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आरक्षण स्थिति बदलने से बदली पंचायतों की तस्वीर
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आरक्षण स्थिति बदलने से बदली पंचायतों की तस्वीर
बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण में बड़ा उलटफेर हुआ है। आरक्षण से पंचायतों की पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। दिग्गजों की पंचायत अनुसूचित जाति वर्ग में आरक्षित हो गई हैं। अब पंचायत चुनाव में नए राजनीतिक समीकरण बनने के कयास लग रहे हैं।
वर्ष 2015 के चुनाव में आरक्षण नीति पिछले सभी पंचायत आरक्षण को शून्य करके तय हुई थी। जांच के दौरान जिले में 680 पंचायत ऐसी निकली हैं जो वर्ष1995 से लेकर अब तक किसी भी केटेगरी में आरक्षित नहीं हुईं। शासन ने वर्ष 2021 का आरक्षण चक्रानुक्रम में करने का फैसला लिया है। साथ ही निर्देश दिए कि जो पंचायत आज तक आरक्षित नहीं हुई हैं, उन्हें पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाए। इस फैसले ने आरक्षण की पूरी तस्वीर ही बदल दी है। अनेक राजनीतिक दिग्गजों की पंचायतों का आरक्षण बदल गया है। प्रधान चुनाव में कांटे के मुकाबले होने की संभावना है।
इस बार आरक्षण में हुए फेर बदल के अनुसार पूर्व विधायक रुचिवीरा की ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की ग्राम पंचायत धर्मनगरी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गयी है। बताया जा रहा कि मोहम्मदपुर मंडावली पंचायत के प्रधान पद की कमान करीब 50 साल से एक ही परिवार के हाथ में रही है। इसी परिवार के प्रधान बनते रहे हैं। परंतु इस बार पंचायत को एससी श्रेणी में आरक्षित कर दिया गया है। हल्दौर ब्लाक की पंचायत धर्मपुरा करीब 20 साल से एक परिवार के कब्जे में रही है। इस बार यह पंचायत भी अनुसूचित जाति की झोली में चली गई है। पूर्व राज्य मंत्री डा अमर सिंह की पंचायत करीमपुर उलेढ़ा के प्रधान के चुनाव में इस बार एससी उम्मीदवार ही होंगे।
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किसान संगठन के वरिष्ठ नेता की पंचायत करनपुर गांवड़ी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछली बार ओबीसी प्रधान के लिए आरक्षित थी। पंचायत में चुनावी कशमकश रहती है। परंतु आरक्षण ने दावेदारों का उत्साह ठंडा कर दिया है। ब्लॉक की शाहनगर पंचायत में रालोद के एक नेता का डंका कई योजनाओं में बजता रहा है। परंतु इस बार सीट एससी महिला के लिए आरक्षित वर्ग में डाल जोर का झटका धीरे से लगा है।
हल्दौर ब्लाक का नसीरपुर नैनसिंह गांव राजनीति का अखाड़ा है। गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन तथा नहटौर विधायक प्रतिनिधि इसी गांव के रहने वाले हैं। पिछली बार पूर्व चेयरमैन के करीबी परिवार के हाथ में प्रधानी थी। उनके पिता भी राजनीति के खिलाड़ी रहे हैं। इस बार यह पंचायत भी अनुसूचित सूचित जाति को रिजर्व है।
आपत्ति लेकर आने लगे हैं ग्रामीण
बिजनौर। हालांकि आरक्षण पर आपत्तियां चार मार्च से आठ मार्च तक ली जाएंगी परंतु आरक्षण सूची को देखकर लोग आपत्ति लेकर आने लगे हैं। ग्राम शादीपुर कला के इंद्रजीत सिंह, सचिन, विकास, गायत्री, सलोनी, रविंद्र आदि का कहना है कि हल्दौर ब्लॉक का वार्ड तीन ओबीसी को आरक्षित किया है। वार्ड चार के कुछ गांव वार्ड तीन में डाल दिए हैं। वार्ड चार भी पिछड़ा वर्ग को आरक्षित हैं। यह ठीक नहीं है। वार्ड तीन एससी को आरक्षित हो।
