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किसानों का हक नहीं मार पायेंगे गन्ना माफिया
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किसानों का हक नहीं मार पायेंगे गन्ना माफिया
बिजनौर। अब छोटे गन्ना किसानों का हक गन्ना माफिया नहीं मार पाएंगे। गन्ना विभाग ने राजस्व अभिलेखों के अनुसार कृषि योग्य क्षेत्रफल मिलान की मुहिम छेड़ दी है। गन्ना किसानों की स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) की वेबसाइट पर दर्ज कृषि योग्य भूमि का गाटावार मिलान हो रहा है। गाटा संख्यावार दर्ज कृषि योग्य भूमि के आधार पर ही गन्ना सट्टे का संचालन किया जाएगा।
जनपद में सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना उत्पादन हो रहा है। जिले के 3,91,573 गन्ना किसान विभाग में पंजीकृत हैं। पिछले दो-तीन साल से गन्ना विभाग को हाईटेक किया जा रहा है। गन्ना आपूर्ति के लिए किसानों पर गन्ना पर्चियों का एसएमएस जाता है। माफिया गिरी खत्म करने को गन्ने की सारी कुंडली ऑनलाइन कर दी गई है। ज्यादा जमीन की फर्द लगाकर माफिया अपनी पर्ची ज्यादा लगवाकर छोटे किसान का हक मार लेते थे। अब ऐसा नहीं होगा।
किसानों की सुविधा के लिए स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) की वेबसाइट पर दर्ज भूमि का गाटावार मिलान किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने इंक्वायरी डॉट केनयूपी डॉट इन पर दर्ज कृषि योग्य भूमि के सामने गाटावार सीएलए का ऑप्शन उपलब्ध कराया गया। किसान गाटावार कृषि योग्य भूमि का विवरण देख सकता है तथा मिलान नहीं होने की दशा में अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक को खतौनी की प्रति उपलब्ध कराकर त्रुटि का निवारण करा सकते हैं। जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि स्मार्ट गन्ना किसान की वेबसाइट पर जिस प्रकार बेसिक कोटा ऑप्शन पर क्लिक कर विगत पांच वर्षों के गन्ना आपूर्ति के आंकड़ों का अवलोकन किया जा सकता है। उसी प्रकार एक क्लिक कर गन्ना किसान अपनी गाटा वाइज सीएलए के आंकड़ों का अवलोकन कर सकते हैं।
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बिजनौर। अब छोटे गन्ना किसानों का हक गन्ना माफिया नहीं मार पाएंगे। गन्ना विभाग ने राजस्व अभिलेखों के अनुसार कृषि योग्य क्षेत्रफल मिलान की मुहिम छेड़ दी है। गन्ना किसानों की स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) की वेबसाइट पर दर्ज कृषि योग्य भूमि का गाटावार मिलान हो रहा है। गाटा संख्यावार दर्ज कृषि योग्य भूमि के आधार पर ही गन्ना सट्टे का संचालन किया जाएगा।
जनपद में सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना उत्पादन हो रहा है। जिले के 3,91,573 गन्ना किसान विभाग में पंजीकृत हैं। पिछले दो-तीन साल से गन्ना विभाग को हाईटेक किया जा रहा है। गन्ना आपूर्ति के लिए किसानों पर गन्ना पर्चियों का एसएमएस जाता है। माफिया गिरी खत्म करने को गन्ने की सारी कुंडली ऑनलाइन कर दी गई है। ज्यादा जमीन की फर्द लगाकर माफिया अपनी पर्ची ज्यादा लगवाकर छोटे किसान का हक मार लेते थे। अब ऐसा नहीं होगा।
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किसानों की सुविधा के लिए स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) की वेबसाइट पर दर्ज भूमि का गाटावार मिलान किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने इंक्वायरी डॉट केनयूपी डॉट इन पर दर्ज कृषि योग्य भूमि के सामने गाटावार सीएलए का ऑप्शन उपलब्ध कराया गया। किसान गाटावार कृषि योग्य भूमि का विवरण देख सकता है तथा मिलान नहीं होने की दशा में अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक को खतौनी की प्रति उपलब्ध कराकर त्रुटि का निवारण करा सकते हैं। जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि स्मार्ट गन्ना किसान की वेबसाइट पर जिस प्रकार बेसिक कोटा ऑप्शन पर क्लिक कर विगत पांच वर्षों के गन्ना आपूर्ति के आंकड़ों का अवलोकन किया जा सकता है। उसी प्रकार एक क्लिक कर गन्ना किसान अपनी गाटा वाइज सीएलए के आंकड़ों का अवलोकन कर सकते हैं।
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