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कहीं तीन महीने का पहुंचा राशन तो कहीं कुछ लोगों को मिला महीने भर का अनाज
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कहीं तीन महीने का पहुंचा राशन तो कहीं मिला महीने भर का अनाज
बिजनौर। कुपोषण के खात्मे के लिए शासन के निर्देश पर सभी राशन डीलरों को अनाज वितरित किया गया। लेकिन ज्यादातर जगह एक ही मात्रा में अनाज बांट दिया गया। यह नहीं देखा गया कि किसी राशन डीलर की दुकान के क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं या ज्यादा। नतीजा यह हुआ कि कहीं पर पात्रों को तीन महीने का अनाज मिल गया और कहीं दस-बीस पात्रों को महीने भर का ही अनाज मिला।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को पोषाहार की बजाए वर्तमान समय में सूखा अनाज बांटा जा रहा है। अभी इसमे गेहूं व चावल का आंवटन ही शासन की ओर से किया गया है। श्रेणी के आधार पर अनाज की मात्रा निर्धारित की गई है। सरकार द्वारा नवंबर, दिसंबर व जनवरी का अनाज भेज दिया गया है। यह राशन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से सीधे पात्रों को ही बांटा गया है। शासन ने अनाज तो बंटवा दिया लेकिन यह नहीं देखा गया कि किसे कितना अनाज मिल रहा है। जिले में राशन डीलरों की 1400 दुकान हैं जबकि आंगनबाड़ी केंद्र 3236। हर एक राशन डीलर के पास दो से भी ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र और कहीं-कहीं तो कई केंद्र आते हैं। लेकिन सभी को एक समान राशन वितरित किया गया। सभी राशन की दुकानों को पांच क्विंटल 95 किग्रा 850 ग्राम गेहूं और एक क्विंटल 58 किग्रा 809 ग्राम चावल दिया गया। लेकिन यह अनाज पूरा नहीं पड़ रहा है। हर आंगनबाड़ी केंद्र पर करीब 100-100 पात्र हैं। जिस राशन की दुकान से संबद्ध एक आंगनबाड़ी केंद्र है वहां तो अनाज तीन महीने का पूरा हो गया लेकिन जहां पर कई कई केंद्र हैं वहां पर अनाज कम पड़ गया है। हालत यह है कि ऐसी जगह केवल 18 से 20 लोगों को ही अनाज मिला है।
इतने हैं पात्र
जिले में शहर में छह महीने से तीन साल के 19185 बच्चे, तीन से छह साल के 4509 बच्चे, 8906 गर्भवती व धात्री महिलाएं तथा 11 से 14 साल की 407 किशोरी हैं। गांवों में छह माह से तीन साल तक के 124174 बच्चे, तीन से छह साल के 32227 बच्चे, 56544 गर्भवती व धात्री महिलाएं तथा 11 से 14 साल की 1434 किशोरी हैं। इसके अलावा शहर में 1259 व गांवों में 8487 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
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इतना मिला अनाज
जिले में बच्चों को तीन महीने के लिए देने को 12 लाख 87 हजार 579 किग्रा गेहूं व सात लाख 86 हजार 174 किग्रा अनाज की जरूरत है लेकिन जिले में आठ लाख 52 हजार 665 किग्रा गेहूं और दो लाख 27 हजार 255 किग्रा चावल ही दिया गया है। एक समान वितरण से किसी केंद्र पर पूरा अनाज पहुंच गया और कुछ पर केवल कुछ पात्रों के लिए ही एक दिन का।
नहीं मिला अनाज
अफजलगढ़ के गांव परमानंदपुर गढ़ी में एक ही राशन डीलर को आठ केंद्रों का अनाज दिया गया है। सीडीपीओ रीता देवी के अनुसार बहुत कम लोगों को ही अनाज मिला है, वह भी एक एक महीने का। इसके बारे में विभाग को अवगत करा दिया गया है।
शासन को कराया अवगत
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार काफी जगह पर एक ही महीने का अनाज मिला है। इस बारे में शासन को अवगत कराया जा रहा है।
अनाज की डिमांड की गई
जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार के अनुसार शासन के निर्देशानुसार ही राशन बांटा गया है। जो अनाज कम रह गया है उसके बारे में डीएम कार्यालय से पत्र लिखवाया जा रहा है।
