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जनपद बिजनौर में शुरु हुई प्लाज्मा थैरेपी
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बिजनौर जिले में शुरू हुई प्लाज्मा थेरेपी
बिजनौर। जिले में भी अब प्लाजमा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार किया जाएगा। इसकी पहल पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल एवं पुलकित मेमोरियल ब्लड बैंक ने संयुक्त रूप से की है। जिले में ऐसा पहली बार हुआ है। कोरोना संक्रमित मरीज का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज संभव हुआ है।
सरकारी स्तर पर अब तक जिला अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी शुरू नहीं हो पाई थी। अब यह निजी स्तर के दो चिकित्सकों ने मिलकर शुरू की है। इनमें से एक पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. अवधेश वशिष्ठ और पुलकित ब्लड बैंक के संचालक पैथोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह ने की है। प्लाज्मा एफेरेसिस मशीन स्थापित कर दी गई है तथा उसकी मंगलवार की रात सफल टेस्टिंग भी हो गई है। इस दौरान एक मरीज का इस थेरेपी से उपचार किया गया है। अभी तक जनपद में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं थी।
दोनों चिकित्सकों की मेहनत लाई रंग
प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार करने के लिए पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अवधेश वशिष्ठ और पुलकित ब्लड बैंक के संचालक डॉ. योगेंद्र सिंह द्वारा प्रयास किए गए, जो मंगलवार की रात को सफल हो गए। आगरा से प्लाज्मा थेरेपी मशीन मंगवाई गई है, जिसे सफलतापूर्वक पुलकित ब्लड बैंक में स्थापित कर दिया गया है।
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पहले ही दिन मिल गया प्लाज्मा डोनर
प्लाज्मा थेरेपी से उपचार करने के लिए लगाई गई मशीन में मंगलवार की रात पहले ही दिन मुरादाबाद के रहने वाले सुनील कुमार शर्मा (59) ने बिजनौर निवासी शशांक भारद्वाज (23) को अपना प्लाज्मा डोनेट किया। प्लाज्मा डोनेट करने की प्रक्रिया के दौरान डॉ. अवधेश वशिष्ठ, डॉ. योगेंद्र सिंह एवं उनका स्टाफ मौजूद रहा। डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि दो दिन अस्पताल में डोनेट प्रक्रिया की टेस्टिंग की जाएगी। वहीं तीसरे दिन से प्लाज्मा थेरेपी पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी। कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ होने के 15 दिन से लेकर चार महीने तक कोविड संक्रमित मरीजों के लिए अपना प्लाज्मा हर पांचवें दिन में डोनेट कर सकता है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह बताते हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने से मरीज का एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है। आगरा में मेडिकल एजेंसी से रात में नौ बजे किट मंगवाई। एक डोनर से दो डोज बनती हैं, जो 200-200 एमएल की होती हैं।
पहले आठ दिन होते हैं बेहद ही गंभीर
क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डा. अवधेश वशिष्ठ बताते हैं कि कोरोना संक्रमित होने पर मरीज के लिए शुरुआत के आठ दिन बेहद ही क्रिटिकल होते हैं। इस अवधि में ही सर्वाधिक ऑक्सीजन स्तर गड़बड़ाता है। इसके बाद स्थिति में सुधार होने लगता है। उस दौरान अगर प्लाज्मा चढ़ाया जाए तो यह उसके लिए रामबाण होता है।
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बिजनौर। जिले में भी अब प्लाजमा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार किया जाएगा। इसकी पहल पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल एवं पुलकित मेमोरियल ब्लड बैंक ने संयुक्त रूप से की है। जिले में ऐसा पहली बार हुआ है। कोरोना संक्रमित मरीज का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज संभव हुआ है।
सरकारी स्तर पर अब तक जिला अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी शुरू नहीं हो पाई थी। अब यह निजी स्तर के दो चिकित्सकों ने मिलकर शुरू की है। इनमें से एक पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. अवधेश वशिष्ठ और पुलकित ब्लड बैंक के संचालक पैथोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह ने की है। प्लाज्मा एफेरेसिस मशीन स्थापित कर दी गई है तथा उसकी मंगलवार की रात सफल टेस्टिंग भी हो गई है। इस दौरान एक मरीज का इस थेरेपी से उपचार किया गया है। अभी तक जनपद में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं थी।
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दोनों चिकित्सकों की मेहनत लाई रंग
प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार करने के लिए पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अवधेश वशिष्ठ और पुलकित ब्लड बैंक के संचालक डॉ. योगेंद्र सिंह द्वारा प्रयास किए गए, जो मंगलवार की रात को सफल हो गए। आगरा से प्लाज्मा थेरेपी मशीन मंगवाई गई है, जिसे सफलतापूर्वक पुलकित ब्लड बैंक में स्थापित कर दिया गया है।
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पहले ही दिन मिल गया प्लाज्मा डोनर
प्लाज्मा थेरेपी से उपचार करने के लिए लगाई गई मशीन में मंगलवार की रात पहले ही दिन मुरादाबाद के रहने वाले सुनील कुमार शर्मा (59) ने बिजनौर निवासी शशांक भारद्वाज (23) को अपना प्लाज्मा डोनेट किया। प्लाज्मा डोनेट करने की प्रक्रिया के दौरान डॉ. अवधेश वशिष्ठ, डॉ. योगेंद्र सिंह एवं उनका स्टाफ मौजूद रहा। डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि दो दिन अस्पताल में डोनेट प्रक्रिया की टेस्टिंग की जाएगी। वहीं तीसरे दिन से प्लाज्मा थेरेपी पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी। कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ होने के 15 दिन से लेकर चार महीने तक कोविड संक्रमित मरीजों के लिए अपना प्लाज्मा हर पांचवें दिन में डोनेट कर सकता है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह बताते हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने से मरीज का एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है। आगरा में मेडिकल एजेंसी से रात में नौ बजे किट मंगवाई। एक डोनर से दो डोज बनती हैं, जो 200-200 एमएल की होती हैं।
पहले आठ दिन होते हैं बेहद ही गंभीर
क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डा. अवधेश वशिष्ठ बताते हैं कि कोरोना संक्रमित होने पर मरीज के लिए शुरुआत के आठ दिन बेहद ही क्रिटिकल होते हैं। इस अवधि में ही सर्वाधिक ऑक्सीजन स्तर गड़बड़ाता है। इसके बाद स्थिति में सुधार होने लगता है। उस दौरान अगर प्लाज्मा चढ़ाया जाए तो यह उसके लिए रामबाण होता है।