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Bijnor News: धरती की चमक बचाने के लिए कार्बेट के वनों में शोध की तैयारी
Sun, 12 Oct 2025 12:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:46 AM IST
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कालागढ़। वर्तमान भौतिक जीवन शैली से धरती की प्राकृतिक रोशनी लुप्त होने के कगार पर है। प्राकृतिक रोशनी को बचाने के लिए कार्बेट के वनों में पार्क प्रशासन शोध की तैयारी कर रहा है।
वर्तमान बदलते परिवेश, जीवन जीने के तरीके में आए परिवर्तन से धरती की चमक पर भी असर पड़ रहा है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में प्राकृतिक रोशनी के स्रोत को बचाने के लिए चिंता होने लगी है। देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसकी सुध ली है। पर्यावरण में कम होते लाभकारी कीट पतंगों की कमी से धरती की प्राकृतिक रोशनी कम हो रही है। जुगनू, तितली, भभीरी या ड्रैगन कीट आदि वर्तमान परिवेश में लुप्त होते जा रहे हैं।
रामगंगा नदी व प्राकृतिक स्रोतों के आसपास के जंगल विशेष निगरानी में हैं। जिसको लेकर प्रकृति, कीट विज्ञानी चिंता में हैं। कालागढ़ के वन अधिकारी बिंदरपाल का कहना है कि वनों में रात का वातावरण खास होता है। महकती वनस्पति और जुगनू इसे खास बनाते हैं। जीवन की सांसों को बढ़ाते हैं।
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विश्वविद्यालयों के कीट विज्ञानियों के संपर्क में पार्क प्रशासन : कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा. साकेत बड़ोला का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग, प्रकाश प्रदूषण, वनों में कम होती नमी, रसायनों के खेतों में हो रहे उपयोग ने प्राकृतिक रोशनी बिखरने वाले कीटों पर असर डाला है। इसे कैसे बचाया जाए, एक बड़ी चुनौती है। कार्बेट के जंगलों में 2026 में इन्हें बचाने के लिए शोध किया जाएगा। अनेक विश्वविद्यालयों के कीट विज्ञानियों से संपर्क किया जा रहा है।
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वर्तमान बदलते परिवेश, जीवन जीने के तरीके में आए परिवर्तन से धरती की चमक पर भी असर पड़ रहा है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में प्राकृतिक रोशनी के स्रोत को बचाने के लिए चिंता होने लगी है। देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसकी सुध ली है। पर्यावरण में कम होते लाभकारी कीट पतंगों की कमी से धरती की प्राकृतिक रोशनी कम हो रही है। जुगनू, तितली, भभीरी या ड्रैगन कीट आदि वर्तमान परिवेश में लुप्त होते जा रहे हैं।
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रामगंगा नदी व प्राकृतिक स्रोतों के आसपास के जंगल विशेष निगरानी में हैं। जिसको लेकर प्रकृति, कीट विज्ञानी चिंता में हैं। कालागढ़ के वन अधिकारी बिंदरपाल का कहना है कि वनों में रात का वातावरण खास होता है। महकती वनस्पति और जुगनू इसे खास बनाते हैं। जीवन की सांसों को बढ़ाते हैं।
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विश्वविद्यालयों के कीट विज्ञानियों के संपर्क में पार्क प्रशासन : कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा. साकेत बड़ोला का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग, प्रकाश प्रदूषण, वनों में कम होती नमी, रसायनों के खेतों में हो रहे उपयोग ने प्राकृतिक रोशनी बिखरने वाले कीटों पर असर डाला है। इसे कैसे बचाया जाए, एक बड़ी चुनौती है। कार्बेट के जंगलों में 2026 में इन्हें बचाने के लिए शोध किया जाएगा। अनेक विश्वविद्यालयों के कीट विज्ञानियों से संपर्क किया जा रहा है।