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बिजनौर : गुलदार सुलभ क्या हुआ, इंसानों का जीना दुर्लभ हो गया

Thu, 31 Aug 2023 12:05 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Aug 2023 12:05 AM IST
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Possible dengue patient found in Nagina
अफजलगढ़ के गांव महसनपुर में पिंजरे में कैद गुलदार। स्रोत वन विभाग।
-20 बड़े गुलदार और 09 शावक आठ माह में पकड़े
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-15 इंसानों की जान गुलदार के हमलों में इस साल गई
-25 से ज्यादा जिलों के वन अफसर डाले हुए हैं डेरा


रजनीश त्यागी

बिजनौर। यह पूरा ही साल गुलदार के नाम रहा, फिर चाहे गुलदार पकड़े जाने की बात हो या गुलदार के हमलों में इंसानों की जान जाना। इस साल 29 बड़े-छोटे गुलदार पकड़े गए, वहीं 15 लोगों ने अपनी जान इनके हमलों में गवां दी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर बिजनौर में इतने गुलदार कहां से आए और हमलावर क्यों हुए। वन्य जीव विशेषज्ञ इसका जवाब दे रहे हैं कि घटते जंगल, बाढ़ और बारिश से गुलदार गन्ने के खेतों तक पहुंच गए। वहीं, इनके व्यवहार में आए बदलाव ने इन्हें हमलावर बना दिया। अनुमान तो यहां तक है कि 400 से ज्यादा गुलदार इस समय जिले के गन्ने के खेतों में घूम रहे हैं।
बिजनौर में गुलदार तो बहुत पहले से हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या और हमले दोनों ही एक साथ बढ़ गए। पिछले आठ माह में ही 15 लोगों की जान गुलदार के हमलों में जा चुकी है। वहीं 20 बड़े गुलदार और 09 शावक पकड़े जा चुके हैं।
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जंगल के गुलदार से उल्टा है गन्ने के गुलदार का व्यवहार: जोएल लाएल
बिजनौर। जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर और वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लाएल बिजनौर में बढ़ते हमलों और संख्या के लिए इनके व्यवहार को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि बिजनौर में गुलदार दशकों से रह रहे हैं, लेकिन अब इनकी संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। इसे लेकर इनका व्यवहार जिम्मेदार है। गुलदार से जुड़े सवालों के उन्होंने अनुभव और शोध लिहाज से जबाव दिए....
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-सवाल:
बिजनौर में गुलदार कब से हैं और कितने थे
जबाव:
मैं जब छोटा था तो वर्ष 1950 में मेरे पिता जी मुझे दारानगर गंज की ओर ले घुमाने ले गए थे। मुझे याद है, तब मैंने यहां पर भी गुलदार देखे थे। उस समय हिरण, पाड़े, सांभर, नीलगाय बहुत थी, अब कम हो गई हैं।
सवाल: अचानक जिले में गुलदार कहां से आए गए
जबाव: जिले की सीमा कार्बेट पार्क और अमानगढ़ से लगती है। इस साल बाढ़ और बारिश का असर रिजर्व फॉरेस्ट में ज्यादा रहा। यह जानवर पानी से दूरी बनाता है, इसलिए काफी संख्या में गुलदार रिजर्व फॉरेस्ट से भी आए हैं। यह इस साल नहीं आए, हर साल आ रहे हैं। गन्ने के खेत, घास के मैदान, झाड़ियां, यह हर तरह के वातावरण रहना सीख लेता है। यह सालभर बच्चे देता है, टाइगर की तरह इसका कोई निश्चित समय नहीं। गन्ने के जंगल में इसे मारने वाला कोई जीव नहीं, इसलिए इनकी संख्या बढ़ रही है।
सवाल: अचानक हमलावर क्यों हो गए गुलदार
जबाव: गुलदार ने इंसानों से डरना छोड़ दिया। अब गुलदार दिन में भी हमला कर रहे हैं, जबकि जिम कार्बेट की रद्रप्रयाग का नरभक्षी तेंदुआ कहानी में गुलदार के रात में ही हमले करने का जिक्र है। लगातार इंसानों से सामना हो रहा है, जिस वजह से भूख लगने पर जानवर समझकर अब यह इंसानों पर भी हमले कर रहा है।

