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700 मीटर लंबी सड़क की 12 दिन में दो बार मरम्मत
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नहटौर शाखा नहर पटरी पर खेड़ा गांव के पास निर्माणाधीन सड़क की मरम्मत करता मजदूर।
- फोटो : BIJNOR
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700 मीटर सड़क की 12 दिन में दो बार मरम्मत
छाछरी मोड़/ बिजनौर। 700 मीटर लंबी नहर पटरी सड़क की 12 दिनों में दो बार मरम्मत हो चुकी है। जांच में फंसी इस सड़क के टुकड़े को बचाए रखने के लिए सोमवार को फिर से तारकोल डाला गया। दरअसल, नहर पटरी पर सात किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी थी, लेकिन नारियल से सड़क टूटने के होने के बाद 700 मीटर के टुकड़े के बाद आगेे की सड़क नहीं बन सकी। यह सड़क जांच के दायरे में फंसी हुई है। जिसकी निर्माण सामग्री की जांच रिपोर्ट भी आनी बाकी है।
सोमवार को नहटौर शाखा नहर पटरी पर खेड़ा गांव के पास 700 मीटर लंबी सड़क पर मजदूर तारकोल डालते हुए देखे गए। बता दें कि इस सड़क पर पंद्रह दिसंबर को भी तारकोल डाला गया था। उस दिन सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता का जिले में दौरा था। जिसके चलते उखड़ रही सड़क को बचाने के लिए मरम्मत करनी पड़ी। खेड़ा गांव के पास से झालू तक करीब सात किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण सवा करोड़ रुपये में किया जाना था। 700 मीटर सड़क बनने पर सदर विधायक ने दो दिसंबर को इसका उद्घाटन किया। नारियल से टूटने पर यह सड़क जांच में फंस गई। तीन अलग-अलग टीम इस सड़क की जांच कर चुकी हैं। तीन बार निर्माण सामग्री के नमूने भी लिए गए। अब जांच पूरी होने तक इस सड़क के निर्माण पर रोक लगी है।
बार बार मरम्मत खड़े कर रही सवाल
सड़क का निर्माण गुणवत्तापरक तरीके से नहीं कराने के आरोप सदर विधायक ने लगाए थे। वहीं, विभाग सड़क निर्माण में कोई कोताही नहीं बरतने का दावा कर रहा था। अगर सड़क ठीक बनी थी तो अब सात सौ मीटर लंबी सड़क की मरम्मत बार-बार क्यों की जा रही है।
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छाछरी मोड़/ बिजनौर। 700 मीटर लंबी नहर पटरी सड़क की 12 दिनों में दो बार मरम्मत हो चुकी है। जांच में फंसी इस सड़क के टुकड़े को बचाए रखने के लिए सोमवार को फिर से तारकोल डाला गया। दरअसल, नहर पटरी पर सात किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी थी, लेकिन नारियल से सड़क टूटने के होने के बाद 700 मीटर के टुकड़े के बाद आगेे की सड़क नहीं बन सकी। यह सड़क जांच के दायरे में फंसी हुई है। जिसकी निर्माण सामग्री की जांच रिपोर्ट भी आनी बाकी है।
सोमवार को नहटौर शाखा नहर पटरी पर खेड़ा गांव के पास 700 मीटर लंबी सड़क पर मजदूर तारकोल डालते हुए देखे गए। बता दें कि इस सड़क पर पंद्रह दिसंबर को भी तारकोल डाला गया था। उस दिन सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता का जिले में दौरा था। जिसके चलते उखड़ रही सड़क को बचाने के लिए मरम्मत करनी पड़ी। खेड़ा गांव के पास से झालू तक करीब सात किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण सवा करोड़ रुपये में किया जाना था। 700 मीटर सड़क बनने पर सदर विधायक ने दो दिसंबर को इसका उद्घाटन किया। नारियल से टूटने पर यह सड़क जांच में फंस गई। तीन अलग-अलग टीम इस सड़क की जांच कर चुकी हैं। तीन बार निर्माण सामग्री के नमूने भी लिए गए। अब जांच पूरी होने तक इस सड़क के निर्माण पर रोक लगी है।
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बार बार मरम्मत खड़े कर रही सवाल
सड़क का निर्माण गुणवत्तापरक तरीके से नहीं कराने के आरोप सदर विधायक ने लगाए थे। वहीं, विभाग सड़क निर्माण में कोई कोताही नहीं बरतने का दावा कर रहा था। अगर सड़क ठीक बनी थी तो अब सात सौ मीटर लंबी सड़क की मरम्मत बार-बार क्यों की जा रही है।
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