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लैब तक डाकिए पहुंचाएंगे टीबी रोगियों के सैंपल बिजनौर
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लैब तक डाकिये पहुंचाएंगे टीबी रोगियों के सैंपल
बिजनौर। टीबी मरीजों के सैंपल जांच के लिए लैब तक डाकिए पहुंचाएंगे। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर बीएस रावत के अनुसार अभी तक सैंपल कोरियर के माध्यम से भेजे जाते थे। सैंपल देर से पहुंचते थे और जांच रिपोर्ट में काफी समय लग जाता था। सैंपल जांच के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित टीबी अस्पताल के अलावा मेडिकल कॉलेज मेरठ और अलीगढ़ की लैबोरेटरी में भेेजे जाते हैं।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी रोगियों की पहचान के लिए संदिग्ध रोगियों के सैंपल जिला टीबी अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समीपुर तथा धामपुर भेजे जाते हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि सरकार टीबी को समूल नष्ट करने के लिए तरह तरह के प्रयास कर रही है। इसके लिए सीबीनॉट मशीनें लगी हैं। टीबी अस्पताल बिजनौर, नजीबाबाद और धामपुर में सीबीनॉट मशीन की स्थापना करीब दो साल पहले की गई थी। उन्होंने बताया कि सीबीनॉट मशीनों से टीबी का पता चलता है। इसके बाद रिफेंपिसिन नामक प्रथम लाइन की दवाई से पता लगाते हैं कि वह कारगर है अथवा नहीं। रिफेंपिसिन रजिस्टेंट कारगर नहीं है तो फिर सैंपल जांच के लिए अलीगढ़ भेजा जाता है। पहले यह सैंपल पहुंचने में ही तीन से चार दिन लगते थे। इस कारण जांच आने में लगभग सप्ताह भर ही निकल जाता था। लेकिन अब 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट आएंगी।
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बिजनौर। टीबी मरीजों के सैंपल जांच के लिए लैब तक डाकिए पहुंचाएंगे। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर बीएस रावत के अनुसार अभी तक सैंपल कोरियर के माध्यम से भेजे जाते थे। सैंपल देर से पहुंचते थे और जांच रिपोर्ट में काफी समय लग जाता था। सैंपल जांच के लिए जिला मुख्यालय पर स्थित टीबी अस्पताल के अलावा मेडिकल कॉलेज मेरठ और अलीगढ़ की लैबोरेटरी में भेेजे जाते हैं।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी रोगियों की पहचान के लिए संदिग्ध रोगियों के सैंपल जिला टीबी अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समीपुर तथा धामपुर भेजे जाते हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि सरकार टीबी को समूल नष्ट करने के लिए तरह तरह के प्रयास कर रही है। इसके लिए सीबीनॉट मशीनें लगी हैं। टीबी अस्पताल बिजनौर, नजीबाबाद और धामपुर में सीबीनॉट मशीन की स्थापना करीब दो साल पहले की गई थी। उन्होंने बताया कि सीबीनॉट मशीनों से टीबी का पता चलता है। इसके बाद रिफेंपिसिन नामक प्रथम लाइन की दवाई से पता लगाते हैं कि वह कारगर है अथवा नहीं। रिफेंपिसिन रजिस्टेंट कारगर नहीं है तो फिर सैंपल जांच के लिए अलीगढ़ भेजा जाता है। पहले यह सैंपल पहुंचने में ही तीन से चार दिन लगते थे। इस कारण जांच आने में लगभग सप्ताह भर ही निकल जाता था। लेकिन अब 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट आएंगी।
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