{"_id":"2e4c7134aee8d866aa2c0c1a83b04a70","slug":"supervisor-completed-prospective-helmsman-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यवेक्षक बनकर तैयार करें भावी कर्णधार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यवेक्षक बनकर तैयार करें भावी कर्णधार
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नजीबाबाद में शिष्य में आत्म नियंत्रण और आत्म निर्देशन के गुण विकसित करने के लिए शिक्षक को अब एक पर्यवेक्षक की भूमिका निभानी होगी। तभी शिष्य का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
ग्रामोन्मुखी, अभावग्रस्तोन्मुखी, राष्ट्रप्रेम और संस्कृतिपूर्ण शिक्षा से ही एक अच्छे समाज की नींव रखने के साथ देश के भावी कर्णधार तैयार किए जा सकते हैं।
विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्याली राम ने यह बात कही। वे विद्या भारती के पश्चिमी उत्तर प्रदेेश के प्रधानाचार्यों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छात्रों का सर्वांगीण विकास करने के लिए हमें अपनी शिक्षा प्रणाली में शारीरिक एवं योग शिक्षा, संगीत शिक्षा, नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक शिक्षा के आधारभूत तत्वों को सम्मिलित करना होगा। विद्या भारती द्वारा चलाई जा रही पंचमुखी व पंचपदी शिक्षण पद्घति पर आज जोर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था विद्यार्थी के जीवन की संवेदनशील अवस्था होती है। यहां आचार्य को पर्यवेक्षक की भूमिका निभानी होती है।
विज्ञापन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश निरीक्षक सोरन सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उसमें स्वावलंबन की भावना विकसित करती है। हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी हो, जो न केवल नवयुवकों को आत्मनिर्भर बनाए, बल्कि देश का जिम्मेदार नागरिक बनाने के साथ उन्हें संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए तैयार करे। इससे पहले प्रांतीय प्रतिनिधियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
साहू छजमलदास रामरक्षपाल सरस्वती विद्या मंदिर के अध्यक्ष पूरन सिंह भंडारी की अध्यक्षता एवं विभाग प्रमुख महेश शर्मा (चंदौसी) के संचालन में हुए सम्मेलन में भूपाल सिंह शास्त्री, सुरेंद्र शर्मा(नजीबाबाद), वीर सिंह (नहटौर), चंद्रकिशोर (धामपुर), महेश त्यागी (चांदपुर), संजीव राजपूत (किरतपुर), सुनील चौधरी (जैतरा) सहित वेस्ट यूपी के 62 प्रधानाचायों के अलावा संत कुमार अग्रवाल, डॉ.एमे घिल्डियाल, सुभाषचंद सहित विद्यालय प्रबंध समितियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
विज्ञापन
ग्रामोन्मुखी, अभावग्रस्तोन्मुखी, राष्ट्रप्रेम और संस्कृतिपूर्ण शिक्षा से ही एक अच्छे समाज की नींव रखने के साथ देश के भावी कर्णधार तैयार किए जा सकते हैं।
विज्ञापन
विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्याली राम ने यह बात कही। वे विद्या भारती के पश्चिमी उत्तर प्रदेेश के प्रधानाचार्यों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छात्रों का सर्वांगीण विकास करने के लिए हमें अपनी शिक्षा प्रणाली में शारीरिक एवं योग शिक्षा, संगीत शिक्षा, नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक शिक्षा के आधारभूत तत्वों को सम्मिलित करना होगा। विद्या भारती द्वारा चलाई जा रही पंचमुखी व पंचपदी शिक्षण पद्घति पर आज जोर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था विद्यार्थी के जीवन की संवेदनशील अवस्था होती है। यहां आचार्य को पर्यवेक्षक की भूमिका निभानी होती है।
विज्ञापन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश निरीक्षक सोरन सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उसमें स्वावलंबन की भावना विकसित करती है। हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी हो, जो न केवल नवयुवकों को आत्मनिर्भर बनाए, बल्कि देश का जिम्मेदार नागरिक बनाने के साथ उन्हें संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए तैयार करे। इससे पहले प्रांतीय प्रतिनिधियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
साहू छजमलदास रामरक्षपाल सरस्वती विद्या मंदिर के अध्यक्ष पूरन सिंह भंडारी की अध्यक्षता एवं विभाग प्रमुख महेश शर्मा (चंदौसी) के संचालन में हुए सम्मेलन में भूपाल सिंह शास्त्री, सुरेंद्र शर्मा(नजीबाबाद), वीर सिंह (नहटौर), चंद्रकिशोर (धामपुर), महेश त्यागी (चांदपुर), संजीव राजपूत (किरतपुर), सुनील चौधरी (जैतरा) सहित वेस्ट यूपी के 62 प्रधानाचायों के अलावा संत कुमार अग्रवाल, डॉ.एमे घिल्डियाल, सुभाषचंद सहित विद्यालय प्रबंध समितियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।