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बिजनौर: बेमिसाल खूबसूरती का नमूना है सैडिल बांध
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कालागढ़ के सैडिल बांध पर बिखरा प्रकृति का अनुपम सौंदर्य
यहां प्राकृतिक सौंदर्य नदी के कारण और भी अधिक मनोहारी हो जाता है
फोटो: तीन
अथहर महमूद सिद्दीकी
कालागढ़। अभियांत्रिकी की कारीगरी और प्राकृतिक दृश्यों का सौंदर्य सैडिल बांध पर देखते ही बनता है। सैडिल बांध उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाके में बाढ़ नियंत्रण में खास भूमिका निभाता है। कालागढ़ की रामगंगा बांध परियोजना पर बना सैडिल बांध अभियांत्रिकी की कारीगरी से किसी का भी मन मोह लेने की क्षमता रखता है। बांध के शिखर का तल 372.5 मीटर, शिखर की चौड़ाई 12 मीटर, लंबाई 562 मीटर है। बांध के स्पिलवे से 1926 घन मीटर/सेकेंड जल का निर्वाह करने की क्षमता है। कालागढ़ की आबादी से लगभग 20 किमी दूर शिवालिक पर्वतों के बीच रामगंगा नदी के तट पर यह बांध बना है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य नदी के कारण और भी अधिक मनोहारी हो जाता है।
बांध सुरक्षा अधिनियम एवं जंगली जानवरों के कारण इस बांध पर विभागीय अधिकारियों और कार्य करने वाले कर्मियों के अलावा अन्य के आने जाने की अनुमति नही हैं। यहां अक्सर बाघ, गुलदार, भेड़िया, भालू, हाथी, सेही जैसे जीव विचरण करते रहते हैं। अधिशासी अभियंता ब्रजेश कुमार एवं सहायक अभियंता मनोज कुमार लिखवार ने बताया कि बांध पर विभागीय नियमों के अनुरूप सुंदरीकरण का कार्य किया गया है। यहां का तापमान भी कालागढ़ आबादी से कम ही रहता है। रामगंगा नदी में बरसात के दौरान जलाशयों में पानी की मात्रा बढ़ जाने पर पहले पानी सैडिल बांध से निकाला जाता है। पानी का प्रवाह व उसमें वृद्धि को इसी बांध के गेटों से नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। अपरिहार्य स्थिति में ही रामगंगा बांध से पानी की निकासी की जाती है। बांध का निर्माण विभाग के ही अभियंताओं व कर्मियों ने किया है। इस कारण से इसका अभियांत्रिकी का नमूना अद्वितीय कारीगरी को दर्शाता है। संवाद
रोमांचकारी है सफर
सैडिल बांध पर जाने के लिए सफर बहुत ही रोमांचकारी है। जंगली जानवरों के कारण जोखिम से भरा हुआ है। घुमावदार रास्ते पहाड़ों से होकर गुजरते हुए मीरासोत से सैडिल बांध पहुंचते हैं। यहां कई बार हाथी मिल जाने पर चालक घंटों तक वाहन को लेकर खड़े रहते हैं। बांध पर बना शीशमहल, टावर, स्पिलवे एवं जलाशय की सुंदरता देखते ही बनती है। रात्रि में यहां निशाचर पक्षी कलरव करते रहते हैं। सुबह अक्सर पानी में नहाते हुए हाथी यहां की सुंदरता को और अधिक बढ़ा देते हैं।
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फोटो: तीन
अथहर महमूद सिद्दीकी
कालागढ़। अभियांत्रिकी की कारीगरी और प्राकृतिक दृश्यों का सौंदर्य सैडिल बांध पर देखते ही बनता है। सैडिल बांध उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाके में बाढ़ नियंत्रण में खास भूमिका निभाता है। कालागढ़ की रामगंगा बांध परियोजना पर बना सैडिल बांध अभियांत्रिकी की कारीगरी से किसी का भी मन मोह लेने की क्षमता रखता है। बांध के शिखर का तल 372.5 मीटर, शिखर की चौड़ाई 12 मीटर, लंबाई 562 मीटर है। बांध के स्पिलवे से 1926 घन मीटर/सेकेंड जल का निर्वाह करने की क्षमता है। कालागढ़ की आबादी से लगभग 20 किमी दूर शिवालिक पर्वतों के बीच रामगंगा नदी के तट पर यह बांध बना है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य नदी के कारण और भी अधिक मनोहारी हो जाता है।
बांध सुरक्षा अधिनियम एवं जंगली जानवरों के कारण इस बांध पर विभागीय अधिकारियों और कार्य करने वाले कर्मियों के अलावा अन्य के आने जाने की अनुमति नही हैं। यहां अक्सर बाघ, गुलदार, भेड़िया, भालू, हाथी, सेही जैसे जीव विचरण करते रहते हैं। अधिशासी अभियंता ब्रजेश कुमार एवं सहायक अभियंता मनोज कुमार लिखवार ने बताया कि बांध पर विभागीय नियमों के अनुरूप सुंदरीकरण का कार्य किया गया है। यहां का तापमान भी कालागढ़ आबादी से कम ही रहता है। रामगंगा नदी में बरसात के दौरान जलाशयों में पानी की मात्रा बढ़ जाने पर पहले पानी सैडिल बांध से निकाला जाता है। पानी का प्रवाह व उसमें वृद्धि को इसी बांध के गेटों से नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। अपरिहार्य स्थिति में ही रामगंगा बांध से पानी की निकासी की जाती है। बांध का निर्माण विभाग के ही अभियंताओं व कर्मियों ने किया है। इस कारण से इसका अभियांत्रिकी का नमूना अद्वितीय कारीगरी को दर्शाता है। संवाद
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रोमांचकारी है सफर
सैडिल बांध पर जाने के लिए सफर बहुत ही रोमांचकारी है। जंगली जानवरों के कारण जोखिम से भरा हुआ है। घुमावदार रास्ते पहाड़ों से होकर गुजरते हुए मीरासोत से सैडिल बांध पहुंचते हैं। यहां कई बार हाथी मिल जाने पर चालक घंटों तक वाहन को लेकर खड़े रहते हैं। बांध पर बना शीशमहल, टावर, स्पिलवे एवं जलाशय की सुंदरता देखते ही बनती है। रात्रि में यहां निशाचर पक्षी कलरव करते रहते हैं। सुबह अक्सर पानी में नहाते हुए हाथी यहां की सुंदरता को और अधिक बढ़ा देते हैं।
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