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खादर को कटान से निजात की जगी आस
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डेढ़ दशक बाद मिली परियोजना को मंजूरी
बिजनौर। गंगा किनारे बसे जिले के किसानों को कटान से राहत मिलने की उम्मीद बंधी है। कटान निरोधी कार्य की 61 करोड़ लागत की परियोजना को प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब डेढ़ दशक बाद यह परियोजना मंजूर हुई है। दो बार परियोजना की फाइल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली समिति ने ही रिजेक्ट कर दिया था। अब इस परियोजना को गंगा के कटान से पूरे देश में परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली गंगा फ्लड कंट्रोल सेल के आगे रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने पर नाबार्ड से रुपया मिल जाएगा।
खादर क्षेत्र में गंगा हर साल बरसात में गंगा की धारा तबाही मचाती है। गंगा की तेज धारा में कई गांव कटकर बह चुके हैं। इन गांवों के परिवार दूसरे गांवों में बसे हैं। वहीं जो परिवार गंगा की चपेट में आने से बच गए अब वे हर साल गंगा के कटान के चलते गंगा के नजदीक आते जा रहे हैं। गांव वालों का दावा है कि गंगा के कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का आज तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। गंगा किनारे कटान निरोधी कार्य कराने के लिए गंगा किनारे बसे गांव वालों ने एक महीने से ज्यादा समय तक आंदोलन भी किया था। किसानों ने परिवार की महिलाओं व बच्चों सहित गंगा की धारा में खड़े होकर धरना दिया था। उनका कहना है कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। वे धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। गंगा के कटान से निजात दिलाने को कटान निरोधी कार्य की परियोजना काफी पहले साल 2004 में बन चुकी थी। साल 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने खादर में बाढ़ का हवाई दौरा किया था। उन्होंने बाढ़ राहत कार्य की फाइल भी तलब कर ली थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी कई बार मिली, लेकिन इसके बाद मामला अटका रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहले जल शक्ति मंत्रालय था, तब भी कटान निरोधी 61 करोड़ की परियोजना को दो बार मंजूरी नहीं मिली। पिछले साल मुख्यमंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय डा.महेंद्र सिंह को सौंपा। मंत्री डा.महेंद्र सिंह ने कटान निरोधी परियोजना को मंजूरी दे दी है।
ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं।
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ऐसे मिलती है मंजूरी
शासन द्वारा कई समितियों की मंजूरी मिलने के बाद मंत्रालय के मंत्री के आगे जाती है। वहां से मंजूरी मिलने पर फाइल गंगा फ्लड कंट्रोल सेल पटना कार्यालय में जाती है। गंगा से कटान रोकने के लिए पूरे देश में बनने वाली बड़ी परियोजना यहीं से मंजूर होती हैं। यहां पर मंजूरी मिलने के बाद नाबार्ड या प्रदेश सरकार द्वारा रुपया जारी कर दिया जाता है।
दशकों का मुद्दा है कटान
गंगा से कटान दशकों से मुद्दा बन रहा है, लेकिन इसे कोई मंजूरी नहीं मिली। नेताओं ने अगर कोशिश भी की तो शासन में जाकर मामला अटक जाता था। हर बार परियोजना अस्वीकृत होती रही।
पटना गई फाइल
अफजलगढ़ सिंचाई खंड के एक्सईएन रामबाबू के अनुसार योजना को प्रदेश सरकार से मंजूरी मिल गई है। अब यह फाइल पटना कार्यालय चली गई है। वहीं से इसे मंजूरी मिलेगी।
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बिजनौर। गंगा किनारे बसे जिले के किसानों को कटान से राहत मिलने की उम्मीद बंधी है। कटान निरोधी कार्य की 61 करोड़ लागत की परियोजना को प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब डेढ़ दशक बाद यह परियोजना मंजूर हुई है। दो बार परियोजना की फाइल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली समिति ने ही रिजेक्ट कर दिया था। अब इस परियोजना को गंगा के कटान से पूरे देश में परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली गंगा फ्लड कंट्रोल सेल के आगे रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने पर नाबार्ड से रुपया मिल जाएगा।
खादर क्षेत्र में गंगा हर साल बरसात में गंगा की धारा तबाही मचाती है। गंगा की तेज धारा में कई गांव कटकर बह चुके हैं। इन गांवों के परिवार दूसरे गांवों में बसे हैं। वहीं जो परिवार गंगा की चपेट में आने से बच गए अब वे हर साल गंगा के कटान के चलते गंगा के नजदीक आते जा रहे हैं। गांव वालों का दावा है कि गंगा के कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का आज तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। गंगा किनारे कटान निरोधी कार्य कराने के लिए गंगा किनारे बसे गांव वालों ने एक महीने से ज्यादा समय तक आंदोलन भी किया था। किसानों ने परिवार की महिलाओं व बच्चों सहित गंगा की धारा में खड़े होकर धरना दिया था। उनका कहना है कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। वे धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। गंगा के कटान से निजात दिलाने को कटान निरोधी कार्य की परियोजना काफी पहले साल 2004 में बन चुकी थी। साल 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने खादर में बाढ़ का हवाई दौरा किया था। उन्होंने बाढ़ राहत कार्य की फाइल भी तलब कर ली थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी कई बार मिली, लेकिन इसके बाद मामला अटका रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहले जल शक्ति मंत्रालय था, तब भी कटान निरोधी 61 करोड़ की परियोजना को दो बार मंजूरी नहीं मिली। पिछले साल मुख्यमंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय डा.महेंद्र सिंह को सौंपा। मंत्री डा.महेंद्र सिंह ने कटान निरोधी परियोजना को मंजूरी दे दी है।
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ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं।
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ऐसे मिलती है मंजूरी
शासन द्वारा कई समितियों की मंजूरी मिलने के बाद मंत्रालय के मंत्री के आगे जाती है। वहां से मंजूरी मिलने पर फाइल गंगा फ्लड कंट्रोल सेल पटना कार्यालय में जाती है। गंगा से कटान रोकने के लिए पूरे देश में बनने वाली बड़ी परियोजना यहीं से मंजूर होती हैं। यहां पर मंजूरी मिलने के बाद नाबार्ड या प्रदेश सरकार द्वारा रुपया जारी कर दिया जाता है।
दशकों का मुद्दा है कटान
गंगा से कटान दशकों से मुद्दा बन रहा है, लेकिन इसे कोई मंजूरी नहीं मिली। नेताओं ने अगर कोशिश भी की तो शासन में जाकर मामला अटक जाता था। हर बार परियोजना अस्वीकृत होती रही।
पटना गई फाइल
अफजलगढ़ सिंचाई खंड के एक्सईएन रामबाबू के अनुसार योजना को प्रदेश सरकार से मंजूरी मिल गई है। अब यह फाइल पटना कार्यालय चली गई है। वहीं से इसे मंजूरी मिलेगी।