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जिले में 16 कोरोना रोगियों की जान ले चुका है सेप्सिसिमिया

Fri, 08 Jan 2021 11:56 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 11:56 PM IST
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Sepsis has killed 16 corona patients in the district
जिले में 16 कोरोना रोगियों की जान ले चुका है सेप्सिस
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बिजनौर। सेप्सिस, सेप्सिसिमिया या रक्त संक्रमण एक गंभीर रक्त संबंधित रोग है। यह कमजोर रोग प्रतिरोधक शक्ति वाले लोगों में आसानी से हो सकता है। इससे ग्रस्त होने की आशंका तब और बढ़ जाती है, जब शरीर पहले से ही किसी अन्य संक्रमण जनित रोग से जूझ रहा हो। यह संक्रमण शरीर के स्वस्थ हिस्से और रक्त को भी क्षति पहुंचाता है, जो रोगी के स्वस्थ होने में बाधक है। कोरोना रोगी में इस रोग के होने की आशंका ज्यादा रहती है। यह बीमारी जिले में अब तक लगभग 16 कोरोना रोगियों की जान ले चुकी है। इनमें 40 से 60 वर्ष के मरीज शामिल हैं।
कोरोना संक्रमण या दूसरे किसी संक्रमण के रोगियों में सेप्सिस होने की आशंका बढ़ जाती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों, नवजात शिशुओं, बच्चों, गर्भवतियों, बुजुर्गों, किसी संक्रमण से संक्रमित, एड्स या एचआईवी पॉजिटिव, कैंसर, लीवर सिरोसिस, गुर्दा या प्लीहा संबंधित रोगों से ग्रसित व्यक्ति को मौजूदा कोरोना संक्रमण के दौर ने इसकी आशंका और ज्यादा बढ़ा दी है। सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव के अनुसार सेप्सिस हो जाने पर शुरुआती दौर में शरीर में पनप रहे संक्रमण को एंटीबॉयोटिक्स द्वारा खत्म कर इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है, लेकिन यदि लक्षण के प्रति सतर्क होकर तुरंत उपचार नहीं कराया गया तो यह गंभीर हो सकता। यह सेप्टिक के रूप में बदल जाता है और रोगी के जीवन के लिए संकट पैदा कर सकता है।
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सेप्सिस होने पर उसका इलाज घरेलू उपायों से नहीं हो सकता है। कोरोना ने वैसे भी लोगों को स्वास्थ्य के प्रति पहले की अपेक्षा ज्यादा जागरूक कर दिया है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक करीब 62 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। इनमें से लगभग 16 ने सेप्सिस से दम तोड़ा है। मरने वालों में 40 से 60 साल की आयु के मरीज शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट है कि सेप्सिस होने का मुख्य कारण शरीर में खून की कमी के अभाव में फैला संक्रमण है। इसलिए अपने शरीर में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन बनाए रखें। इसके अलावा अपने घरों के साथ-साथ आसपास में भी स्वच्छता बनाए रख कर संक्रमित होने से बचें। दूषित पानी और उससे बने भोजन से भी बचें। भोजन की गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए विटामिन-सी युक्त आहार लें और पर्याप्त जल पीएं। खुद को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। दो गज की शारीरिक दूरी का ध्यान रखें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
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क्या होता है सेप्सिस
किसी संक्रमण से होने वाली यह सबसे हानिकारक स्थितियों में से एक है। जब संक्रमण से निपटने के लिए खून में घुलने वाले केमिकल पूरे शरीर में ही जलन और सूजन का कारण बन जाते हैं, तो इसे सेप्सिस कहते हैं। इसकी वजह से शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और यह कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिस कारण वे काम करना बंद कर देते हैं।

सेप्सिस के लक्षण
- शरीर का तापमान अचानक बढ़ या घट जाना
- एक मिनट में दिल की धड़कन 90 से अधिक होना।
- एक मिनट में 20 सांस लेने में परेशानी होना।
- बुखार, कंपकंपी या अधिक ठंड लगना।
- शरीर से बाहर कम यूरिन निकलना।
- मानसिक स्थिति में अचानक परिवर्तन होना।
- अधिक पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ बेचैनी महसूस होना।
ऐसे करें बचाव
सीएमओ के अनुसार यदि शुरुआत में ही सेप्सिस का पता चल जाता है, तो इसका इलाज आसानी से एंटीबॉयोटिक्स दवाओं से किया जा सकता है। इस स्थिति में रिकवरी भी आसानी से होती है। अगर यदि समय पर सेप्सिस का इलाज नहीं करते हैं, तो यह काफी गंभीर स्थिति हो सकती है। इससे मरीज की मौत तक हो सकती है।
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