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रक्षाबंधन पर है सर्वार्थ सिद्धि व आयुष्मान योग का महासंयोग
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रक्षाबंधन पर है सर्वार्थ सिद्धि व आयुष्मान योग का महासंयोग
बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा का कहना है इस बार रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि योग व आयुष्मान योग भी रहेगा। इस योग में किए गए कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ महासंयोग 29 साल बाद आया है। सुबह नौ बजकर 30 मिनट से रात नौ बजकर 29 मिनट तक राखी बांधने का शुभ योग है।
उन्होंने बताया कि श्रावण मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि दो अगस्त को रात नौ बजकर 30 मिनट पर शुरू हो जाएगी। तीन अगस्त को रात नौ बजकर 29 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। रक्षाबंधन का पवित्र पर्व भद्रारहित अपराह्न व्यापिनी श्रावण पूर्णिमा में करने का विधान है। राखी बांधने के समय भद्राकाल नहीं होना चाहिए। इस बार सुबह नौ बजकर 29 मिनट तक भद्राकाल है। इस समय के बाद ही राखी बांधनी चाहिए। इसके अलावा सुबह सात बजकर 30 मिनट से नौ बजे तक राहुकाल है। यह भी अशुभ समय माना जाता है। इस समय भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। लंकेश रावण की बहन ने उसे भद्राकाल में ही राखी बांधी थी। सुबह नौ बजकर 30 मिनट से रात नौ बजकर 29 मिनट तक राखी बांधी जा सकती है। राखी बांधते हुए बहनों को मंत्रों का जाप करना चाहिए। बहन राखी बांधते समय भाई को तिलक लगाती हैं। तिलक लगाने से भाईयों के आत्मविश्वास व आत्मबल में वृद्धि होती है। तिलक लगाने से कई ग्रहों की शांति होती है। तिलक विजय, पराक्रम, सम्मान, श्रेष्ठता और वर्चस्व का प्रतीक होता है। माथे पर दोनों भौहों के बीच अग्निचक्र होता है। यहीं से पूरे शरीर में शक्ति का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कहा कि सबसे पहले इंद्र की पत्नी शचि ने वृत्तासुर से युद्घ में इंद्र की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांधा था। असुरों के दानवीर राजा बलि ने दान देने से पूर्व यज्ञ में रक्षासूत्र बांधा था और जब दान में तीन पग भूमि दे दी तब प्रसन्न होकर उसकी अमरता के लिए भगवान वामन ने उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी रक्षा का वचन दिया था।
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बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा का कहना है इस बार रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि योग व आयुष्मान योग भी रहेगा। इस योग में किए गए कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ महासंयोग 29 साल बाद आया है। सुबह नौ बजकर 30 मिनट से रात नौ बजकर 29 मिनट तक राखी बांधने का शुभ योग है।
उन्होंने बताया कि श्रावण मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि दो अगस्त को रात नौ बजकर 30 मिनट पर शुरू हो जाएगी। तीन अगस्त को रात नौ बजकर 29 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। रक्षाबंधन का पवित्र पर्व भद्रारहित अपराह्न व्यापिनी श्रावण पूर्णिमा में करने का विधान है। राखी बांधने के समय भद्राकाल नहीं होना चाहिए। इस बार सुबह नौ बजकर 29 मिनट तक भद्राकाल है। इस समय के बाद ही राखी बांधनी चाहिए। इसके अलावा सुबह सात बजकर 30 मिनट से नौ बजे तक राहुकाल है। यह भी अशुभ समय माना जाता है। इस समय भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। लंकेश रावण की बहन ने उसे भद्राकाल में ही राखी बांधी थी। सुबह नौ बजकर 30 मिनट से रात नौ बजकर 29 मिनट तक राखी बांधी जा सकती है। राखी बांधते हुए बहनों को मंत्रों का जाप करना चाहिए। बहन राखी बांधते समय भाई को तिलक लगाती हैं। तिलक लगाने से भाईयों के आत्मविश्वास व आत्मबल में वृद्धि होती है। तिलक लगाने से कई ग्रहों की शांति होती है। तिलक विजय, पराक्रम, सम्मान, श्रेष्ठता और वर्चस्व का प्रतीक होता है। माथे पर दोनों भौहों के बीच अग्निचक्र होता है। यहीं से पूरे शरीर में शक्ति का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कहा कि सबसे पहले इंद्र की पत्नी शचि ने वृत्तासुर से युद्घ में इंद्र की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांधा था। असुरों के दानवीर राजा बलि ने दान देने से पूर्व यज्ञ में रक्षासूत्र बांधा था और जब दान में तीन पग भूमि दे दी तब प्रसन्न होकर उसकी अमरता के लिए भगवान वामन ने उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी रक्षा का वचन दिया था।
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