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पराली जलाने से रोकने को जिलेभर में सेल गठित
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पराली जलाने से रोकने को जिलेभर में सेल गठित
बिजनौर। डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि प्रदूषण रोकथाम के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पराली जलाने पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी तहसीलों पर एसडीएम, सीओ, सहायक विकास अधिकारी को शामिल कर सेल का गठन किया गया है।
डीएम ने कहा कि जिले में गठित मोबाइल स्क्वाइड्स की टीम फसल कटाई सत्र से पूर्व बैठक कर किसानों को पराली जलाने से रोकने के बारे में निर्देश देगी। ग्राम पंचायतों तथा ग्राम प्रधानों को भी जागरूक किया जाएगा। पराली गो आश्रय स्थलों को दिया जाएगा। बताया कि सीटू कॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट की दृष्टि से कृषकों को वितरित किए गए कृषि यंत्रों तथा कस्टम हाइरिंग सेंटर/फॉर्म मशीनरी बैंक में उपलब्ध यंत्रों का उपयोग सुनिश्चित कराया जाएगा। जिले में गठित उड़नदस्ते लेखपालों, सचिवों, प्रधानों को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ेंगे। तहसील स्तर पर गठित उड़नदस्ते का दायित्व होगा कि धान कटने के समय से लेकर रबी में गेहूं की बुवाई तक प्रतिदिन फसल अवशेष जलाने की घटनाओं एवं इसकी रोकथाम के लिए की गयी कार्यवाही की निगरानी करें। डीएम ने प्रत्येक गांव के ग्राम प्रधान व लेखपाल को निर्देश देते हुए कहा कि वे किसी भी सूरत में पराली न जलने दें। कृषि अवशेष जलाए जाने की घटना पर संबंधित लेखपाल जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि सहायक विकास अधिकारी (कृषि) इन सीटू मैनेजमेंट हेतु नियमानुसार अनुमन्य कृषि यंत्रों का प्रचार प्रसार एवं उपलब्ध इन-सीटू यन्त्रों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन कराना सुनिश्चित करेंगे।
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बिजनौर। डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि प्रदूषण रोकथाम के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पराली जलाने पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी तहसीलों पर एसडीएम, सीओ, सहायक विकास अधिकारी को शामिल कर सेल का गठन किया गया है।
डीएम ने कहा कि जिले में गठित मोबाइल स्क्वाइड्स की टीम फसल कटाई सत्र से पूर्व बैठक कर किसानों को पराली जलाने से रोकने के बारे में निर्देश देगी। ग्राम पंचायतों तथा ग्राम प्रधानों को भी जागरूक किया जाएगा। पराली गो आश्रय स्थलों को दिया जाएगा। बताया कि सीटू कॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट की दृष्टि से कृषकों को वितरित किए गए कृषि यंत्रों तथा कस्टम हाइरिंग सेंटर/फॉर्म मशीनरी बैंक में उपलब्ध यंत्रों का उपयोग सुनिश्चित कराया जाएगा। जिले में गठित उड़नदस्ते लेखपालों, सचिवों, प्रधानों को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ेंगे। तहसील स्तर पर गठित उड़नदस्ते का दायित्व होगा कि धान कटने के समय से लेकर रबी में गेहूं की बुवाई तक प्रतिदिन फसल अवशेष जलाने की घटनाओं एवं इसकी रोकथाम के लिए की गयी कार्यवाही की निगरानी करें। डीएम ने प्रत्येक गांव के ग्राम प्रधान व लेखपाल को निर्देश देते हुए कहा कि वे किसी भी सूरत में पराली न जलने दें। कृषि अवशेष जलाए जाने की घटना पर संबंधित लेखपाल जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि सहायक विकास अधिकारी (कृषि) इन सीटू मैनेजमेंट हेतु नियमानुसार अनुमन्य कृषि यंत्रों का प्रचार प्रसार एवं उपलब्ध इन-सीटू यन्त्रों के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन कराना सुनिश्चित करेंगे।
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