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कोरोना वायरस को हराने को जनता कर्फ्यू को जनता का अभूतपूर्व समर्थन

Mon, 23 Mar 2020 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2020 12:06 AM IST
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Public support for public curfew unprecedented
जनता कर्फ्यू को जनता का अभूतपूर्व समर्थन
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बिजनौर। कोरोना वायरस को हराने के लिए पूरा जिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता कर्फ्यू की अपील के साथ खड़ा नजर आया। जिलेवासियों ने जनता कर्फ्यू को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। जनता ने कोरोना को हराने के लिए घरों पर रहकर ही मोर्चा संभाला। क्या बाजार, क्या गली मोहल्ले और क्या गांव सभी ने जनता कर्फ्यू में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। जनता कर्फ्यू ने राजनीतिक व धार्मिक संगठनों द्वारा बुलाए जाने वाले भारत बंद को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया। जिलेवासियों ने दिखा दिया कि अपने देश, समाज और परिवार की सुरक्षा के लिए वे हर तरह से तैयार हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि जनता कर्फ्यू की अपील के बाद दो दिन से जिले की मंडियों और बाजार में उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी। सभी ने जरूरी सामान घर पर ही स्टाक कर लिया था। उपभोक्ताओं की भीड़ को देखकर लग रहा था कि जिलेवासी कहीं जनता कर्फ्यू को कहीं विफल न कर दें। लोग दुकानों से जरूरी सामान लेने या दूध लेने के लिए बहुत सवेरे निकल गए थे। सभी हर हाल में सात बजे से पहले ही घर आ गए। इसके बाद जनता कर्फ्यू को सफल बनाने में पूरी जनता लग गई। बाजार में एक भी दुकान नहीं खुली। बाजार तो बाजार गली मोहल्लों में भी दुकान नहीं खुलीं। बाजार में पुलिसकर्मियों के अलावा एक दो राहगीर ही दिखे। उन्हें भी पुलिस ने समझा बुझाकर घर भेज दिया। सोशल मीडिया पर जनता कर्फ्यू को सफल करने के संदेश देने की बाढ़ से आ गई। सोशल मीडिया पर रविवार को जनता ने एक दूसरे को गुड मॉर्निंग या सुप्रभात के संदेश देने के बजाए जनता कर्फ्यू को सफल करने की अपील की। टीवी पर देश भर की खबरों को देखते रहे। बच्चे भी घरों पर ही रहे। परिजनों ने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया। छोटे बच्चों को भी घरों में ही खेल में लगाए रहे। फोन पर एक-दूसरे से घरों से बाहर न निकलने की अपील करते रहे।
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खेतों से जल्दी आए किसान
जनता कर्फ्यू को किसानों ने जितना समर्थन दिया उतना आज तक किसी भी आंदोलन को नहीं दिया। किसान सवेरे पांच बजे से ही खेतों पर जाना शुरू हो गए थे। पशुओं के लिए जरूरी चारा करके किसान पांच साढ़े सात आठ बजे तक ही घर आ गए। जबकि किसान होली व दीपावली जैसे त्यौहार पर भी पूरा पूरा दिन खेत में ही निकाल देते हैं। किसानों ने चारा काटकर पशुओं को डाला और उसके बाद घरों पर ही बैठकर आराम किया।
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मोहल्ले रहे सुनसान
मोहल्लों में जनता कर्फ्यू को पूरा समर्थन दिया। घनी आबादी वाले मुस्लिम मोहल्लों में भी सड़कें खाली पड़ी रहीं। सड़क पर कोई नजर नहीं आया। दुकानें भी बंद रहीं। बच्चे भी घरों में ही रहे।
मुस्तैद रही पुलिस
जनता कर्फ्यू के बीच पुलिसकर्मी पूरी तरह मुस्तैद रहे। चौराहों पर जगह जगह पुलिसकर्मी तैनात रहे। पुलिसकर्मी गाड़ियों में कांबिंग भी करते रहे। अगर कोई घर से बाहर निकला तो उसे भी घर जाने के लिए कहा। अगर कोई किसी मेडिकल इमरजेंसी की वजह से निकला तो उसे पुलिसकर्मियों ने नहीं रोका। गाड़ियों से भी पुलिस फ्लैग मार्च करती रही।
थम गए मिलों के चक्के
जनता कर्फ्यू में मिलों के चक्के भी थम गए। मिलों में कोई किसान गन्ना लेकर नहीं आया। यहां तक कि गन्ना क्रय केंद्रों पर भी तौल नहीं हुई। सभी चीनी मिलों में नो केन की स्थिति रही। मिलों में कर्मचारी भी बहुत कम आए।

मंडी रही सुनसान
दो दिन से सब्जी, फल व अनाज मंडी में उपभोक्ताओं की भीड़ लग रही थी। रविवार को यहां पर नजारा अलग ही दिखा। रविवार को तीनों मंडी पूरी तरह बंद रहीं। महीने के आखिरी दिन तीनों मंडी की बंदी रहती है। उस दिन भी एक दो व्यापारी दुकानों पर आ ही जाते हैं। लेकिन रविवार को वहां कोई नहीं आया। जिस मंडी की तंग सड़क पर रिक्शा तक निकलना मुश्किल होता है वहां सड़क पर ट्रक खड़ा था।
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