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प्राइमरी शिक्षा पर अव्यवस्था का बदनुमा दाग
ब्यूरो, अमर उजाला /बिजनौर
Updated Thu, 01 Dec 2016 12:35 AM IST
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बिजनौर के चांदपुर में प्रदेश में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद प्राइमरी शिक्षा पटरी पर नहीं आ पा रही है। बदहाली के आलम में प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के कामयाबी पर ग्रहण लग गया है। अव्यवस्था के कारण ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी शिक्षा में सुधार नहीं होने से लोगों में अधिकारियों के प्रति असंतोष भी पनप रहा है।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत हर बच्चे को विद्यालय भेजने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान को अधिकारियों की लापरवाही के कारण पलीता लग गया है। प्रशासन के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की स्थित सुधरने के दावों के बावजूद जर्जर भवन के चलते दो विद्यालयों के बच्चे एक विद्यालय के भवन में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं। मोहल्ला चिम्मन में एक ही परिसर में प्राथमिक विद्यालय नवीन शाहचंदन तथा प्राथमिक विद्यालय कायस्थान प्रथम संचालित है। चुनाव के दौरान विद्यालय में पोलिंग बूथ भी रहता है। प्राथमिक विद्यालय नवीन शाहचंदन में 64 तथा प्राथमिक विद्यालय कायस्थान प्रथम में 58 छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। दोनों विद्यालय में एक-एक हेड अध्यापिका व एक-एक सहायक अध्यापिका नियुक्त हैं। नवीन शाहचंदन विद्यालय भवन की हालत जर्जर होने के कारण छात्र-छात्राओं को प्राथमिक विद्यालय कायस्थान प्रथम के कमरों में बैठकर पढ़ाया जा रहा है। सरकार के सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रचार कर अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालय भेजने की बात कही जाती है वहीं, विद्यालय में बैठने के लिए सुरक्षित भवन नहीं हैं। विद्यालयों में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय की मुख्य अध्यापिका कल्पना दास ने बताया कि विद्यालय के रखरखाव के लिए साल में पांच हजार रुपये आते हैं। विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए किसी तरह का फर्नीचर नहीं है। पांच हजार रुपये पुताई के लिए आते हैं। वह भी पूरे विद्यालय की पुताई के लिए धनराशि कम पड़ जाती है। इतना ही नहीं कई बार व्यवस्था बनाने के लिए अपने पास से खर्च करना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय नवीन शाहचंदन की हेड नसीम महराज व सहायक अध्यापिका ने बताया कि जर्जर भवन के बारे में कई बार प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
नगीना के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण संबंधी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं होने से बच्चे दरियों पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। बच्चों को पीने का स्वच्छ पानी तक पीने के लिए मयस्सर नहीं है। शहरी क्षेत्र में 17 प्राइमरी व एक कन्या जूनियर विद्यालय है। मुहल्ला लुहारी सराय स्थित प्राइमरी स्कूल के भवन में लुहारी सराय प्रथम व द्वितीय, प्राथमिक विद्यालय अकाबरान, प्राथमिक विद्यालय बारादरी, सैदवाडा तथा लुहारी सराय द्वितीय के भवन में कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पटेरी, प्राथमिक विद्यालय टांडा, पहाडी दरवाजा व विश्रोई सराय समेत 10 स्कूलों का संचालन होता है।
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मोहल्ला काजी सराय स्थित भवन में दो स्कूलों तथा सरायमीर, कस्बा में दो, एक हिंदू कटेरा व एक पंजाबियान में संचालित होता है। सभी स्कूलों में एक एक शिक्षक बच्चों को शिक्षा देते हैं, जो कि मानक से बेहद कम हैं। शिक्षक संजीव कुमार गुप्ता, मुहम्मद अजीम ने बताया कि भवनों की कमी के कारण एक एक कमरे में दो दो विद्यालय के बच्चों को बैठाना पड़ता है। नगर क्षेत्र में लगभग 22 शिक्षकों का स्टाफ है, जबकि पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। स्कूलों में पीने का पानी, लाइट आदि की व्यवस्था भी नहीं है। मोहल्ला लुहारी सराय में लगे हैंडपंप से ही बच्चे पानी पीते हैं। शिक्षकों का कहना है कि बर्तन वितरण कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विधायक मनोज पारस से इस संबंध में वार्ता की गई है। उन्होंने भवनों के संबंध में खंड शिक्षाधिकारी देशराज वत्स को इस संबंध में रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
