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Bijnor News: आर्थिक और स्वास्थ्य का सुधार करेगी सरसों की पूसा 33 नई प्रजाति

Sun, 21 Sep 2025 11:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Sun, 21 Sep 2025 11:51 PM IST
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Pusa 33 new variety of mustard will improve economic and health
नगीना कृषि विज्ञान केंद्र में खडी पूसा सरसों- 33 की फसल। फाइल फोटो
बिजनौर। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना में पिछले वर्ष सरसों की नई प्रजाति पूसा 33 का परीक्षण हुआ। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रजाति ने 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से उत्पादन दिया है। वैसे इसका उत्पादन 25 क्विंटल तक निकल जाएगा। इस प्रजाति में इरुसिक एसिड की मात्रा 2 प्रतिशत से कम और ग्लूकोसाइनोलेट 30 पीपीएम से कम है। जोकि मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह प्रजाति किसानों की आर्थिक एवं स्वास्थ्य दोनों की स्थिति में सुधार करेगी।
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वर्तमान समय में सरसों की बुवाई का कार्य शुरू हो रहा है। जिले में काफी किसान शरदकालीन गन्ना बुवाई के बीच में, गेहूं की फसल के साथ और अकेली भी सरसों की बुवाई करते हैं। बुवाई करने से पहले किसानों को ऐसी प्रजाति का चयन करना चाहिए। जिस प्रजाति से किसान को अधिक उत्पादन प्राप्त हो एवं मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रहे। नगीना के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि वैज्ञानिकों ने सरसों की नई प्रजाति पूसा सरसों 33 का परीक्षण कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषकों के प्रक्षेत्र पर करवाया। बताया कि इस प्रजाति की उच्च तेल मात्रा और सफेद रतुआ रोग से लड़ने की क्षमता है। इस कारण यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है।
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किसानों के खेतों में कराया जाएगा प्रदर्शन
वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि इस प्रजाति का उत्पादन अच्छा है। इस प्रजाति को डबल जीरो मस्टर्ड भी कहते हैं। इस प्रजाति की फसल अवधि 140-145 दिन की है। इस वर्ष इस प्रजाति का प्रदर्शन किसानों के खेत पर करवाया जाएगा।
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क्षेत्रफल बढ़ाने को बांटी जाएंगी सरसों बीज की मिनीकिट
उप कृषि निदेशक डॉ. धनश्याम वर्मा ने बताया कि जनपद में सरसों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को विभिन्न उन्नत प्रजाति की मिनीकिट नि:शुल्क वितरण की जाएंगी। इच्छुक किसान विभाग की वेबसाइट पर मिनी किट प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराएं।

आर्थिक लाभ

-पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-33 में तेल की मात्रा अधिक है, इससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

-यह सफेद रतुआ रोग प्रतिरोधी है, जो फसल को नुकसान होने से बचाता है और किसानों की आय बढ़ाता है।
-इस किस्म से कम समय में अधिक पैदावार होती है, जो किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है।
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