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बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण में बड़ा उलटफेर हुआ है। आरक्षण से पंचायतों की पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। दिग्गजों की पंचायत अनुसूचित जाति वर्ग में आरक्षित हो गई हैं। अब पंचायत चुनाव में नए राजनीतिक समीकरण बनने के कयास लग रहे हैं।
वर्ष 2015 के चुनाव में आरक्षण नीति पिछले सभी पंचायत आरक्षण को शून्य करके तय हुई थी। जांच के दौरान जिले में 680 पंचायत ऐसी निकली हैं जो वर्ष1995 से लेकर अब तक किसी भी केटेगरी में आरक्षित नहीं हुईं। शासन ने वर्ष 2021 का आरक्षण चक्रानुक्रम में करने का फैसला लिया है। साथ ही निर्देश दिए कि जो पंचायत आज तक आरक्षित नहीं हुई हैं, उन्हें पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाए। इस फैसले ने आरक्षण की पूरी तस्वीर ही बदल दी है। अनेक राजनीतिक दिग्गजों की पंचायतों का आरक्षण बदल गया है। प्रधान चुनाव में कांटे के मुकाबले होने की संभावना है।
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इस बार आरक्षण में हुए फेर बदल के अनुसार पूर्व विधायक रुचिवीरा की ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की ग्राम पंचायत धर्मनगरी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गयी है। बताया जा रहा कि मोहम्मदपुर मंडावली पंचायत के प्रधान पद की कमान करीब 50 साल से एक ही परिवार के हाथ में रही है। इसी परिवार के प्रधान बनते रहे हैं। परंतु इस बार पंचायत को एससी श्रेणी में आरक्षित कर दिया गया है। हल्दौर ब्लाक की पंचायत धर्मपुरा करीब 20 साल से एक परिवार के कब्जे में रही है। इस बार यह पंचायत भी अनुसूचित जाति की झोली में चली गई है। पूर्व राज्य मंत्री डा अमर सिंह की पंचायत करीमपुर उलेढ़ा के प्रधान के चुनाव में इस बार एससी उम्मीदवार ही होंगे।
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किसान संगठन के वरिष्ठ नेता की पंचायत करनपुर गांवड़ी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछली बार ओबीसी प्रधान के लिए आरक्षित थी। पंचायत में चुनावी कशमकश रहती है। परंतु आरक्षण ने दावेदारों का उत्साह ठंडा कर दिया है। ब्लॉक की शाहनगर पंचायत में रालोद के एक नेता का डंका कई योजनाओं में बजता रहा है। परंतु इस बार सीट एससी महिला के लिए आरक्षित वर्ग में डाल जोर का झटका धीरे से लगा है।
हल्दौर ब्लाक का नसीरपुर नैनसिंह गांव राजनीति का अखाड़ा है। गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन तथा नहटौर विधायक प्रतिनिधि इसी गांव के रहने वाले हैं। पिछली बार पूर्व चेयरमैन के करीबी परिवार के हाथ में प्रधानी थी। उनके पिता भी राजनीति के खिलाड़ी रहे हैं। इस बार यह पंचायत भी अनुसूचित सूचित जाति को रिजर्व है।
आपत्ति लेकर आने लगे हैं ग्रामीण
बिजनौर। हालांकि आरक्षण पर आपत्तियां चार मार्च से आठ मार्च तक ली जाएंगी परंतु आरक्षण सूची को देखकर लोग आपत्ति लेकर आने लगे हैं। ग्राम शादीपुर कला के इंद्रजीत सिंह, सचिन, विकास, गायत्री, सलोनी, रविंद्र आदि का कहना है कि हल्दौर ब्लॉक का वार्ड तीन ओबीसी को आरक्षित किया है। वार्ड चार के कुछ गांव वार्ड तीन में डाल दिए हैं। वार्ड चार भी पिछड़ा वर्ग को आरक्षित हैं। यह ठीक नहीं है। वार्ड तीन एससी को आरक्षित हो।