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संविदाकर्मी चिकित्सकों की हड़ताल से चरमराई व्यवस्था

Wed, 30 Jan 2019 11:35 PM IST
NAVEEN GUPTA ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर Published by: NAVEEN GUPTA Updated Wed, 30 Jan 2019 11:35 PM IST
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Striking arrangements from contract workers' strike
नजीबाबाद में पीएससी पर खाली पड़ी चिकित्सक की कुर्सी। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के नजीबाबाद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं राजकीय महिला चिकित्सालय पर तैनात संविदाकर्मी चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से चिकित्सा व्यवस्थाएं चरमरा गईं है। अस्पतालों में चिकित्सक न होने से मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है। वहीं, मरीजों को प्राइवेट चिकित्सक इलाज कराना महंगा पड़ रहा है।  
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक चिकित्सक प्रभारी के साथ पांच संविदाकर्मी चिकित्सक और राजकीय महिला चिकित्सालय पर एक महिला चिकित्सा प्रभारी के साथ एक संविदाकर्मी चिकित्सक तैनात हैं। संविदाकर्मी चिकित्सकों के एक सप्ताह से मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने से नगर की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। चिकित्सकों के अभाव में नगर व ग्रामीण अंचलों से आए मरीज बिना इलाज के मायूस लौट रहे हैं। हालांकि फार्मेसिस्ट पुराने मरीजों को चिकित्सकों के लिखे पेपर पर दवाई दे रहे है लेकिन चिकित्सक न मिलने से समस्या गहरा रही है। वहीं, राजकीय महिला चिकित्सालय में चिकित्सा प्रभारी का डिलिवरी केस में लग जाने की स्थिति में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीएससी पर पहुंचे रिजवाना, सरिता, शशि, आरती, खुशनूदा, नफीसा, अबरार, नाहिरा, रीना, राधा, गीता आदि मरीजों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर न होने से उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। प्राइवेट चिकित्सक को दिखाने पर इलाज महंगा पड़ रहा है।
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पीएससी पर चिकित्सक की मांग
नजीबाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी संदीप कुमार का कहना है कि उनकी ड्यूटी राष्ट्रीय कार्यक्रम रुबेला एवं खसरा टीकाकरण अभियान में लगी है। रुबेला एवं खसरा टीकाकरण के लिए उन्हें टीम की देखरेख में भ्रमण करना पड़ रहा है। संविदाकर्मी चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने पर उन्होंने पीएससी पर अन्य चिकित्सक को भेजने की मांग की है।
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दसवें दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना
बिजनौर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ की ओर से विशिष्ट सेवा नीति बनाकर जॉब सिक्योरिटी एवं सुरक्षा प्रदान कराने सहित अन्य मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय पर दिया जा रहा धरना दसवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक धरना जारी रहेगा। 21 जनवरी से संविदा कर्मचारियों द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। बुधवार को दसवें दिन भी कर्मचारियों का धरना जारी रहा। जिलाध्यक्ष सनाउर्रहमान ने बताया कि प्रदेश में करीब 75 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कई सालों से संघर्षरत हैं। वे अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों को उपचार मुहैया कराते हैं। इसके बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। जिला मंत्री रोबिन कुमार ने कहा कि सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने कर्मचारियों से वादा किया था कि उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा।




शासन-प्रशासन की ओर से शीघ्र ही समस्या का समाधान कराने का आश्वासन देकर खुश कर दिया जाता है। इससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। ज्ञापन में संविदाकर्मियों के समायोजन के लिए नवीन पद सृजन करने, समान कार्य समान वेतन शीघ्र लागू करने, विशिष्ट सेवा नीति बनाकर संविदा कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने, ठेकेदारी प्रथा समाप्त करा कर्मचारियों को ठेकेदारी प्रथा से मुक्ति दिलाने, आशा कार्यकर्ताओं को उचित मानदेय दिलाने आदि की मांग की। इस दौरान नितिन श्रीवास्तव, अंकित चौधरी, पंकज शर्मा, विकास डाबर, नकुल कुमार, डॉ. संजय विश्वकर्मा, अजीम अहमद, शाहवाज खान, पंकज शर्मा आदि मौजूद रहे।
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