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बच्चों की सेहत पर भारी पड़ने लगा रोटा वायरस
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बच्चों की सेहत पर भारी पड़ने लगा रोटा वायरस
बिजनौर। एक ओर मौसम परिवर्तन तो दूसरी तरफ रोटा वायरस बच्चों की सेहत पर हमला करने लगा है। रोटा वायरस के कारण बच्चों को डायरिया जैसी बीमारियों परेेशान करने लगी हैं। जिला अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल के तक बच्चों में यह वायरस अधिक सक्रिय हो जाता है, अभिभावकों को बच्चों के प्रति सतर्कता बरतने की अधिक जरूरत है।
ऋतु परिवर्तन होने के चलते कभी एकदम से धूप निकलने लगती है तो कभी अचानक बारिश होने लगती है। मौसम की ये बदलाव बड़ों से लेकर बच्चों तक को बीमार कर रही है। ऐसे में बच्चों को अधिक सावधान रखने की जरूरत है। जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. विभू शर्मा बताते हैं कि बरसात को डायरिया और फ्लू का सीजन माना जाता है। आजकल बच्चों में सबसे ज्यादा रोटा वायरस का हमला शुरू हो जाता है। इस मौसम के लिए यह वायरस अनुकूल है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग परामर्शदाता डा. केके सिंह का कहना है कि आमतौर पर बच्चों को दस्त और उल्टियां आदि समस्या गंदगी से होती है। बच्चे लगातार गंदगी के संपर्क में रहते हैं तो उन बच्चों में इसके होने के ज्यादा खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि आजकल जिला अस्पताल में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। अस्पताल में रोजाना ऐसे करीब दस से 20 बच्चे उपचार कराने को पहुंच रहे हैं।
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ऐसे करें बचाव
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- बच्चों को गंदगी में न छोड़ें।
- पानी उबालकर ठंडा करके ही पिलाएं।
- बच्चे को ओआरएस जरूर दें।
- ज्यादा परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक के पास ले जाएं।
- सर्दी, खांसी, बुखार होने पर उसे नजरंदाज न करें।
- घर में किसी के बीमार होने पर उनसे बच्चों को दूर रखें।
- नियमित रूप से मास्क का प्रयोग करें।
- डायरिया में खाना पीना न छोड़ें।
- चिकित्सक की सलाह के आधार पर उपचार जारी रखें।
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बिजनौर। एक ओर मौसम परिवर्तन तो दूसरी तरफ रोटा वायरस बच्चों की सेहत पर हमला करने लगा है। रोटा वायरस के कारण बच्चों को डायरिया जैसी बीमारियों परेेशान करने लगी हैं। जिला अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल के तक बच्चों में यह वायरस अधिक सक्रिय हो जाता है, अभिभावकों को बच्चों के प्रति सतर्कता बरतने की अधिक जरूरत है।
ऋतु परिवर्तन होने के चलते कभी एकदम से धूप निकलने लगती है तो कभी अचानक बारिश होने लगती है। मौसम की ये बदलाव बड़ों से लेकर बच्चों तक को बीमार कर रही है। ऐसे में बच्चों को अधिक सावधान रखने की जरूरत है। जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. विभू शर्मा बताते हैं कि बरसात को डायरिया और फ्लू का सीजन माना जाता है। आजकल बच्चों में सबसे ज्यादा रोटा वायरस का हमला शुरू हो जाता है। इस मौसम के लिए यह वायरस अनुकूल है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग परामर्शदाता डा. केके सिंह का कहना है कि आमतौर पर बच्चों को दस्त और उल्टियां आदि समस्या गंदगी से होती है। बच्चे लगातार गंदगी के संपर्क में रहते हैं तो उन बच्चों में इसके होने के ज्यादा खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि आजकल जिला अस्पताल में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। अस्पताल में रोजाना ऐसे करीब दस से 20 बच्चे उपचार कराने को पहुंच रहे हैं।
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ऐसे करें बचाव
- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- बच्चों को गंदगी में न छोड़ें।
- पानी उबालकर ठंडा करके ही पिलाएं।
- बच्चे को ओआरएस जरूर दें।
- ज्यादा परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक के पास ले जाएं।
- सर्दी, खांसी, बुखार होने पर उसे नजरंदाज न करें।
- घर में किसी के बीमार होने पर उनसे बच्चों को दूर रखें।
- नियमित रूप से मास्क का प्रयोग करें।
- डायरिया में खाना पीना न छोड़ें।
- चिकित्सक की सलाह के आधार पर उपचार जारी रखें।