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सीएए और एनआरसी का डर, 40 साल बाद जन्म का सबूत लेने गांव लौटा रामअवतार
Mon, 16 Mar 2020 12:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2020 12:18 AM IST
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चंदक के गांव खुड़ाहेडी में चालीस वर्ष बाद पहुंचा रामअवतार।
- फोटो : अमर उजाला
अपनी नागरिकता का सबूत लेने के लिए घर छोड़कर गया एक व्यक्ति 40 साल बाद गांव पहुंचा। उसने गांव में आकर स्कूल से अपनी टीसी दिलवाने को कहा है। उसके आने से एक ओर जहां परिजन और ग्रामीण खुश हैं, वहीं वह स्कूल की टीसी लेकर तुरंत गुजरात जाना चाहता है। उसे अपनी नागरिकता का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए इन कागजातों की जरूरत पड़ी है।
थाना मंडावर के गांव खुड़ाहेड़ी निवासी स्व.लल्लू सिंह का पुत्र राम अवतार 1980 में परिजनों की किसी बात से नाराज होकर घर छोड़कर चला गया था। परिजनों ने रामअवतार की काफी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। रविवार को रामअवतार 40 साल बाद घर लौटा। वह गांव वालों से पता पूछकर अपने घर पहुंचा। भाई कृपाल सिंह ने उसे पहचान लिया। दोनों भाई एक दूसरे से लिपटकर खूब रोये। रामअवतार ने बाकी परिजनों से भी मुलाकात की।
उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गया था। वह बिजनौर से ट्रेन से दिल्ली और बाद में गुजरात पहुंच गया। वहां नरोडा में एक बेकरी पर दस साल तक काम करता रहा। इसके बाद वह गुजरात में ही मजदूरी करने लगा। वहीं उसकी जान पहचान के एक व्यक्ति ने उसकी शादी करा दी। उसके तीन बेटियां व दो बेटे हैं। उसके शहर में बाहर से आकर रहने वाले लोगों के पहचान पत्र देखे जा रहे हैं। उसके पास गुजरात में नागरिकता से जुड़ा कोई प्रमाण पत्र नहीं है। उसे अपने कागज बनवाने के लिए स्कूल की टीसी चाहिए। वह गांव के स्कूल में पढ़ा है, टीसी लेने के लिए ही वह गांव आया है।
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थाना मंडावर के गांव खुड़ाहेड़ी निवासी स्व.लल्लू सिंह का पुत्र राम अवतार 1980 में परिजनों की किसी बात से नाराज होकर घर छोड़कर चला गया था। परिजनों ने रामअवतार की काफी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। रविवार को रामअवतार 40 साल बाद घर लौटा। वह गांव वालों से पता पूछकर अपने घर पहुंचा। भाई कृपाल सिंह ने उसे पहचान लिया। दोनों भाई एक दूसरे से लिपटकर खूब रोये। रामअवतार ने बाकी परिजनों से भी मुलाकात की।
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उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गया था। वह बिजनौर से ट्रेन से दिल्ली और बाद में गुजरात पहुंच गया। वहां नरोडा में एक बेकरी पर दस साल तक काम करता रहा। इसके बाद वह गुजरात में ही मजदूरी करने लगा। वहीं उसकी जान पहचान के एक व्यक्ति ने उसकी शादी करा दी। उसके तीन बेटियां व दो बेटे हैं। उसके शहर में बाहर से आकर रहने वाले लोगों के पहचान पत्र देखे जा रहे हैं। उसके पास गुजरात में नागरिकता से जुड़ा कोई प्रमाण पत्र नहीं है। उसे अपने कागज बनवाने के लिए स्कूल की टीसी चाहिए। वह गांव के स्कूल में पढ़ा है, टीसी लेने के लिए ही वह गांव आया है।
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