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‘संसद में 17 बार उठाया गन्ने का मुद्दा’

Sun, 23 May 2021 12:22 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 23 May 2021 12:22 AM IST
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'Sugarcane issue raised 17 times in Parliament'
‘संसद में 17 बार उठाया गन्ने का मुद्दा’
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बिजनौर। आज सांसद बने हुए दो साल हो रहे हैं। ऐसे में बिजनौर लोकसभा सांसद मलूक नागर ने जहां खुद भी अपना रिपोर्ट कार्ड जारी किया, वहीं विपक्षी सांसद के क्षेत्र से अधिकांश समय गायब रहने का आरोप लगा रहे हैं। सांसद का दावा है कि उन्होंने 17 बार गन्ने के मुद्दे को संसद में उठाया था। सांसद निधि की बात करें तो पहली किस्त सांसद पहले ही क्षेत्रों पर खर्च कर चुके हैं। वहीं दूसरी के आने से पहले ही उसे ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए देने का पत्र जारी कर चुके हैं।
भले ही आज लोकसभा चुनाव को दो साल पूरे हो रहे हो, लेकिन अधिकांश समय तो कोरोना काल की भेंट चढ़ गया। इस अंतराल में एक साल दो महीना कोरोना काल में कट गया, वहीं जनप्रतिनिधियों को काम करने के लिए मात्र नौ माह 21 दिन ही मिले हैं। बात बिजनौर लोकसभा सांसद मलूक नागर की करें तो वह खुद के संसद में 246 बार मौजूद रहने और बिजनौर के मुद्दों को जोरशोर से उठाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दूसरी पार्टियां क्षेत्र से गायब रहने का आरोप लगाकर उनके रिपोर्ट कार्ड पर सवाल उठा रही हैं।
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कोरोना से लड़ा और जनता के लिए भी खड़ा रहा: मलूक नागर
सांसद मलूक नागर ने कहा कि दो वर्ष में करीब 01 वर्ष 2 महीना 11 दिन कोरोना काल में निकल गए और 9 महीने 19 दिन में मैंने अपने लोकसभा क्षेत्र में करीब 142 जनसभाएं की हैं। मैंने 246 बार संसद में मौजूद रहा। इसमें 173 डिबेट और 73 सवाल पूछे। मैंने जनहित व सर्वहित में 550 पत्र लिखे हैं। सांसद ने बताया कि सबसे पहले मैंने गंगा और उसमें आई बाढ़ का मुद्दा उठाया था। इसके बाद विदुरकुटी, पर्यटन, स्वास्थ्य, किसान, गन्ना तमाम मुद्दे संसद में उठाए। गन्ने का मुद्दा 17 बार संसद में उठाया, हालांकि गन्ने पर मात्र दस रुपये ही बढ़ सके थे। उन्होंने कहा कि वह खुद कोरोना की चपेट में आ चुके हैं और उनके परिवार के कई सदस्य भी संक्रमित हो गए थे, लेकिन कोरोना से लड़ने के बाद फिर से जनता के लिए सक्रिय हो गया हूं।
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जनता के बीच में नहीं दिखे सांसद: वाल्मीकि
भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि ने लोकसभा चुनाव के दो साल पूरे होने पर कहा कि सांसद मलूक नागर पूरे कार्यकाल में जनता से दूरी बनाए रहे। जब जनता को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब भी उनकी कोठी सुनसान पड़ी थी। जनता से संवाद करना चाहिए था और जनता की समस्या को सुनना चाहिए था। ऑक्सीजन प्लांट तो सरकार ने पहले ही तय कर दिए थे, जो शीघ्र लगने हैं।
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