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Bijnor News: वन्य जीवों की सुरक्षा को ऑपरेशन मानसून की तैयारी
Thu, 19 Jun 2025 11:30 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 19 Jun 2025 11:30 PM IST
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बरसात के मौसम में वन क्षेत्र में तस्करों और शिकारियों के प्रवेश की रहती है आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। वर्षाकाल में वन्यजीवों की सुरक्षा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। वन्यजीवों को तस्करों एवं शिकारियों से बचाने के लिए ऑपरेशन मानसून की कवायद शुरू हो गई है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में वर्षाकाल में वन्यजीव तस्करों एवं शिकारियों के वनों में प्रवेश की आशंका बढ़ जाती है। कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की उत्तरी सीमा से लगा है। कालागढ़ उपखंड के ढेला, झिरना, कालागढ़ व मोरघाटी रेंज आबादी से लगे होने के कारण संवेदनशील हैं।
कार्बेट के साथ अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी बिंदरपाल का कहना है कि कार्बेट के साथ अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के वनों व वन्यजीवों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के वन विभाग के साथ संयुक्त गश्त दोनों राज्यों की सीमा पर की जाएगी।
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इसके लिए दोनों ही विभागों का समन्वय बनाने पर विचार हो रहा है। वनों की चौकियों का निरीक्षण कर अधीनस्थ वन क्षेत्राधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। फ्लैग मार्च आदि किए जाएंगे। बाघ बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां वर्षाकाल में संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। वर्षाकाल में वन्यजीवों की सुरक्षा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। वन्यजीवों को तस्करों एवं शिकारियों से बचाने के लिए ऑपरेशन मानसून की कवायद शुरू हो गई है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में वर्षाकाल में वन्यजीव तस्करों एवं शिकारियों के वनों में प्रवेश की आशंका बढ़ जाती है। कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की उत्तरी सीमा से लगा है। कालागढ़ उपखंड के ढेला, झिरना, कालागढ़ व मोरघाटी रेंज आबादी से लगे होने के कारण संवेदनशील हैं।
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कार्बेट के साथ अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी बिंदरपाल का कहना है कि कार्बेट के साथ अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के वनों व वन्यजीवों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के वन विभाग के साथ संयुक्त गश्त दोनों राज्यों की सीमा पर की जाएगी।
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इसके लिए दोनों ही विभागों का समन्वय बनाने पर विचार हो रहा है। वनों की चौकियों का निरीक्षण कर अधीनस्थ वन क्षेत्राधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। फ्लैग मार्च आदि किए जाएंगे। बाघ बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां वर्षाकाल में संवेदनशीलता बढ़ जाती है।