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गन्ने में रेड रॉट तो नहीं होगा उसका गन्ना सर्वे, चीनी मिल भी नहीं खरीदेंगी बीमार गन्ना
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चीनी मिलें नहीं खरीदेंगी बीमार गन्ना
बिजनौर। चीनी मिलें इस बार बीमार गन्ना नहीं खरीदेंगी। गन्ने में कैंसर की बीमारी कहे जाने वाले रेड रॉट को गन्ने से खत्म करने के लिए इस बार शासन ने कड़े कदम उठाए हैं। इस बार रेड रॉट से ग्रसित फसल को गन्ना सर्वे में ही शामिल नहीं किया जाएगा। रेड रॉट को खत्म करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। चीनी मिल रेड रॉट से ग्रसित फसल नहीं खरीदेंगी तो किसानों को इस फसल को नष्ट करना होगा। इससे रेड रॉट भी खत्म हो जाएगा।
पिछले तीन साल से गन्ने में रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग का काफी असर देखने को मिल रहा है। रेड रॉट से पैदावार और चीनी परता कम हो जाता है। जिले के करीब 99 प्रतिशत रकबे में किसान 0238 प्रजाति का गन्ना बोते हैं। इस प्रजाति में यह रोग ज्यादा देखने को मिलता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में रेड रॉट का बहुत ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। इस बार गन्ना विभाग ने रेड रॉट से ग्रसित गन्ने का सर्वे कराने से ही मना कर दिया है। गन्ने में रेड रॉट है तो उसे खरीदने के लिए मिलें पर्ची ही नहीं देंगी। ऐसी स्थिति में किसान को फसल को जलाकर या जोतकर नष्ट करना ही होगा। इसके बाद भी एक साल तक किसानों को खेत में दूसरी फसल बोने के लिए कहा जाएगा।
ऐसा होता है रेड रॉट
रेड रॉट में गन्ने की पोरी बीच में लाल होकर सड़ने लगती है। इसलिए इसे लाल सड़न रोग भी कहते हैं। बीमार गन्ने को काटने से उसमें से बदबू आती है। यह संक्रामक रोग होता है और हवा और पानी से एक खेत से दूसरे खेत में जाता है। अगर किसी एक खेत में रेड रॉट हो तो वह बड़े हिस्से में कुछ ही दिन में फैल सकता है।
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बिजनौर के खेतों में भी है रेड रॉट
जिले में भी कई चीनी मिल क्षेत्रों में लाल सड़न रोग पाया गया था। अफजलगढ़ चीनी मिल क्षेत्र में तो रेड रॉट की चपेट में पिछले साल दस प्रतिशत गन्ना आ गया था। रेड रॉट की वजह से गन्ने की कई प्रजाति लगभग खत्म हो चुकी हैं।
रेड रॉट का मतलब किसान का नुकसान
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार रेड रॉट खेत में जितने समय रहेगा उतना ही फसल को नुकसान होगा। रेड रॉट से ग्रसित फसल को किसान तुरंत खेत में नष्ट कर दें और उसमें कोई दूसरी फसल बोए।
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बिजनौर। चीनी मिलें इस बार बीमार गन्ना नहीं खरीदेंगी। गन्ने में कैंसर की बीमारी कहे जाने वाले रेड रॉट को गन्ने से खत्म करने के लिए इस बार शासन ने कड़े कदम उठाए हैं। इस बार रेड रॉट से ग्रसित फसल को गन्ना सर्वे में ही शामिल नहीं किया जाएगा। रेड रॉट को खत्म करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। चीनी मिल रेड रॉट से ग्रसित फसल नहीं खरीदेंगी तो किसानों को इस फसल को नष्ट करना होगा। इससे रेड रॉट भी खत्म हो जाएगा।
पिछले तीन साल से गन्ने में रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग का काफी असर देखने को मिल रहा है। रेड रॉट से पैदावार और चीनी परता कम हो जाता है। जिले के करीब 99 प्रतिशत रकबे में किसान 0238 प्रजाति का गन्ना बोते हैं। इस प्रजाति में यह रोग ज्यादा देखने को मिलता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में रेड रॉट का बहुत ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। इस बार गन्ना विभाग ने रेड रॉट से ग्रसित गन्ने का सर्वे कराने से ही मना कर दिया है। गन्ने में रेड रॉट है तो उसे खरीदने के लिए मिलें पर्ची ही नहीं देंगी। ऐसी स्थिति में किसान को फसल को जलाकर या जोतकर नष्ट करना ही होगा। इसके बाद भी एक साल तक किसानों को खेत में दूसरी फसल बोने के लिए कहा जाएगा।
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ऐसा होता है रेड रॉट
रेड रॉट में गन्ने की पोरी बीच में लाल होकर सड़ने लगती है। इसलिए इसे लाल सड़न रोग भी कहते हैं। बीमार गन्ने को काटने से उसमें से बदबू आती है। यह संक्रामक रोग होता है और हवा और पानी से एक खेत से दूसरे खेत में जाता है। अगर किसी एक खेत में रेड रॉट हो तो वह बड़े हिस्से में कुछ ही दिन में फैल सकता है।
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बिजनौर के खेतों में भी है रेड रॉट
जिले में भी कई चीनी मिल क्षेत्रों में लाल सड़न रोग पाया गया था। अफजलगढ़ चीनी मिल क्षेत्र में तो रेड रॉट की चपेट में पिछले साल दस प्रतिशत गन्ना आ गया था। रेड रॉट की वजह से गन्ने की कई प्रजाति लगभग खत्म हो चुकी हैं।
रेड रॉट का मतलब किसान का नुकसान
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार रेड रॉट खेत में जितने समय रहेगा उतना ही फसल को नुकसान होगा। रेड रॉट से ग्रसित फसल को किसान तुरंत खेत में नष्ट कर दें और उसमें कोई दूसरी फसल बोए।