गुलदार में बढ़ा मोटापा, प्राकृतिक शिकार में बाधा
बिजनौर। गुलदार के इंसानों पर हमले बढ़ने के पीछे तमाम तर्काें के बीच एक नया तथ्य भी सामने आया है। अब जिले के गुलदार में मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है। इसका कारण जंगल में घूम रहे गोवंश का आसानी से शिकार होना और जरूरत से ज्यादा मांस खाने को मिलना है। हाल ही में दयालपुर में पिंजरे में फंसा गुलदार 70 किलोग्राम, तेलीपुरा में पकड़ा गया गुलदार 90 किलोग्राम का था। ऐसे में बढ़ते मोटापे से इनकी दौड़ने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। माना जा रहा है कि प्राकृतिक शिकार न मिलने पर यह आसानी से इंसानों पर हमले कर रहा है।
वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह कहते हैं कि रिजर्व फॉरेस्ट में गुलदार पांच से दस बार प्रयास करके एक शिकार करता है। जबकि यहां पर जंगलों में घूम रहे गोवंश आसानी से मिल जाते हैं। गुलदार को दौड़ना नहीं पड़ता। ज्यादा मांस मिलने से इनका वजन भी तेजी से बढ़ रहा है। गन्ने के खेतों में दौड़ने की गुंजाइश भी नहीं है। ऐसे में इनका ज्यादा तेज न दौड़ पाना अब इंसानों पर भारी पड़ रहा है।


गन्ने के खेतों का इकलौता राजा गुलदार
बिजनौर: जिले में 2.57 लाख हेक्टेयर गन्ने का रकबा है। रिजर्व फॉरेस्ट में बाघों का राज है। वहां बाघ गुलदार को मार भी देता है, जिस कारण इनकी संख्या भी नियंत्रित रहती है। वहीं गन्ने के खेतों में गुलदार ही हिंसक जीव है। इन्हें अन्य कोई जानवर नहीं मार पाता। इस कारण इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।


कब-कब गई गुलदार के हमने में जान

- 17 फरवरी 23 को नगीना के गांव किरतपुर में किशोरी अदिति को मारा

- 4 मार्च 23 नहटौर के गांव बल्लाशेरपुर में मासूम पूर्वी को मारा

- 18 मार्च 23 नगीना के गांव काजीवाला में मिथिलेश को मारा

- 19 अप्रैल 23 को अफजलगढ़ के गांव सीरवासचंद में तुंगल सैनी को मारा

- 23 अप्रैल 23 की रात रेहड़ के गांव उदयपुर चांदपुर में मासूम अर्शी को घर से उठाकर मार डाला

- 25 अप्रैल रेहड़ के गांव मूसापुर में खुशी छह वर्ष को ले गया और मार डाला

- 26 अप्रैल सुबह घूमने निकले युवक राहुल को मारा

- 21 जून को अफजलगढ़ के गांव मोहम्मदपुर राजौरी निवासी कमलेश देवी को उत्तराखंड की सीमा में मारा

- 22 जून रेहड़ के गांव मच्छमार में गुलदार ने हमला कर दस वर्षीय बच्चे को मारा

- 17 जुलाई को कोतवाली देहात गांव मखवाड़ा में महिला गुड्डी को मारा

- 27 जुलाई को गांव तेलीपुरा में युवक 18 वर्षीय संदीप को मार डाला

- 30 जुलाई को रेहड़ थाना क्षेत्र के ग्राम भटपुरा में बनैली नदी के पास जमना देवी 19 वर्ष को मार डाला

- 02 अगस्त को सिकंदरपुर में जंगल गए एक वृद्ध को मार डाला, उसका मांस भी खा गया

- 27 अगस्त को अफजलगढ़ के गांव शाहपुर जमाल में वृद्ध महिला को मार डाला
-28 अगस्त को साहूवाला रेंज के गांव भोगपुर में 13 वर्षीय किशोर को मार डाला
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