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Bijnor News: फैसले से आहत हैं आकाशवाणी के सेवानिवृत प्रसारण अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पर तैनात रहे सेवानिवृत्त प्रसारण अधिकारियों ने नजीबाबाद केंद्र सहित प्रदेश के आकाशवाणी केंद्रों के प्रसारण सीमित करने की प्रसार भारती की योजना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सीमित प्रसारण से संस्कृति, इतिहास और युवा पीढ़ी प्रभावित होगी।
नजीबाबाद केंद्र की स्थापना से डेढ़ दशक तक नजीबाबाद केंद्र पर तैनात रहे वर्ष 2007 में रामपुर केंद्र से सेवानिवृत हुए प्रसारण अधिकारी राजेश गौड़ का कहना है कि सीमित प्रसारण योजना संस्कृति पर कुठाराघात है। रेडियो ने कला संस्कृति और इतिहास को जिंदा रखकर नामचीन कलाकार दिए हैं।
रिले केंद्र बनाए जाने से आने वाली पीढि़यां रेडियों का इतिहास भूल जाएंगी। आकाशवाणी केंद्रों को बचाने के लिए नियुक्तियां खोलने और आय के संसाधन बढ़ाने की सलाह दी।
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नजीबाबाद केंद्र पर वर्ष 1978 से 90 तक तैनात रहे वर्ष 2009 में पौड़ी केंद्र के प्रभारी निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए चक्रधर कंडवाल कहते है कि बहुजन हिताय बहुजन सुखाय उद्द्योष के साथ नजीबाबाद और प्रदेश के अन्य केंद्राें ने साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में पहचान बनाई है। रिले केंद्र बनाए जाने से विभिन्न स्तर की प्रतिभाओं के साथ नाइंसाफी होगी।
आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पर एक दशक से अधिक अवधि तक तैनात रहे सेवानिवृत्त अधिकारी अरुण डबराल का कहना है कि नजीबाबाद केंद्र ने उत्तराखंड और सीमावर्ती क्षेत्रों की संस्कृति के संरक्षण में सेतु का काम किया है।
गढ़वाली और मैदानी लोक कलाकारों, लोक गाथाओं, संस्कृति और साहित्यकारों को मंच दिया। नजीबाबाद सरीखे प्रदेश के आकाशवाणी केंद्रों को सीमित प्रसारण विंडो देना प्रसार भारती का दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। इस फैसले से केंद्र से जुड़े आकस्मिक केंद्र कर्मी प्रभावित होंगे।
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नजीबाबाद। आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पर तैनात रहे सेवानिवृत्त प्रसारण अधिकारियों ने नजीबाबाद केंद्र सहित प्रदेश के आकाशवाणी केंद्रों के प्रसारण सीमित करने की प्रसार भारती की योजना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सीमित प्रसारण से संस्कृति, इतिहास और युवा पीढ़ी प्रभावित होगी।
नजीबाबाद केंद्र की स्थापना से डेढ़ दशक तक नजीबाबाद केंद्र पर तैनात रहे वर्ष 2007 में रामपुर केंद्र से सेवानिवृत हुए प्रसारण अधिकारी राजेश गौड़ का कहना है कि सीमित प्रसारण योजना संस्कृति पर कुठाराघात है। रेडियो ने कला संस्कृति और इतिहास को जिंदा रखकर नामचीन कलाकार दिए हैं।
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रिले केंद्र बनाए जाने से आने वाली पीढि़यां रेडियों का इतिहास भूल जाएंगी। आकाशवाणी केंद्रों को बचाने के लिए नियुक्तियां खोलने और आय के संसाधन बढ़ाने की सलाह दी।
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नजीबाबाद केंद्र पर वर्ष 1978 से 90 तक तैनात रहे वर्ष 2009 में पौड़ी केंद्र के प्रभारी निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए चक्रधर कंडवाल कहते है कि बहुजन हिताय बहुजन सुखाय उद्द्योष के साथ नजीबाबाद और प्रदेश के अन्य केंद्राें ने साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में पहचान बनाई है। रिले केंद्र बनाए जाने से विभिन्न स्तर की प्रतिभाओं के साथ नाइंसाफी होगी।
आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पर एक दशक से अधिक अवधि तक तैनात रहे सेवानिवृत्त अधिकारी अरुण डबराल का कहना है कि नजीबाबाद केंद्र ने उत्तराखंड और सीमावर्ती क्षेत्रों की संस्कृति के संरक्षण में सेतु का काम किया है।
गढ़वाली और मैदानी लोक कलाकारों, लोक गाथाओं, संस्कृति और साहित्यकारों को मंच दिया। नजीबाबाद सरीखे प्रदेश के आकाशवाणी केंद्रों को सीमित प्रसारण विंडो देना प्रसार भारती का दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। इस फैसले से केंद्र से जुड़े आकस्मिक केंद्र कर्मी प्रभावित होंगे।