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सेटेलाइट से फिर शुरू हुई निगरानी
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सेटेलाइट से फिर शुरू हुई निगरानी
बिजनौर। खेेतों में फसलों के अवशेष जलाने से रोकने के लिए फिर से सेटेलाइट से निगरानी शुरू कर दी गई है। दो किसानों को फसल अवशेष जलाने के मामले में चिह्नित कर भी लिया गया है। इन किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा दो जगह पर सड़क किनारे कूड़ा जलने के मामले भी सामने आए हैं।
फसल अवशेष जलाने के बजाय खेतों में गलाकर उनका खाद बनाना चाहिए। किसानों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को फसल गलाने के लिए उन्हें जमीन में जोतने को यंत्रों पर सब्सिडी भी दी जा रही है। फसल अवशेष जलने से रोकने के लिए सेटेलाइट से निगरानी की जाती है। पूर्व में फसल अवशेष जलाने में करीब 40 किसानों पर जुर्माना लगाया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जुर्माने को माफ कर दिया था, लेकिन फसल अवशेष जलाने में किसानों को कोई ढील नहीं दी जा रही है। सेटेलाइट से फिर से खेतों की निगरानी शुरू कर दी गई है। आसमानी आंख किसानों के खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामले पकड़ रही है।
जिले में स्योहारा और जलीलपुर में दो किसानों के खेतों में फसल अवशेष जलते हुए पाए गए हैं। इन्हें सेटेलाइट ने ही चिह्नित किया है। एक किसान पराली तो एक किसान गन्ने की पत्ती जला रहा था। इन किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा ये किसान आजीवन कृषि विभाग की किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए अपात्र घोषित किए जाएंगे। फसल जलाने वाले किसान के पास दो एकड़ तक जमीन होने पर ढाई हजार, पांच एकड़ तक जमीन होने पर पांच हजार और इससे अधिक जमीन होने पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है।
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फसल अवशेष को गलाकर बनाएं खाद
उपकृषि निदेशक गिरीश चंद्र के अनुसार फसल अवशेष खाद का काम करते हैं। फसलों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए फसल अवशेष का खेतों में जुतना जरूरी है। किसान फसल अवशेष जलाकर जमीन की उर्वरा शक्ति को कम न करें। फसल अवशेष को गलाकर खाद बनाएं।
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बिजनौर। खेेतों में फसलों के अवशेष जलाने से रोकने के लिए फिर से सेटेलाइट से निगरानी शुरू कर दी गई है। दो किसानों को फसल अवशेष जलाने के मामले में चिह्नित कर भी लिया गया है। इन किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा दो जगह पर सड़क किनारे कूड़ा जलने के मामले भी सामने आए हैं।
फसल अवशेष जलाने के बजाय खेतों में गलाकर उनका खाद बनाना चाहिए। किसानों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को फसल गलाने के लिए उन्हें जमीन में जोतने को यंत्रों पर सब्सिडी भी दी जा रही है। फसल अवशेष जलने से रोकने के लिए सेटेलाइट से निगरानी की जाती है। पूर्व में फसल अवशेष जलाने में करीब 40 किसानों पर जुर्माना लगाया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जुर्माने को माफ कर दिया था, लेकिन फसल अवशेष जलाने में किसानों को कोई ढील नहीं दी जा रही है। सेटेलाइट से फिर से खेतों की निगरानी शुरू कर दी गई है। आसमानी आंख किसानों के खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामले पकड़ रही है।
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जिले में स्योहारा और जलीलपुर में दो किसानों के खेतों में फसल अवशेष जलते हुए पाए गए हैं। इन्हें सेटेलाइट ने ही चिह्नित किया है। एक किसान पराली तो एक किसान गन्ने की पत्ती जला रहा था। इन किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा ये किसान आजीवन कृषि विभाग की किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए अपात्र घोषित किए जाएंगे। फसल जलाने वाले किसान के पास दो एकड़ तक जमीन होने पर ढाई हजार, पांच एकड़ तक जमीन होने पर पांच हजार और इससे अधिक जमीन होने पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है।
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फसल अवशेष को गलाकर बनाएं खाद
उपकृषि निदेशक गिरीश चंद्र के अनुसार फसल अवशेष खाद का काम करते हैं। फसलों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए फसल अवशेष का खेतों में जुतना जरूरी है। किसान फसल अवशेष जलाकर जमीन की उर्वरा शक्ति को कम न करें। फसल अवशेष को गलाकर खाद बनाएं।