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‘रमजान का करो इस्तकबाल, निजात का हो जाएगा इंतेजाम’
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‘रमजान का करो इस्तकबाल, निजात का हो जाएगा इंतेजाम’
गजरौला शिव। तमाम महीनों के सरदार यानि, माहे रमजान की आमद करीब है। हर मुसलमान को इस महीने के इस्तकबाल और इसके हर लम्हे को वसूल करने के लिए पूरे तौर पर तैयार रहना चाहिए। जमीयत उलेमा-ए-हिंद बिजनौर शहर के सेक्रेटरी कारी शमीम अहमद ने रमजान की अहमियत और फजीलत बयां करते हुए कहा कि रमजानुल मुबारक का महीना नेकियों व बरकतों का महीना है।
उन्होंने बताया कि रमजान का पहला रोजा 14 अप्रैल बुधवार का है। पहली शहरी मंगलवार की रात में है। माहे रमजान की जितनी फजीलत बयां की जाए कम है । कारी शमीम अहमद फरमाते हैं कि माहे रमजान में पांच वक्त की नमाज जमात के साथ अदा करें, रोजो का एहतमाम करें, हिसाब लगाकर जकात अदा करें, दिल लगाकर क़ुरआने करीम रोजाना पढ़ें, नवाफिल का एहतमाम ज्यादा से ज्यादा करें, तरावीह का खास एहतमाम करें, गरीबों, मकिस्कीनों का ध्यान रखें, पड़ोसियों को न सताए, मस्जिद में माक्स लगा कर आए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, अपनी औरतों को बेपर्दा होने से बचाएं, मोबाइल का बेजा इस्तेमाल ना करें, झूठ व गीबत (पीठ पीछे बुराई करना) की महफिलों से अपने आप को दूर रखें । ऐसा करने से रोजे के सवाब में कमी हो जाती है, अपनी निगाहों की हिफाजत करें।
बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी जामा मस्जिद के इमाम-ओ-खतीब मौलाना वरीस अहमद ने कहा कि माहे रमजान के इस्तकबाल के लिए सबसे पहली चीज यह है कि इसकी अजमत का हर मुसलमान को अहसास हो, रमजान में नेकियों का सवाब बढ़ा दिया जाता है। एक नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर फर्जो के बराबर दिया जाता है। सभी प्रेम व भाईचारे तथा एक दूसरे के साथ मिल जुलकर रहे, पांचों वक्त नमाज में मुल्क में अमन-चैन व खुशहाली के लिए दुआ करें। कोरोना महामारी जैसी बीमारी के खात्मे के लिए अल्लाह से दुआएं मांगे। मस्जिद में हासिल होने से पहले मुंह पर मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
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गजरौला शिव। तमाम महीनों के सरदार यानि, माहे रमजान की आमद करीब है। हर मुसलमान को इस महीने के इस्तकबाल और इसके हर लम्हे को वसूल करने के लिए पूरे तौर पर तैयार रहना चाहिए। जमीयत उलेमा-ए-हिंद बिजनौर शहर के सेक्रेटरी कारी शमीम अहमद ने रमजान की अहमियत और फजीलत बयां करते हुए कहा कि रमजानुल मुबारक का महीना नेकियों व बरकतों का महीना है।
उन्होंने बताया कि रमजान का पहला रोजा 14 अप्रैल बुधवार का है। पहली शहरी मंगलवार की रात में है। माहे रमजान की जितनी फजीलत बयां की जाए कम है । कारी शमीम अहमद फरमाते हैं कि माहे रमजान में पांच वक्त की नमाज जमात के साथ अदा करें, रोजो का एहतमाम करें, हिसाब लगाकर जकात अदा करें, दिल लगाकर क़ुरआने करीम रोजाना पढ़ें, नवाफिल का एहतमाम ज्यादा से ज्यादा करें, तरावीह का खास एहतमाम करें, गरीबों, मकिस्कीनों का ध्यान रखें, पड़ोसियों को न सताए, मस्जिद में माक्स लगा कर आए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, अपनी औरतों को बेपर्दा होने से बचाएं, मोबाइल का बेजा इस्तेमाल ना करें, झूठ व गीबत (पीठ पीछे बुराई करना) की महफिलों से अपने आप को दूर रखें । ऐसा करने से रोजे के सवाब में कमी हो जाती है, अपनी निगाहों की हिफाजत करें।
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बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी जामा मस्जिद के इमाम-ओ-खतीब मौलाना वरीस अहमद ने कहा कि माहे रमजान के इस्तकबाल के लिए सबसे पहली चीज यह है कि इसकी अजमत का हर मुसलमान को अहसास हो, रमजान में नेकियों का सवाब बढ़ा दिया जाता है। एक नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर फर्जो के बराबर दिया जाता है। सभी प्रेम व भाईचारे तथा एक दूसरे के साथ मिल जुलकर रहे, पांचों वक्त नमाज में मुल्क में अमन-चैन व खुशहाली के लिए दुआ करें। कोरोना महामारी जैसी बीमारी के खात्मे के लिए अल्लाह से दुआएं मांगे। मस्जिद में हासिल होने से पहले मुंह पर मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
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