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जेडी के खाने के बिल को लेकर खींचतान
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जेडी के खाने के बिल को लेकर खींचतान
बिजनौर। जिले में कोरोना के नोडल अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डाक्टर अनिल मिश्रा के खाने के बिल को लेकर अभी तक खींचतान चल रही है। डाक्टर अनिल मिश्रा का कहना है कि नाश्ते और खाने का बिल 34500 रुपये देखकर वह आहत हैं। जबकि सीएमओ का कहना है कि उन्होंने कोई बिल जेडी के पास नहीं भिजवाया, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
जेडी डा. अनिल मिश्र ने बताया कि वह चार अप्रैल से जनपद में हैं। केवल 15 दिन के नाश्ते और खाने के 34500 रुपये की बिलिंग देखकर वह काफी आहत हुए। वह शुद्ध शाकाहारी हैं। उनके साथ में महानिदेशालय से एक चालक भी उनके साथ है, वह भी शाकाहारी है। लॉकडाउन में दोनों के खाने की व्यवस्था मुख्य चिकित्साधिकारी के स्तर से की जानी थी। जेडी का आरोप है कि करीब 15 दिन पहले एक कैटर्स आया। उसने कहा कि उन दोनों के 15 दिन के खाने का यह बिल मुख्य चिकित्साधिकारी ने भिजवाया है। वह उस बिल पर हस्ताक्षर कर दें तो सीएमओ उस बिल का भुगतान कर देंगे। लेकिन उन्होंने बिल को अस्वीकर करते हुए हस्ताक्षर नहीं किए। इसकी जानकारी जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय को दी। फिलहाल डीएम स्तर से ही उनके नाश्ते और खाने की व्यवस्था की जा रही है।
इस मामले में सीएमओ विजय कुमार यादव का कहना है कि न तो उन्होंने यह बिल संयुक्त निदेशक के पास भिजवाया और न ही उन्हें इस बारे में मालूम है कि यह बिल किसने जेडी के पास भिजवाया और क्यों।
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बिजनौर। जिले में कोरोना के नोडल अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डाक्टर अनिल मिश्रा के खाने के बिल को लेकर अभी तक खींचतान चल रही है। डाक्टर अनिल मिश्रा का कहना है कि नाश्ते और खाने का बिल 34500 रुपये देखकर वह आहत हैं। जबकि सीएमओ का कहना है कि उन्होंने कोई बिल जेडी के पास नहीं भिजवाया, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
जेडी डा. अनिल मिश्र ने बताया कि वह चार अप्रैल से जनपद में हैं। केवल 15 दिन के नाश्ते और खाने के 34500 रुपये की बिलिंग देखकर वह काफी आहत हुए। वह शुद्ध शाकाहारी हैं। उनके साथ में महानिदेशालय से एक चालक भी उनके साथ है, वह भी शाकाहारी है। लॉकडाउन में दोनों के खाने की व्यवस्था मुख्य चिकित्साधिकारी के स्तर से की जानी थी। जेडी का आरोप है कि करीब 15 दिन पहले एक कैटर्स आया। उसने कहा कि उन दोनों के 15 दिन के खाने का यह बिल मुख्य चिकित्साधिकारी ने भिजवाया है। वह उस बिल पर हस्ताक्षर कर दें तो सीएमओ उस बिल का भुगतान कर देंगे। लेकिन उन्होंने बिल को अस्वीकर करते हुए हस्ताक्षर नहीं किए। इसकी जानकारी जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय को दी। फिलहाल डीएम स्तर से ही उनके नाश्ते और खाने की व्यवस्था की जा रही है।
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इस मामले में सीएमओ विजय कुमार यादव का कहना है कि न तो उन्होंने यह बिल संयुक्त निदेशक के पास भिजवाया और न ही उन्हें इस बारे में मालूम है कि यह बिल किसने जेडी के पास भिजवाया और क्यों।
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