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एमएलसी चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ का तिलिस्म टूटा
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बिजनौर। बरेली मुरादाबाद खंड शिक्षक चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ का तिलिस्म पूरी तरह टूटा दिखाई दिया। शिक्षकों की आपसी फूट भी संघ का ले डूबी। संघ का चुनाव में कहीं दबदबा नजर नहीं आया। भाजपा ने पहली बार इस चुनाव में अपना परचम लहराया है। भाजपा का चुनाव प्रचार, घर-घर जाकर मतदाताओं से प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालने की अपील, शिक्षकों की एकजुटता और भाजपा के आईटी सेल ने चुनाव जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डा. हरि सिंह ढिल्लो पिछले दो साल से चुनाव की तैयारी में जुटे थे। एक -एक वोट पर उनकी नजर थी। ज्यादातर वोटरों से उन्होंने खुद या भाजपा के काडर ने संपर्क किया। यही वजह रही कि 42 साल से शिक्षक संघ का दबदबा इस बार समाप्त हो गया।
शिक्षक एमएलसी चुनाव में वर्ष 1972 से वर्ष 2014 तक माध्यमिक शिक्षक संघ का दबदबा रहा है। शिक्षकों की एकजुटता के आगे चुनाव में कोई नहीं टिक पाता था। 2014 में हुए चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ को निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार मिश्र ने पटखनी दे दी थी। बाद में सपा में चले गए। इस बार भी वे सपा से चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा ने अमरोहा के रहने वाले डा. हरि सिंह ढिल्लो पर दांव खेला। ढिल्लो पिछले दो साल से चुनाव की तैयारी में जुटे थे। कोशिश रही कि हर वोटर की दहलीज पर जाएं। ढिल्लो राजनीति के पुराने मंजे हुए खिलाड़ी हैं। रालोद से वह वर्ष 2002 में एमएलसी भी रह चुके हैं।
ढिल्लो 2008 व 2014 में स्नातक एमएलसी का चुनाव भी लड़ चुके हैं पर उन्हें दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। दोनों बार चुनाव लड़ने का इस बार उन्हें फायदा मिला। तमाम शिक्षक उनके पहले से ही संपर्क में थे। हरि सिंह ढिल्लो ने बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर में पहले ही टीम खड़ी कर ली थी। हर जिले की टीम पूरी ताकत के साथ चुनाव में डटी रही। हर टीम को अलग- अलग जिम्मेदारी दी हुई थी। ढिल्लो की खास बात यह रही कि हर चेहरे को वह नाम से जानते हैं। इसका भी उन्हें चुनाव में खूब फायदा मिला। हर किसी की खुशी व गम में वे शरीक होते रहे हैं। चुनाव में पहले से ही रुझान उनकी तरफ था। इसके अलावा भाजपा ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी थी। शिक्षक भी पूरी तरह उनसे जुड़ गए। चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा फायदा वित्त विहीन शिक्षकों के साथ, सीबीएसई शिक्षकों का मिला। ये शिक्षक पूरी तरह उनके साथ नजर आए। बिजनौर जिले में 6355 शिक्षक वोट हैं, जिनमें 4600 वोट पड़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले से 60 प्रतिशत वोट ढिल्लो को मिले।
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आपसी फूट ले डूबी शिक्षक संघ को
माध्यमिक शिक्षक संघ चुनाव में पूरी तरह बिखरा नजर आया। आपसी फूट संघ को ले डूबी। संघ ने चुनाव में पूर्व एमएलसी सुभाष चंद्र शर्मा पर दांव खेला था लेकिन डा. सुनीत गिरि ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में कूद गए। इस फूट को देख संघ के कई नेता चुनाव में हरि सिंह ढिल्लो के साथ खड़े हो गए।
आईटी सेल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
भाजपा की जीत में पार्टी के आईटी सेल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डेढ साल से यह सेल सक्रिय था। सेल की कमान हरि सिंह ढिल्लो के नजदीकी के पास थी। सेल से जुड़े लोग चुनाव से हर छोटी से बडी बात पर नजर रख रहे थे। कहां खामियां हैं, उसके बारे में भी बताते थे। सभी शिक्षकों के मोबाइल नबंर व व्हाटसअप नंबर भी उनके पास थे। शिक्षकों को आवश्यक जानकारी भी व्हाटसअप के द्वारा दी जाती थी।
