सरकार को राजस्व की हानि हुई। सत्र 2024-25 में जेम पोर्टल से 97 कारोबारियों ने 1.80 करोड़ रुपये का सामान सरकारी विभाग को सप्लाई किया। सत्र 2025-26 में जेम पोर्टल से 136 कारोबारियों ने सरकारी विभाग में 1.61 करोड़ रुपये का सामान सप्लाई किया। लेकिन इसका जीएसटी नहीं जमा कराया गया। अब एआई से स्क्रूटनी के बाद इसका खुलासा हुआ है।
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जेम पोर्टल पर क्या-क्या सप्लाई होता है
जेम पोर्टल सिर्फ सरकारी विभागों में सामान की सप्लाई के लिए है। इस पर पंजीकृत व्यापारी ही सरकारी विभागों को सामान की सप्लाई करता है। जेम पोर्टल से सरकारी विभागों में पेन, पेंसिल, पेपर, रजिस्टर, स्टेपलर और अन्य स्टेशनरी आइटम, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, सर्वर, सीसीटीवी कैमरे, बल्ब और पंखे, ऑफिस की टेबल, कुर्सी, अलमारी, बेड और सोफे, झाड़ू, वाइपर, फिनाइल, डस्टबिन, सैनिटाइजेशन उत्पाद आदि की सप्लाई होती है।
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टैक्स चोरी पकड़ने में एआई मददगार
एआई के माध्यम से फर्जी फर्मों, टर्नओवर छिपाने और बिना टैक्स चुकाए सप्लाई करने वाले सप्लायरों को आसानी से ट्रैक किया जा रहा है। एआई और डेटा एनालिटिक्स की मदद से जेम पोर्टल, जीएसटी रिटर्न के मिलान के जरिये टैक्स चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामलों का पता लगाया जा रहा है।
551 व्यापारियों के 33 करोड़ के कारोबार की जांच शुरू
इससे पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने स्क्रूटनी के बाद जीएसटी में विसंगति का खुलासा किया है। बिजनौर में 551 व्यापारियों के 33 करोड़ रुपये के कारोबार को संदिग्ध मानते हुए विभाग को सूचना जारी की। इसके बाद जीएसटी विभाग ने इन व्यापारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के बाद व्यापारियों को टैक्स, अर्थदंड की कार्रवाई होगी।
वर्जन::
जिले के 233 व्यापारियों ने जेम पोर्टल से दो साल में सरकारी विभागों को 3.41 करोड़ रुपये के सामान की सप्लाई की है लेकिन जीएसटी विभाग को इसकी सूचना नहीं दी। सरकार को राजस्व की हानि हुई है। जेम पोर्टल की एआई स्क्रूटनी में इसका खुलासा हुआ। व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। ....राजीव आर्थर, संयुक्त आयुक्त (कार्यपालक), जीएसटी, बिजनौर