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Bijnor News: बढ़ते तापमान में बासमती धान की बुवाई लाभप्रद
Sat, 25 May 2024 01:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sat, 25 May 2024 01:39 AM IST
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बिजनौर, नगीना। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिक डाॅ. केके सिंह ने दिनोंदिन बढ़ते तापक्रम के दृष्टिगत धान उत्पादक किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए बासमती धान की बुवाई करने का सुझाव दिया है।
कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. केके सिंह का कहना है कि वर्तमान समय में जिले में दिनों दिन भीषण गर्मी बढ़ती जा रही है। रोजाना तापमान करीब 40 डिग्री के ऊपर तक पहुंच रहा है। उन्होंने बासमती धान का उत्पादन करने के इच्छुक किसानों को सलाह दी है कि वह अच्छे उत्पादन और आर्थिक लाभ के लिए 115 से 120 दिन में तैयार होने वाली न्यूनतम अवधि की बासमती धान की प्रजातियां जैसे पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1692 व पूसा बासमती 1847 का चयन करें।
उन्होंने सुझाया कि 140 से 150 दिन में तैयार होने अधिकतम अवधि वाली बासमती प्रजाति पूसा बासमती 1401, पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1885, पूसा बासमती 1886 व पूसा बासमती शून्य एक 01 आदि धान प्रजाति की नर्सरी समय अनुसार तैयार करें। कम अवधि वाली बासमती धान प्रजाति की नर्सरी बाद में व अधिक अवधि वाली प्रजाति की नर्सरी बाद में तैयार होनी है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले जिस खेत में बासमती धान की नर्सरी को लगाना है उस खेत की एक बार गहरी जुताई करके छोड़ दें।
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कृषि वैज्ञानिक डाॅ. केके सिंह ने बताया कि खेत जुताई के पांच से सात दिन के बाद उस खेत में पानी चला दें क्योंकि ऐसा करने से अधिक तापक्रम के कारण जमीन के अंदर जो हानिकारक सूक्ष्म जीव एवं कीट आदि पल रहे हैं वे समाप्त हो जाएंगे और सिंचाई के बाद नर्सरी में उगने वाले खरपतवार स्वत: ही जमाव ले लेंगे। इस क्रिया के 10 दिन बाद करीब जून के प्रथम सप्ताह में नर्सरी वाले प्रक्षेत्र को अच्छी तरह से तैयार कर अब बासमती धान की उन्नतशील प्रजाति का चयन करें। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से कृषकों को बासमती धान की उन्नत पैदावार मिलेगी और उनको आर्थिक लाभ होगा।
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कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. केके सिंह का कहना है कि वर्तमान समय में जिले में दिनों दिन भीषण गर्मी बढ़ती जा रही है। रोजाना तापमान करीब 40 डिग्री के ऊपर तक पहुंच रहा है। उन्होंने बासमती धान का उत्पादन करने के इच्छुक किसानों को सलाह दी है कि वह अच्छे उत्पादन और आर्थिक लाभ के लिए 115 से 120 दिन में तैयार होने वाली न्यूनतम अवधि की बासमती धान की प्रजातियां जैसे पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1692 व पूसा बासमती 1847 का चयन करें।
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उन्होंने सुझाया कि 140 से 150 दिन में तैयार होने अधिकतम अवधि वाली बासमती प्रजाति पूसा बासमती 1401, पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1885, पूसा बासमती 1886 व पूसा बासमती शून्य एक 01 आदि धान प्रजाति की नर्सरी समय अनुसार तैयार करें। कम अवधि वाली बासमती धान प्रजाति की नर्सरी बाद में व अधिक अवधि वाली प्रजाति की नर्सरी बाद में तैयार होनी है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले जिस खेत में बासमती धान की नर्सरी को लगाना है उस खेत की एक बार गहरी जुताई करके छोड़ दें।
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कृषि वैज्ञानिक डाॅ. केके सिंह ने बताया कि खेत जुताई के पांच से सात दिन के बाद उस खेत में पानी चला दें क्योंकि ऐसा करने से अधिक तापक्रम के कारण जमीन के अंदर जो हानिकारक सूक्ष्म जीव एवं कीट आदि पल रहे हैं वे समाप्त हो जाएंगे और सिंचाई के बाद नर्सरी में उगने वाले खरपतवार स्वत: ही जमाव ले लेंगे। इस क्रिया के 10 दिन बाद करीब जून के प्रथम सप्ताह में नर्सरी वाले प्रक्षेत्र को अच्छी तरह से तैयार कर अब बासमती धान की उन्नतशील प्रजाति का चयन करें। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से कृषकों को बासमती धान की उन्नत पैदावार मिलेगी और उनको आर्थिक लाभ होगा।