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सर्वशिक्षा अभियान के तहत हर बच्चे को विद्यालय भेजने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान को अधिकारियों की लापरवाही के कारण पलीता लग गया है। प्रशासन के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की स्थित सुधरने के दावों के बावजूद जर्जर भवन के चलते दो विद्यालयों के बच्चे एक विद्यालय के भवन में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं। मोहल्ला चिम्मन में एक ही परिसर में प्राथमिक विद्यालय नवीन शाहचंदन तथा प्राथमिक विद्यालय कायस्थान प्रथम संचालित है। चुनाव के दौरान विद्यालय में पोलिंग बूथ भी रहता है। प्राथमिक विद्यालय नवीन शाहचंदन में 64 तथा प्राथमिक विद्यालय कायस्थान प्रथम में 58 छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। दोनों विद्यालय में एक-एक हेड अध्यापिका व एक-एक सहायक अध्यापिका नियुक्त हैं। नवीन शाहचंदन विद्यालय भवन की हालत जर्जर होने के कारण छात्र-छात्राओं को प्राथमिक विद्यालय कायस्थान प्रथम के कमरों में बैठकर पढ़ाया जा रहा है। सरकार के सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रचार कर अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालय भेजने की बात कही जाती है वहीं, विद्यालय में बैठने के लिए सुरक्षित भवन नहीं हैं। विद्यालयों में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय की मुख्य अध्यापिका कल्पना दास ने बताया कि विद्यालय के रखरखाव के लिए साल में पांच हजार रुपये आते हैं। विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए किसी तरह का फर्नीचर नहीं है। पांच हजार रुपये पुताई के लिए आते हैं। वह भी पूरे विद्यालय की पुताई के लिए धनराशि कम पड़ जाती है। इतना ही नहीं कई बार व्यवस्था बनाने के लिए अपने पास से खर्च करना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय नवीन शाहचंदन की हेड नसीम महराज व सहायक अध्यापिका ने बताया कि जर्जर भवन के बारे में कई बार प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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नगीना के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण संबंधी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं होने से बच्चे दरियों पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। बच्चों को पीने का स्वच्छ पानी तक पीने के लिए मयस्सर नहीं है। शहरी क्षेत्र में 17 प्राइमरी व एक कन्या जूनियर विद्यालय है। मुहल्ला लुहारी सराय स्थित प्राइमरी स्कूल के भवन में लुहारी सराय प्रथम व द्वितीय, प्राथमिक विद्यालय अकाबरान, प्राथमिक विद्यालय बारादरी, सैदवाडा तथा लुहारी सराय द्वितीय के भवन में कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पटेरी, प्राथमिक विद्यालय टांडा, पहाडी दरवाजा व विश्रोई सराय समेत 10 स्कूलों का संचालन होता है।
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मोहल्ला काजी सराय स्थित भवन में दो स्कूलों तथा सरायमीर, कस्बा में दो, एक हिंदू कटेरा व एक पंजाबियान में संचालित होता है। सभी स्कूलों में एक एक शिक्षक बच्चों को शिक्षा देते हैं, जो कि मानक से बेहद कम हैं। शिक्षक संजीव कुमार गुप्ता, मुहम्मद अजीम ने बताया कि भवनों की कमी के कारण एक एक कमरे में दो दो विद्यालय के बच्चों को बैठाना पड़ता है। नगर क्षेत्र में लगभग 22 शिक्षकों का स्टाफ है, जबकि पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। स्कूलों में पीने का पानी, लाइट आदि की व्यवस्था भी नहीं है। मोहल्ला लुहारी सराय में लगे हैंडपंप से ही बच्चे पानी पीते हैं। शिक्षकों का कहना है कि बर्तन वितरण कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विधायक मनोज पारस से इस संबंध में वार्ता की गई है। उन्होंने भवनों के संबंध में खंड शिक्षाधिकारी देशराज वत्स को इस संबंध में रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।