नहीं छोड़ी कोई कसर
जिले के भाजपा नेताओं की फौज पूरी तरह चुनाव में जुटी रही। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह टीम के साथ चुनाव में रात दिन एक किए रहे। पार्टी के अन्य नेता भी उनके साथ जुट गए। इसका परिणाम पार्टी प्रत्याशी की जीत के रूप में सामने आया।
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शिक्षक एमएलसी चुनाव में वर्ष 1972 से वर्ष 2014 तक माध्यमिक शिक्षक संघ का दबदबा रहा है। शिक्षकों की एकजुटता के आगे चुनाव में कोई नहीं टिक पाता था। 2014 में हुए चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ को निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार मिश्र ने पटखनी दे दी थी। बाद में सपा में चले गए। इस बार भी वे सपा से चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा ने अमरोहा के रहने वाले डा. हरि सिंह ढिल्लो पर दांव खेला। ढिल्लो पिछले दो साल से चुनाव की तैयारी में जुटे थे। कोशिश रही कि हर वोटर की दहलीज पर जाएं। ढिल्लो राजनीति के पुराने मंजे हुए खिलाड़ी हैं। रालोद से वह वर्ष 2002 में एमएलसी भी रह चुके हैं।
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ढिल्लो 2008 व 2014 में स्नातक एमएलसी का चुनाव भी लड़ चुके हैं पर उन्हें दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। दोनों बार चुनाव लड़ने का इस बार उन्हें फायदा मिला। तमाम शिक्षक उनके पहले से ही संपर्क में थे। हरि सिंह ढिल्लो ने बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर में पहले ही टीम खड़ी कर ली थी। हर जिले की टीम पूरी ताकत के साथ चुनाव में डटी रही। हर टीम को अलग- अलग जिम्मेदारी दी हुई थी। ढिल्लो की खास बात यह रही कि हर चेहरे को वह नाम से जानते हैं। इसका भी उन्हें चुनाव में खूब फायदा मिला। हर किसी की खुशी व गम में वे शरीक होते रहे हैं। चुनाव में पहले से ही रुझान उनकी तरफ था। इसके अलावा भाजपा ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी थी। शिक्षक भी पूरी तरह उनसे जुड़ गए। चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा फायदा वित्त विहीन शिक्षकों के साथ, सीबीएसई शिक्षकों का मिला। ये शिक्षक पूरी तरह उनके साथ नजर आए। बिजनौर जिले में 6355 शिक्षक वोट हैं, जिनमें 4600 वोट पड़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले से 60 प्रतिशत वोट ढिल्लो को मिले।
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आपसी फूट ले डूबी शिक्षक संघ को
माध्यमिक शिक्षक संघ चुनाव में पूरी तरह बिखरा नजर आया। आपसी फूट संघ को ले डूबी। संघ ने चुनाव में पूर्व एमएलसी सुभाष चंद्र शर्मा पर दांव खेला था लेकिन डा. सुनीत गिरि ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में कूद गए। इस फूट को देख संघ के कई नेता चुनाव में हरि सिंह ढिल्लो के साथ खड़े हो गए।
आईटी सेल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
भाजपा की जीत में पार्टी के आईटी सेल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डेढ साल से यह सेल सक्रिय था। सेल की कमान हरि सिंह ढिल्लो के नजदीकी के पास थी। सेल से जुड़े लोग चुनाव से हर छोटी से बडी बात पर नजर रख रहे थे। कहां खामियां हैं, उसके बारे में भी बताते थे। सभी शिक्षकों के मोबाइल नबंर व व्हाटसअप नंबर भी उनके पास थे। शिक्षकों को आवश्यक जानकारी भी व्हाटसअप के द्वारा दी जाती थी।
नहीं छोड़ी कोई कसर
जिले के भाजपा नेताओं की फौज पूरी तरह चुनाव में जुटी रही। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह टीम के साथ चुनाव में रात दिन एक किए रहे। पार्टी के अन्य नेता भी उनके साथ जुट गए। इसका परिणाम पार्टी प्रत्याशी की जीत के रूप में सामने आया।