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Bijnor News: बढ़ते तापमान में आक्रमक हुए आवारा कुत्ते
Mon, 21 Apr 2025 12:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:08 AM IST
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बिजनौर। बढ़ती गर्मी का असर कुत्तों पर भी दिखाई दे रहा है। गर्मी के कारण कुत्ते आक्रमक हो गए हैं। सीएचसी, पीएचसी व मेडिकल अस्पताल में एंटी रेबिज लगवाने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
मेडिकल अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार रोज लगभग 80 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल आते हैं। ऐसा ही हाल सीएचसी व पीएचसी पर भी है। पिछले कुछ दिनों से हुई तापमान में बढ़ोतरी के बाद से कुत्तों के हमले में इजाफा हुआ है। चिकित्सकों ने बताया कि गर्मी में पानी और भोजन की कमी से चिड़चिड़े होने से कुत्ते ज्यादा आक्रमक हो रहे हैं।
घाव के आधार पर लगते हैं इंंजेक्शन
चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते के काटने से हुए घाव को चार श्रेणियों में बांटा जाता है। इसी आधार पर उनको दिए जाने वाले इंजेक्शन की संख्या तय होती है। यदि घाव ज्यादा गहरा या दिमाग के आसपास हो तो सिरम का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह सिरम सिर्फ मेडिकल अस्पताल में ही मिलता है। सीएचसी व पीएचसी पर आए ऐसे मरीजों को मेडिकल अस्पताल में रैफर कर सिरम उपलब्ध कराया जाता है।
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कुत्ते के काटने पर बरतें सावधानी
- बहते पानी के नीचे कम से कम 15 मिनट तक घाव को धोएं।
- धोने से पहले घाव पर कुछ न लगाएं।
- धोने के बाद एंटी सेप्टिक क्रीम लगाएं।
- जल्द से जल्द नजदीकी सीएचसी, पीएचसी या मेडिकल अस्पताल में परामर्श लें।
- किसी प्रकार की झाड़ फूंक में न लगें।
गर्मी में बदल जाता है स्वभाव: अमोली
मेडिकल अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट सतेंद्र कुमार अमोली ने बताया कि गर्मी के मौसम में जानवरों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। इसके अलावा, पानी और भोजन की कमी के कारण भी वे आक्रामक हो सकते हैं। ऐसे में ज्यादा सावधानियां बरतने की जरूरत है।
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मेडिकल अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार रोज लगभग 80 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल आते हैं। ऐसा ही हाल सीएचसी व पीएचसी पर भी है। पिछले कुछ दिनों से हुई तापमान में बढ़ोतरी के बाद से कुत्तों के हमले में इजाफा हुआ है। चिकित्सकों ने बताया कि गर्मी में पानी और भोजन की कमी से चिड़चिड़े होने से कुत्ते ज्यादा आक्रमक हो रहे हैं।
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घाव के आधार पर लगते हैं इंंजेक्शन
चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते के काटने से हुए घाव को चार श्रेणियों में बांटा जाता है। इसी आधार पर उनको दिए जाने वाले इंजेक्शन की संख्या तय होती है। यदि घाव ज्यादा गहरा या दिमाग के आसपास हो तो सिरम का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह सिरम सिर्फ मेडिकल अस्पताल में ही मिलता है। सीएचसी व पीएचसी पर आए ऐसे मरीजों को मेडिकल अस्पताल में रैफर कर सिरम उपलब्ध कराया जाता है।
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कुत्ते के काटने पर बरतें सावधानी
- बहते पानी के नीचे कम से कम 15 मिनट तक घाव को धोएं।
- धोने से पहले घाव पर कुछ न लगाएं।
- धोने के बाद एंटी सेप्टिक क्रीम लगाएं।
- जल्द से जल्द नजदीकी सीएचसी, पीएचसी या मेडिकल अस्पताल में परामर्श लें।
- किसी प्रकार की झाड़ फूंक में न लगें।
गर्मी में बदल जाता है स्वभाव: अमोली
मेडिकल अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट सतेंद्र कुमार अमोली ने बताया कि गर्मी के मौसम में जानवरों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। इसके अलावा, पानी और भोजन की कमी के कारण भी वे आक्रामक हो सकते हैं। ऐसे में ज्यादा सावधानियां बरतने की जरूरत है।