फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Polyhouse made to the courtyard

आंगन को बनाया पॉली हाउस

Sun, 15 Apr 2018 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Sun, 15 Apr 2018 12:19 AM IST
विज्ञापन
Polyhouse made to the courtyard
नई बस्ती में मुकेशचंद्र भटनागर के आंगन में बना पॉलीहाउस। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर मेंप्रकृति से प्यार कुछ भी करा सकता है। नई बस्ती कॉलोनी निवासी अधिवक्ता मुकेशचंद्र भटनागर अपने घर के आंगन को  पॉली हाउस बना दिया। मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने से लेकर सिंचाई में पानी की बचत तक के प्रयोग किए। मुकेशचंद्र भटनागर की इस बगिया में घूमने का आनंद लेने के लिए दिनभर लोग आते रहते हैं। उनकी यह बगिया एक किसान के लिए घर में सब्जी-फल लगाने का उत्तम प्रोजेक्ट भी है। 
विज्ञापन

मुकेशचंद्र भटनागर अपने पिता की तरह ही प्रकृति प्रेमी हैं। बचपन से ही आंगन में पौधे लगाने का शौक है। घर के आंगन में करीब 300 गज जमीन उन्होंने अपने इसी शौक के नाम कर रखी है। उनकी बगिया में हर तरह की सब्जी व फलों के पेड़ मिल जाएंगे। फूलों की 70 से अधिक प्रजाति हैं। अपने पौधों को बंदरों से बचाने के लिए मकान की बाउंड्री वॉल पर तारबाड़ी कराई। अब आंगन में पॉली हाउस तक बना दिया। उनके आंगन में हर तरह की फल-सब्जी, रंग बिरंगे फूल देखकर सभी का मन खुश हो जाता है। उन्होंने अंजीर का पौधा भी लगा रखा है। उनकी बगिया में टमाटर, ककड़ी, ग्वार, लोभिया, शिमला मिर्च, मूली, अरबी, पालक, मेथी, धनिया, खीरा, प्याज, खरबूजा, तरबूज, आम, अमरूद, पपीता, अनार, केला, मौसमी, पपीता, संतरा, कीनू, लौकाट, नाशपाती आदि के पौधे लगे हैं। कमल के फूल से लेकर गेंदा तक 70 से अधिक प्रजातियों के फूलों के पौधे हैं। वह बाजार से सब्जी नहीं खरीदते हैं। 
विज्ञापन

तकनीक से खेती कैसे की जाती है मुकेश इसकी मिसाल भी पेश करते हैं। वे अपने गमलों में पौधों की सिंचाई ड्रिप विधि से करते हैं। इसमें पानी बूंद-बूंद बनकर सीधे पौधे की जड़ में ही गिरता है। बताया कि कम पानी में ही पूरी फसल की सिंचाई होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जैविक खाद का करते हैं इस्तेमाल
मुकेशचंद्र भटनागर अपनी बगिया के एक एक सूखे या खराब पत्ते को इकट्ठा कर उससे जैविक खाद बनाते हैं। डी कंपोजर का फसलों पर स्प्रे करते हैं। आम की सूखी लकड़ियों को पानी से भरी बाल्टी में भिगोकर रखते हैं। उनके गलने पर तोड़कर क्यारियों में डालते हैं। इस तरह से मिट्टी में कार्बन की कमी नहीं आती है। यह बगिया किसानों के लिए एक अच्छा प्रोजेक्ट भी है। मुकेश बाजार से कभी सब्जी नहीं खरीदते हैं। किसान अगर अपने खेतों की मेढ़ पर ही सब्जी बो दें तो पूरे साल बाजार में सब्जी लेने नहीं जाना होगा। मुकेश के अनुसार उन्होंने अपने घर में कांक्रिट का जंगल बनाने के बजाए प्रकृति के लिए जगह बनाई है। उनके अनुसार उन्होंने एक वीडियो में देखा था कि एक आदमी ने 11 गमलों में 70 किलो से ज्यादा प्याज उगाई। ऐसा तो अपने घर में सभी कर सकते हैं। इससे घरों में हरियाली बढ़ेगी और शुद्ध फल-सब्जी भी मिलेंगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed