{"_id":"6691a08d175e52a01d0b93a4","slug":"remembered-the-martyrdom-of-hazrat-imam-hussain-and-his-companions-bijnor-news-c-27-1-smrt1004-126771-2024-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत याद की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत याद की
विज्ञापन
छजुपुरा सादात में चल रही मजलिसों का पांचवां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्दौर। गांव छजुपुरा सादात में नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में पहली मजलिस कलीम हैदर के मकान, दूसरी मजलिस जुल्फकार हैदर के मकान, तीसरी मजलिस दरगाहे फातेमा जैहरा और चौथी मजलिस इमाम बारगाह में आयोजित हुई। पांचवे दिन आयोजित इन मजलिसों को मोहम्मद जाकिर रजा और मौलाना मेहंदी अब्बास ने खिताब किया।
इमाम बारगाह में आयोजित मजलिस में मौलाना मेंहदी अब्बास ने कहा कि रसूल अल्लाह के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना के दीन इस्लाम और इंसानियत को कयामत तक जिंदा रखने के लिए करबला के मैदान में अपनी और अपने भरे घर की कुर्बानी दे दी। इनमें एक बहुत ही करीबी दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर भी शामिल है। मौलाना ने हबीब इब्ने मजाहिर की शान बयान करते हुए कहा कि अगर इंसान दोस्ती करे तो हबीब इब्ने मजाहिर के जैसी दोस्ती करें।
मजलिस में सोजखानी मोहम्मद रजा, नायाब हैदर, मोहम्मद अब्बास, आलम जैदी, सालिम जैदी, शाहवेज जैदी, पेशख्वानी रईस जैदी और नोहा खानी, फिरोज मेहंदी, सादिक रजा, रोशन अब्बास, गाजी अब्बास, सालिम जैदी, अम्मार हैदर, काशिफ जैदी ने की। ज़ुल्फकार हैदर के मकान से मजलिस के बाद जुलूस अलम व ताबूत बरामद हुआ, जो इमाम बारगाह पहुंचकर समाप्त हुआ कार्यक्रम का संचालन मीडिया प्रभारी शाही वास्ती ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हल्दौर। गांव छजुपुरा सादात में नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में पहली मजलिस कलीम हैदर के मकान, दूसरी मजलिस जुल्फकार हैदर के मकान, तीसरी मजलिस दरगाहे फातेमा जैहरा और चौथी मजलिस इमाम बारगाह में आयोजित हुई। पांचवे दिन आयोजित इन मजलिसों को मोहम्मद जाकिर रजा और मौलाना मेहंदी अब्बास ने खिताब किया।
इमाम बारगाह में आयोजित मजलिस में मौलाना मेंहदी अब्बास ने कहा कि रसूल अल्लाह के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना के दीन इस्लाम और इंसानियत को कयामत तक जिंदा रखने के लिए करबला के मैदान में अपनी और अपने भरे घर की कुर्बानी दे दी। इनमें एक बहुत ही करीबी दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर भी शामिल है। मौलाना ने हबीब इब्ने मजाहिर की शान बयान करते हुए कहा कि अगर इंसान दोस्ती करे तो हबीब इब्ने मजाहिर के जैसी दोस्ती करें।
विज्ञापन
मजलिस में सोजखानी मोहम्मद रजा, नायाब हैदर, मोहम्मद अब्बास, आलम जैदी, सालिम जैदी, शाहवेज जैदी, पेशख्वानी रईस जैदी और नोहा खानी, फिरोज मेहंदी, सादिक रजा, रोशन अब्बास, गाजी अब्बास, सालिम जैदी, अम्मार हैदर, काशिफ जैदी ने की। ज़ुल्फकार हैदर के मकान से मजलिस के बाद जुलूस अलम व ताबूत बरामद हुआ, जो इमाम बारगाह पहुंचकर समाप्त हुआ कार्यक्रम का संचालन मीडिया प्रभारी शाही वास्ती ने किया।
विज्ञापन