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प्रचार करें या रोकें, असमंजस में उम्मीदवार

Sun, 21 Mar 2021 11:23 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 11:23 PM IST
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Promote or stop, candidates in dilemma
प्रचार करें या रोकें, असमंजस में उम्मीदवार
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बिजनौर। त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया शुरू होने का एक माह 20 मार्च को पूरा हो गया है। परंतु आरक्षण प्रक्रिया की धुंध साफ होती नहीं दिख रही है। अब आरक्षण प्रक्रिया का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इससे दावेदारों की आरक्षण को लेकर सांस अटक गई हैं। सभी की निगाह सुप्रीम फैसले पर हैं। फिलहाल दावेदारों ने चुनाव की तैयारी रोक दी है।
त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया 20 फरवरी को शुरू हुई थी। तब प्रधान पद के लिए पंचायतों का आरक्षण वर्ष 1995 को आधार मानकर किया गया था। जिले की 1123 पंचायतों में 640 पंचायत प्रधान के लिए विभिन्न श्रेणी में आरक्षित हुई थी। आरक्षण पर आई आपत्तियों के निस्तारण के बाद 14 मार्च को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होना था। इस बीच 12 मार्च को न्यायालय के आदेश पर आरक्षण सूची के प्रकाशन समेत चुनाव संबंधी अगली प्रक्रिया रोक दी गई।
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न्यायालय के आदेश पर वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर प्रधान पद को आरक्षण की नई प्रक्रिया 17 मार्च को शुरू हुई थी। 20 मार्च को आरक्षण की अनंतिम आरक्षण सूची जारी हो गई है। नई आरक्षण प्रक्रिया से आरक्षण में बड़ा उलटफेर हुआ है। आरक्षण सूची को देखने के लिए दावेदारों व उनके समर्थकों की ब्लाकों व डीपीआरओ दफ्तर पर भीड़ थी। इस बीच देर शाम दावेदारों को झटका देने वाली खबर आई। खबर के मुताबिक वर्ष 2015 के आधार पर किए गए आरक्षण के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट याचिका दायर की गई है।
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रविवार को गांवों की चौपालों व घेर में आरक्षण को लेकर एक बार फिर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। लोग आगे क्या होगा इस पर कयासबाजी कर रहे हैं। कुछ दावेदार आरक्षण को लेकर अपने वकीलों से मशविरा ले रहे हैं। जिन दावेदारों की पंचायत वर्ष 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षित हो गई थी, उन्हें सुप्रीम कोर्ट से करिश्मा होने की उम्मीद है। वर्ष 2015 के आधार पर जिन पंचायतों के दावेदारों को आरक्षण का लाभ हुआ है, उन्हें आरक्षण सूची प्रकाशित होने से पहले आरक्षण पर फिर स्टे आने का डर सता रहा है। लोग 24 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव होने पर संशय जाहिर कर रहे हैं।
सही व सटीक फैसले होने चाहिए
वयोवृद्ध चौधरी हुक्म सिंह हल्दौर ब्लॉक की बड़ी पंचायतों में एक नांगल एक के प्रधान रह चुके हैं। पंचायत, सहकारिता व गन्ने के विभिन्न पदों पर चेयरमैन रह चुके हैं। वे कहते हैं कि पहले प्रधान पंचायत का सबसे बड़ा सेवादार माना जाता था। प्रधान के चुनाव में सेवा मूल भावना थी। परंतु अब ऐसा नहीं है। शासन से पंचायतों में विकास के लिए खूब पैसा आ रहा है। परंतु जमीनी हकीकत सभी जानते हैं। पैसे का खेल हो रहा है। सभी सरकार अपनी राजनीतिक खेती को लहलाने के लिए निर्णय लेती है। त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण संवेदनशील मामला है। इस पर सही व सटीक फैसला होना चाहिए।

15 आपत्ति दर्ज कराई गई
बिजनौर। त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण पर आपत्ति दर्ज करने का 21 मार्च रविवार पहला दिन था। डीपीआरओ दफ्तर के अनुसार पहले दिन प्रधान पद पर 13 तथा जिला पंचायत सदस्य पद पर दो आपत्ति दर्ज कराई गई है। कुल 15 आपत्ति है। आपत्ति 22 मार्च व 23 मार्च को भी दर्ज होंगी। बताया कि रविवार होने पर भी आपत्ति कर्ता सुबह ही आ गए थे। कुछ लोग अपने वकील लेकर आए थे। आज सोमवार को आपत्तियों की संख्या बढ़ सकती है।
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