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बिजनौर। कुपोषण के खात्मे के लिए शासन के निर्देश पर सभी राशन डीलरों को अनाज वितरित किया गया। लेकिन ज्यादातर जगह एक ही मात्रा में अनाज बांट दिया गया। यह नहीं देखा गया कि किसी राशन डीलर की दुकान के क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं या ज्यादा। नतीजा यह हुआ कि कहीं पर पात्रों को तीन महीने का अनाज मिल गया और कहीं दस-बीस पात्रों को महीने भर का ही अनाज मिला।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को पोषाहार की बजाए वर्तमान समय में सूखा अनाज बांटा जा रहा है। अभी इसमे गेहूं व चावल का आंवटन ही शासन की ओर से किया गया है। श्रेणी के आधार पर अनाज की मात्रा निर्धारित की गई है। सरकार द्वारा नवंबर, दिसंबर व जनवरी का अनाज भेज दिया गया है। यह राशन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से सीधे पात्रों को ही बांटा गया है। शासन ने अनाज तो बंटवा दिया लेकिन यह नहीं देखा गया कि किसे कितना अनाज मिल रहा है। जिले में राशन डीलरों की 1400 दुकान हैं जबकि आंगनबाड़ी केंद्र 3236। हर एक राशन डीलर के पास दो से भी ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र और कहीं-कहीं तो कई केंद्र आते हैं। लेकिन सभी को एक समान राशन वितरित किया गया। सभी राशन की दुकानों को पांच क्विंटल 95 किग्रा 850 ग्राम गेहूं और एक क्विंटल 58 किग्रा 809 ग्राम चावल दिया गया। लेकिन यह अनाज पूरा नहीं पड़ रहा है। हर आंगनबाड़ी केंद्र पर करीब 100-100 पात्र हैं। जिस राशन की दुकान से संबद्ध एक आंगनबाड़ी केंद्र है वहां तो अनाज तीन महीने का पूरा हो गया लेकिन जहां पर कई कई केंद्र हैं वहां पर अनाज कम पड़ गया है। हालत यह है कि ऐसी जगह केवल 18 से 20 लोगों को ही अनाज मिला है।
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इतने हैं पात्र
जिले में शहर में छह महीने से तीन साल के 19185 बच्चे, तीन से छह साल के 4509 बच्चे, 8906 गर्भवती व धात्री महिलाएं तथा 11 से 14 साल की 407 किशोरी हैं। गांवों में छह माह से तीन साल तक के 124174 बच्चे, तीन से छह साल के 32227 बच्चे, 56544 गर्भवती व धात्री महिलाएं तथा 11 से 14 साल की 1434 किशोरी हैं। इसके अलावा शहर में 1259 व गांवों में 8487 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
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इतना मिला अनाज
जिले में बच्चों को तीन महीने के लिए देने को 12 लाख 87 हजार 579 किग्रा गेहूं व सात लाख 86 हजार 174 किग्रा अनाज की जरूरत है लेकिन जिले में आठ लाख 52 हजार 665 किग्रा गेहूं और दो लाख 27 हजार 255 किग्रा चावल ही दिया गया है। एक समान वितरण से किसी केंद्र पर पूरा अनाज पहुंच गया और कुछ पर केवल कुछ पात्रों के लिए ही एक दिन का।
नहीं मिला अनाज
अफजलगढ़ के गांव परमानंदपुर गढ़ी में एक ही राशन डीलर को आठ केंद्रों का अनाज दिया गया है। सीडीपीओ रीता देवी के अनुसार बहुत कम लोगों को ही अनाज मिला है, वह भी एक एक महीने का। इसके बारे में विभाग को अवगत करा दिया गया है।
शासन को कराया अवगत
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार काफी जगह पर एक ही महीने का अनाज मिला है। इस बारे में शासन को अवगत कराया जा रहा है।
अनाज की डिमांड की गई
जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार के अनुसार शासन के निर्देशानुसार ही राशन बांटा गया है। जो अनाज कम रह गया है उसके बारे में डीएम कार्यालय से पत्र लिखवाया जा रहा है।