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मूल्य नहीं बढ़ने से किसान हताश
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:26 AM IST
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बिजनौ में तीन साल बाद भी बासमती चावल पर निर्यात की रोक हटने के बाद भी किसानों को इसका कोई खास फायदा होता दिखाई नहीं दे रहा है। बाजार में चावल के दाम तीन साल पहले के बराबर भी नहीं हैं। दामों में बढ़ोतरी नहीं होना किसानों के लिए हताशा भरा है।
जिले में पहले बासमती चावल प्रमुखता से पैदा किया जाता है। इंडोनेशिया के अलावा खाड़ी के बाकी देशों में इस चावल की बहुत डिमांड होती थी। बासमती चावल की कुछ प्रजातियों का मूल्य दस हजार रुपये प्रति क्विंटल तक होता था। बाजार में बासमती के मूल्य 40 प्रतिशत तक घट गए थे। इस साल केंद्र सरकार द्वारा बासमती चावल के निर्यात पर लगी रोक हटा दी थी। इससे बासमती की खेती करने वाले किसानों का रुझान भी फिर से इसकी खेती की ओर किया। निर्यात खुलने के बाद भी बासमती के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। भाकियू जिलाध्यक्ष रामौतार सिंह के मुताबिक चावल के दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। चावल खरीदने के लिए क्रय केंद्र तक अभी नहीं खोले गए हैं।
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जिले में पहले बासमती चावल प्रमुखता से पैदा किया जाता है। इंडोनेशिया के अलावा खाड़ी के बाकी देशों में इस चावल की बहुत डिमांड होती थी। बासमती चावल की कुछ प्रजातियों का मूल्य दस हजार रुपये प्रति क्विंटल तक होता था। बाजार में बासमती के मूल्य 40 प्रतिशत तक घट गए थे। इस साल केंद्र सरकार द्वारा बासमती चावल के निर्यात पर लगी रोक हटा दी थी। इससे बासमती की खेती करने वाले किसानों का रुझान भी फिर से इसकी खेती की ओर किया। निर्यात खुलने के बाद भी बासमती के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। भाकियू जिलाध्यक्ष रामौतार सिंह के मुताबिक चावल के दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। चावल खरीदने के लिए क्रय केंद्र तक अभी नहीं खोले गए हैं।
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