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रुहेलखंड विवि में एक वर्ष में दो कोर्स कर सकेंगे विद्यार्थी

Fri, 29 Apr 2022 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:54 PM IST
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Students will be able to do two courses in one year in Rohilkhand University
रुहेलखंड विवि में एक वर्ष में दो कोर्स कर सकेंगे विद्यार्थी
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बिजनौर। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति-2020 लागू हो गई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विद्यार्थियों के लिए एक वर्ष में दो कोर्स करने की व्यवस्था शुरू की है। महाविद्यालयों में क्रियान्वयन की तैयारी शुरू हो गई है। डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य तथा शिक्षकों की दो कोर्स व्यवस्था को लेकर अपनी-अपनी राय है।
शासन की मंशा है कि युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा मिले। युवक स्नातक के बाद रोजगारपरक कोर्स तलाश करते है। परंतु नई शिक्षा नीति में वर्तमान व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन किया गया। अब युवक स्नातक पढ़ाई के दौरान ही रोजगार उपलब्ध होने वाले कोर्स कर सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक साल में दो कोर्स करने की व्यवस्था को छात्रों के लिए वरदान बताया। कहा है कि इससे समय व धन की बर्बादी रुकेगी। गुलाब सिंह हिंदू पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज चांदपुर के प्राचार्य व प्रोफेसर डॉ. अमित सिंह का कहना है कि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या अन्य विकसित देशों से बहुत कम है। विद्यार्थी दो कोर्स दो संकाय से कर सकता है। इससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रुटा के अध्यक्ष व वर्धमान कॉलेज में रसायन विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार का तर्क है कि व्यवस्था तभी फायदेमंद है कि विद्यार्थी डिग्री कोर्स के साथ व्यवसायिक कोर्स करें। केवल डिग्री लेने के लिए कोर्स करना हितकर नहीं।
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साहु जैन कॉलेज नजीबाबाद में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष गुप्ता का कहना है कि डबल कोर्स व्यवस्था से विद्यार्थी अपनी प्रतिभा व क्षमता का भरपूर इस्तेमाल कर सकेगा। विद्यार्थियों को बहुविषयक, बहुसंकायी, बनने के साथ व्यवसायिक व करीकुलर पाठ्यक्रम करने का मौका मिलेगा।
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डिग्री इकट्ठा करने का माध्यम न बने व्यवस्था
वर्धमान कॉलेज बिजनौर में शिक्षा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील जोशी के अनुसार दो कोर्स व्यवस्था से उच्च अधिगम क्षमता वाले विद्यार्थियों को फायदा होगा। व्यवस्था फालतू डिग्री इकट्ठा करने का माध्यम न बने। इससे विद्यार्थी किसी भी कोर्स के साथ न्याय नहीं कर सकेगा। विवेक कॉलेज ऑफ लॉ बिजनौर में कानून विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुष्पा जोशी का मानना है कि कम समय में रोजगार के अधिक अवसर तलाशने वाले विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद है। कुशाग्र विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार पा सकेंगे। बेरोजगारी का दबाव कम होगा। मेधावी आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पैसे व समय की बचत।
दो कोर्स व्यवस्था के ये हैं 10 प्रमुख लाभ
1- बेरोजगारी कम होगी।
2- कम समय में रोजगार के अधिक अवसर ।
3- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन का अधिक मौका।
4- उच्च अधिगम क्षमता वाले विद्यार्थियों को वरदान।
5- प्रतिभा व क्षमता का भरपूर इस्तेमाल।
6- रोजगार के लिए लक्ष्य निर्धारित करने में मदद।
7- वन वे से हटकर रोजगार का डबल ट्रैक सिस्टम।
8- पढ़ाई के दौरान ही रोजगार पाने के अवसर।
9- रोजगार तलाशने में धन व समय की बचत।
10- मनमुताबिक कोर्सेज का चयन।
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